वाह मानसी! पैरों में पेन-दिल में हौसला, कॉन्फीडेंस की मिसाल हो तुम

हाथों में पेन पकड़कर बोर्ड परीक्षा देने वालों में भी इतना आत्मविश्वास नहीं दिखता, जितना क‍ि इस साल की माध्यमिक परीक्षा की परीक्षार्थी मानसी में आपको दिख जाएगा. मानसी जन्म से चलने और बोलने में सक्षम है, लेकिन दोनों हाथों से कोई भी काम करने में असमर्थ है. इसके बावजूद वह एक प्रतिभाशाली छात्रा है और बिना राइटर अपनी परीक्षा खुद दे रही हैं.

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मानसी वर्मा मानसी वर्मा

aajtak.in

  • कूचबिहार,
  • 24 फरवरी 2023,
  • अपडेटेड 12:51 PM IST

Board Exam 2023: अगर आपको खुद पर विश्वास है तो शारीरिक अक्षमताएं भी आपकी कामयाबी के आड़े नहीं आ सकती है. पश्चिम बंगाल के मेखलीगंज की एक छात्रा ऐसा ही मिसाल पेश कर रही है जिसकी हर तरफ तारीफ हो रही है. हम बात कर रहे हैं माध्यमिक परीक्षा दे रही मानसी वर्मा की, जो दिव्यांगता के चलते अपने हाथों के बजाय पैर से लिखकर बोर्ड परीक्षा दे रही है. यही नहीं, स्कूल के प्रिंसिपल और टीचर भी उसकी लिखावट की सराहना करते हैं.

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प्रदेश सहित कूचबिहार में माध्यमिक परीक्षा शुरू हो गई है. इस जिले में इस साल 26627 छात्र माध्यमिक परीक्षा दे रहे हैं. लेकिन इन सभी के बीच मेखलीगंज में मानसी वर्मा की लड़ाई बिल्कुल अलग है. मानसी इस साल की माध्यमिक परीक्षा की परीक्षार्थी हैं, जो जन्म से ही शारीरिक रूप से दिव्यांग है. 

मानसी मेखलीगंज प्रखंड के रानीरहाट ग्राम पंचायत के जोठिया बाड़ी मोहल्ले में रहती है. शालमारी उच्च विद्यालय की यह छात्रा परीक्षा पुस्तिका में लिखकर परीक्षा दे रही है. वह जन्म से चलने और बोलने में सक्षम है, लेकिन दोनों हाथों से कोई भी काम करने में असमर्थ है. इसलिए मानसी को कम उम्र से ही लिखने में परेशानी होती रही है. इसके बावजूद वह एक प्रतिभाशाली छात्रा है. मानसी मेखलीगंज के आलोक झरी स्कूल की छात्रा है. प्रतिभाशाली मानसी बाकी छात्रों की तरह परीक्षा दे रही है मगर वह अपने हाथ के बजाय अपने पैरों से परीक्षा लिख ​​रही है.  

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मानसी की मां स्वप्ना वर्मा का कहना है कि शारीरिक अक्षमता के कारण वह जन्म से ही पैरों से लिखती आ रही है. शालमारी विद्यालय के प्रधानाध्यापक सतीश चंद्र रॉय का कहना है कि मानसी हमेशा से एक मेधावी छात्रा रही है. मानसी पैर के साथ लिखने में उनकी लिखने की स्पीड बहुत कम है. इस साल की माध्यमिक परीक्षा में माध्यमिक शिक्षा मंडल द्वारा मानसी को पेपर लिखने के लिए अतिरिक्त 45 मिनट का समय दिया गया है.

(पश्चिम बंगाल से प्रबीर कुंडू के इनपुट के साथ)

 

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