लंबे समय से एनसीईआरटी की ओर से इंडिया और भारत नाम हटाने को लेकर चल रहे विवाद पर शिक्षा मंत्रालय ने विराम लगाया है. शिक्षा मंत्रालय ने राज्यसभा में दिए जवाब में कहा कि एनसीईआरटी इंडिया और भारत के बीच अंतर नहीं करती, साथ ही कहा कि लेकिन ये "औपनिवेशिक मानसिकता" से दूर जाने को प्रोत्साहित करता है.
उत्तर में यह भी कहा गया है कि एनसीईआरटी, शिक्षा मंत्रालय के अंतर्गत एक स्वायत्त निकाय है जो स्कूली पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों की तैयारी में शामिल है. यह भारतीय भाषा (भारतीय भाषाओं) में शब्दों के उपयोग को आगे बढ़ाने में भी अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेगा.
भारत के संविधान के अनुच्छेद 1 में कहा गया है कि "इंडिया, जो कि भारत है, राज्यों का एक संघ होगा. भारत का संविधान 'इंडिया' और 'भारत' दोनों को देश के आधिकारिक नामों के रूप में मान्यता देता है जिनका उपयोग परस्पर किया जा सकता है. एनसीईआरटी हमारे संविधान में निहित इस भावना को विधिवत स्वीकार करता है और दोनों के बीच अंतर नहीं करता है.
जैसे-जैसे हम सामूहिक रूप से औपनिवेशिक मानसिकता से दूर जा रहे हैं और भारतीय भाषा (भारतीय भाषाओं) में शब्दों के उपयोग को प्रोत्साहित कर रहे हैं, स्कूली पाठ्यक्रम और पाठ्यपुस्तकों की तैयारी में शामिल शिक्षा मंत्रालय के तत्वावधान में एक स्वायत्त निकाय एनसीईआरटी भी उसी को आगे बढ़ाने में अपना सर्वश्रेष्ठ प्रयास करेगा.
बता दें कि हाल ही में यह खबर सामने आई थी कि एनसीईआरटी आने वाले समय में पाठ्यपुस्तकों को इंडिया से बदलकर भारत कर देगा. हालांकि एनसीईआरटी की ओर से इसे लेकर कोई आधिकारिक घोषणा नहीं की गई थी. अब शिक्षा मंत्रालय की ओर से दिए गए जवाब के बाद यह स्पष्ट हो गया है कि एनसीईआरटी भविष्य में पाठ्यपुस्तकों में इस तरह से कोई बदलाव नहीं करेगा.
मिलन शर्मा