MP: मोहन सरकार का बड़ा फैसला, स्वास्थ्य विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग का किया विलय, जानें क्या होगा फायदा

मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दोनों विभागों के विलय के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस विलय के साथ विभागों के कार्य करने की क्षमता भी बढ़ेगी.

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मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने मंत्रियों को विभागों का आवंटन किया। (फोटो:X) मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव ने अपने मंत्रियों को विभागों का आवंटन किया। (फोटो:X)

रवीश पाल सिंह

  • भोपाल,
  • 24 जनवरी 2024,
  • अपडेटेड 8:12 AM IST

मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री मोहन यादव की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट बैठक में बड़ा फैसला लेते हुए लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग का विलय करने के प्रस्ताव को मंजूरी दे दी गई है. लोक स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग और चिकित्सा शिक्षा विभाग का विलय कर 'लोक स्वास्थ्य एवं चिकित्सा शिक्षा विभाग' के रूप में पुनर्गठित किया जाएगा.

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क्या होगा विलय का फायदा?
संसदीय कार्य मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने दोनों विभागों के विलय के बारे में जानकारी देते हुए बताया कि इस विलय के साथ विभागों के कार्य करने की क्षमता भी बढ़ेगी. इसमें मेडिकल कॉलेज, जिला अस्पताल के बीच अब तक जो समन्वय की स्थिति नहीं रहती थी, अब वो हो सकेगी. जिससे निश्चित तौर पर प्रदेश की जनता को इसका लाभ मिलेगा.
 
इसके अलावा प्रदेश सरकार के इस फैसले से मेडिकल कॉलेज रूटीन चिकित्सा सेवाएं देने के बजाय अति गंभीर व विशिष्ट उपचार, चिकित्सा शिक्षा पर ध्यान केंद्रित कर सकेंगे. शिशु मृत्यु दर, मातृ मृत्यु दर की प्रभावी निगरानी हो सकेगी. मेडिकल कॉलेजों से जिला चिकित्सालयों को संबद्ध करना आसान हो जाएगा.

अब प्रदेश के लोगों को इन दो विभागों के अलग-अलग चक्कर नहीं लगाने होंगे. विजयवर्गीय के मुताबिक पहले ही इन दोनों विभागों को एक करने की अनुशंसा की जा चुकी थी जिसपर कैबिनेट में चर्चा होनी थी और चर्चा के बाद प्रस्ताव को पास कर दिया गया. प्रदेश सरकार के इस फैसले से मेडिकल कॉलेज रूटीन चिकित्सा सेवाएं देने के साथ-साथ अब क्रिटिकल कंडीशन वाले मरीज़, जटिल ऑपरेशन और मेडिकल एजुकेशन का काम कर सकेंगे.

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बता दें कि वर्तमान में आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय चिकित्सा, दंत चिकित्सा, नर्सिंग, आयुर्वेद, यूनानी, होम्योपैथी, नेचुरोपैथी आदि में पाठ्यक्रम संचालित करता है. नर्सिंग और पैरामेडिकल संस्थाओं और छात्र-छात्राओं की संख्या में बढ़ोतरी को देखते हुए आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय को नर्सिंग एवं पैरामेडिकल को छोड़कर अन्य विषयों के पाठ्यक्रम संचालित करने का दायित्व दिया जाएगा.

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