ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों के बीच एक बेहद चौंकाने वाला दावा सामने आया है. अलग-अलग रिपोर्ट्स और चश्मदीदों के मुताबिक, ईरानी अधिकारी प्रदर्शन के दौरान मारे गए लोगों के शव परिवारों को सौंपने से पहले उनसे ‘बुलेट फीस’ वसूल रहे हैं. आइये समझते हैं ये ‘बुलेट फीस’ क्या है, जिसका कई रिपोर्ट में दावा किया जा रहा है.
पश्चिमी मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार ईरान में अब तक 2,500 से ज्यादा प्रदर्शनकारियों की मौत हो चुकी है और 10,000 से अधिक लोगों को हिरासत में लिया गया है. न्यूयॉर्क पोस्ट में प्रकाशित एक रिपोर्ट के मुताबिक, तेहरान से बोल रही एक गुमनाम महिला का कहना है कि असली आंकड़ा इससे कहीं ज्यादा हो सकता है, क्योंकि डर के चलते कई परिवार मौत की जानकारी तक साझा नहीं कर पा रहे हैं.
महिला ने बताया कि उसके करीबी दोस्त के कजिन की गोली लगने से मौत हो गई. आरोप है कि जब उस शख्स ने अपनी पत्नी की तरफ तानी गई लेजर लाइट देखी और उसे बचाने के लिए सामने आया, तो उसके चेहरे पर गोली मार दी गई. उसकी मौके पर ही मौत हो गई.
शव पाने के लिए लाखों की वसूली
सबसे हैरान करने वाली बात यह है कि अधिकारियों ने शव सौंपने से पहले परिवार से 500 मिलियन तोमान (करीब 3 लाख रुपये) की मांग की. महिला के मुताबिक, आधिकारिक रिकॉर्ड में मौत की वजह ‘चेहरे पर किसी नुकीली चीज से चोट’ लिखी गई, जबकि गोली लगने की बात दर्ज ही नहीं की गई. हालांकि परिवार से बुलेट फीस जरूर ली गई.आलोचकों का कहना है कि यह तरीका सिर्फ पैसे वसूलने के लिए नहीं, बल्कि मृतकों की पहचान छिपाने और विरोध को दबाने के लिए अपनाया जा रहा है. New York Post से बातचीत में तेहरान की उस युवती ने कहा कि सरकार इतनी बेरहम हो चुकी है कि वह निहत्थे लोगों को भी नहीं छोड़ रही. पहले गोलियों से मारती है और फिर उनके शवों के लिए पैसे मांगती है, और इसे 'बुलेट फीस' कहा जाता है.
CNN की रिपोर्ट में भी ऐसे ही आरोप
अमेरिकी चैनल CNN की रिपोर्ट के मुताबिक, 23 वर्षीय फैशन डिजाइन की छात्रा रोबिना अमिनियन की गोली लगने से मौत के बाद उसके परिवार को शव लेने में भारी मुश्किलों का सामना करना पड़ा.डर के कारण परिवार ने बिना किसी अंतिम संस्कार के उसे एक बेनाम कब्र में दफना दिया, ताकि सरकार शव वापस न ले जाए या पैसे न मांगे.CNN से बात करने वाले एक अन्य ईरानी नागरिक ने बताया कि कई मामलों में तो परिवारों को शव लेने तक की इजाजत नहीं दी जा रही है और अस्पताल व मुर्दाघर पूरी तरह भरे पड़े हैं.
आंसू गैस और इंटरनेट बंदी के बीच भी प्रदर्शन
चश्मदीदों के मुताबिक, आंसू गैस, पेपर स्प्रे और साउंड बम के बावजूद लोग लगातार सड़कों पर उतर रहे हैं. कई जगह बच्चों और गर्भवती महिलाओं को भी प्रदर्शनों में शामिल देखा गया.इंटरनेट और मीडिया ब्लैकआउट के कारण ईरान लगभग पूरी तरह दुनिया से कटा हुआ है. कुछ लोग सैटेलाइट के जरिए जानकारी भेजने की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन आरोप है कि पुलिस घर-घर छापेमारी कर सैटेलाइट डिश जब्त कर रही है.
दिसंबर 2025 में महंगाई और मुद्रा संकट से शुरू हुआ यह विरोध अब 180 से ज्यादा शहरों और 31 प्रांतों तक फैल चुका है. हालात ऐसे हो गए हैं कि दुनिया भर में ईरान सरकार की कड़ी आलोचना की जा रही है.
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