मैदानी इलाकों में शून्य से कम तापमान होने के बाद भी क्यों नहीं होती बर्फबारी? जानें वजह

उत्तर भारत में कड़ाके की ठंड पड़ रही है. कई मैदानी इलाके जैसे हिसार और अलवर में तापमान शून्य से नीचे दर्ज किया गया, लेकिन फिर भी इन इलाकों में बर्फबारी नहीं हुई. क्या आपने कभी सोचा है कि शू्न्य से नीचे पारा पहुंचने के बाद भी मैदानी इलाकों में बर्फबारी क्यों नहीं होती? इसके पीछे भौगोलिक कारणों के साथ-साथ मौसम से जुड़ी तकनीकी वजह भी हैं.

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Weather Update (Representaional Image) Weather Update (Representaional Image)

कुमार कुणाल

  • नई दिल्ली,
  • 17 जनवरी 2023,
  • अपडेटेड 4:33 PM IST

इस बार सर्दियों में कई मैदानी इलाकों में भी तापमान शून्य से नीचे यानी माइनस में चला गया. तापमान माइनस में जाते ही लोगों के दिमाग में बर्फबारी आती है. लेकिन मैदानी इलाकों में आमतौर पर बर्फबारी नहीं देखी जाती और इसीलिए अगर दिल्ली में तापमान जीरो से नीचे चला भी जाए तो बर्फबारी नहीं हो सकती इसके पीछे भौगोलिक कारणों के साथ-साथ  मौसम से जुड़ी तकनीकी वजह भी हैं. 

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मौसम विज्ञानी ने बताई वजह
आईएमडी यानी मौसम विभाग के डायरेक्टर जनरल मृत्युंजय महापात्र बताते हैं, "बर्फबारी एक तरह का प्रेसिपिटेशन है यानी उसके लिए बादलों की जरूरत होती है. मैदानी इलाकों में बादल के होने से तापमान बढ़ता है और ऐसे में शून्य डिग्री के साथ-साथ बादल का कॉम्बिनेशन हो जाए ऐसा होना काफी मुश्किल है."

दिल्ली के आसपास कई सारे इलाकों में पिछले कुछ दिनों से तापमान माइनस में दर्ज किया जा रहा है. मंगलवार को भी तापमान हिसार, चुरू और अलवर जैसे स्टेशनों पर जीरो डिग्री से कम दर्ज हुआ. आमतौर पर मैदानी इलाकों में तापमान माइनस में तब जाता है जब हिमालय पर होने वाली बर्फबारी के बाद ठंडी बर्फीली हवाएं उत्तर पश्चिम भारत के मैदानी इलाकों का रुख करती हैं. आमतौर पर यह हवा शुष्क होती है और उसके साथ बादलों का फॉरमेशन नहीं होता है. इसलिए इनकी वजह से तापमान काफी नीचे तो चला जाता है लेकिन बर्फबारी जैसे हालात पैदा नहीं होते. 

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कई सारे मैदानी इलाकों में खेतों में ऐसे मौसम में पाला देखने को मिलता है. पाला दरअसल बर्फ की एक पतली परत होती है, जो या तो वायुमंडल में मौजूद पानी के कणों के कम तापमान पर जम जाने से बनता है या फिर पेड़ पौधे की कोशिकाओं से निकलने वाले पानी को भी ठंडा तापमान बर्फ में तब्दील कर देता है. मैदानी इलाकों में जब पाला पड़ता है तो उससे फसलों को भी काफी नुकसान होता है.

 

 

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