अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने एक बार फिर से ग्रीनलैंड को नियंत्रण में लेने की रुचि दिखाई है. इससे न सिर्फ डेनमार्क और ग्रीनलैंड तिलमिलाया है, बल्कि सारे नॉर्डिक और स्कैंडीनेवियाई देश गोलबंद होते दिख रहे हैं. ऐसे में इसे वाइकिंग्स की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है. क्योंकि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दोनों ही दृष्टिकोण से ग्रीनलैंड से नॉर्डिक देशों के लिए महत्वपूर्ण है.
नार्वे, स्वीडन, डेनमार्क, ग्रीनलैंड, फिनलैंड और आइसलैंड, इन देशों को स्कैंडीनेवियाई और नॉर्डिक देश कहा जाता है. आज से हजारों साल पहले इन देशों के लोग, जिन्हें नॉर्मन या वाइकिंग कहा जाता था. इन लोगों ने इंग्लैंड और फ्रांस जैसे यूरोपीय देशों पर कई बार हमला किया. वाइकिंग को बेहतरीन खोजकर्ता, व्यापारी और लुटेरों के तौर पर जाना जाता है. अलग-अलग जत्थों में वाइकिंग हजारों किलोमीटर तक समुद्र की यात्रा कर नई-नई जमीन खोजते और वहां हमला कर उसे अपने कब्जे में कर लेते थे. अगर कब्जा स्थायी नहीं होता तो लूटपाट कर चलते बनते थे.
ग्रीनलैंड इन्हीं वाइकिंग्स की सबसे बड़ी खोज थी, जो उनके स्कैंडीनेवियाई जमीन (नार्वे, स्वीडन, डेनमार्क) से वैसे तो बहुत दूर था, लेकिन सैकड़ों साल पहले यह वाइकिंग्स का दूसरा घर बन गया था. आज भी ग्रीनलैंड इन देशों में से एक है और सांस्कृतिक रूप से मजबूती से इनसे से जुड़ा है. अब एक बार फिर से ये वाइकिंग्स ग्रीनलैंड के मुद्दे पर एक होते दिख रहे हैं.
तेजी से बदलते परिदृश्य में जहां नॉर्डिक देश ये कहते नजर आ रहे हैं कि नाटो अब बिना अमेरिका के रहेगा. इसे वाइकिंग्स की वापसी के तौर पर देखा जा रहा है. वही वाइकिंग्स जिन लोगों ने क्रिस्टोफर कोलंबस से भी पहले अमेरिकी महाद्वीप पर कदम रखा था और भीषण रक्तपात मचाया था. ऐसे में अतीत के पन्ने खोलते हुए समझते हैं कि कैसे डेनमार्क और दूसरे नॉर्डिक देशों के लिए ग्रीनलैंड इतना महत्वपूर्ण है.
क्या है अमेरिकी और ग्रीनलैंड के बीच टकराव की कहानी
आज से हजार साल पहले, वाइकिंग्स का मूल अमेरिकी लोगों के साथ एक चौंकाने वाला टकराव हुआ था. इसका अंत विनाशकारी रहा. जब प्राचीन नॉर्स खोजकर्ता उत्तरी अमेरिका पहुंचे, तो उन्होंने इतिहास रच दिया. बीबीसी हिस्ट्री एक्ट्रा के पॉडकास्ट में इतिहासकार और वाइकिंग विशेषज्ञ एलेनोर बैराक्लॉ ने इस कहानी को समझाते हुए बताया है कि जब लीफ एरिकसन और उनके साथी नॉर्स खोजकर्ताओं ने पहली बार उस क्षेत्र के हरे-भरे जंगलों से भरे समुद्र तटों को देखा, तब वे उत्तरी अमेरिका में कदम रखने वाले पहले यूरोपीय बन गए. जहां इन लोगों ने कदम रखा वो अब का उत्तरपूर्वी कनाडा था.
यह घटना सन् 1000 ई. के आसपास की है. क्रिस्टोफर कोलंबस द्वारा उत्तरी अमेरिका की खोज किए जाने से सदियों पहले वहां वाइकिंग्स पहुंच चुके थे. इसके बाद जो कुछ हुआ वह एक सांस्कृतिक टकराव और कम समय में हुई भीषण हिंसा की कहानी थी. नॉर्स गाथाओं के अनुसार, ग्रीनलैंड में रहने वाले वाइकिंग्स का अभियान दल ही उत्तरी अमेरिका तक पहली बार पहुंचा था, जिनकी वहां के मूल निवासियों से मुठभेड़ हुई थी.
इस अभूतपूर्व मुठभेड़ ने हजारों मील की दूरी से आए, एकदम अलग और भिन्न वातावरणों व विश्वासों से प्रभावित लोगों को आमने-सामने ला खड़ा किया. इसकी शुरुआत , जैसा कि नॉर्स साहसिक कहानियों में अक्सर होता है, हिंसा से हुई. फिर दोनों के बीच सामंजस्य बैठा और फिर हिंसा का दौर शुरू हुआ.
ग्रीनलैंड में वाइकिंग्स सेटलमेंट से शुरू होती है कहानी
ग्रीनलैंड में आकर बसने वाले और फिर वहां से कनाडा के तटों तक की यात्रा पर जाने वाले वाइकिंग टोलियों की कहानी भी काफी रोचक है. कहानी की शुरुआत एरिक द रेड से शुरू होती है. एरिक द रेड लीफ एरिकसन के पिता थे. एरिक गुस्सैल स्वभाव के थे. गुस्से की वजह से किसी की भी हत्या कर देने की प्रवृत्ति के कारण उन्हें नॉर्वे और बाद में आइसलैंड से भी भगोड़ा घोषित कर दिया गया था.
निर्वासित होने के बाद, एरिक नए देशों की तलाश में आइसलैंड से पश्चिम की ओर रवाना हुआ. अपने साथ कुछ जहाजों और साथियों को लेकर वह ग्रीनलैंड पहुंचे और लगभग 985 ई. में वहां आधिकारिक नॉर्स बस्तियां स्थापित कीं.
एरिक द रेड जैसे अस्थिर लेकिन शक्तिशाली और महत्वाकांक्षी शख्स के लिए, ग्रीनलैंड का आकर्षण ज्यादा नहीं था. एरिक व्यक्तिगत रूप से बहुत करिश्माई रहा होगा. क्योंकि अटलांटिक महासागर के पार धरती की खोज के लिए एक जंगली पश्चिमी मानसिकता की आवश्यकता होती है – और इसलिए एरिक जैसा व्यक्ति ग्रीनलैंड जैसी जगह पर बसने के लिए एकदम सही व्यक्ति था. क्योंकि यह एक अज्ञात क्षेत्र में प्रवेश करने जैसा है.
ग्रीनलैंड ने ज़मीन और जगह तो दी, लेकिन इसके अलावा और कुछ खास नहीं. एरिक की बस्ती की आबादी कुछ हज़ार ही थी. कठोर सर्दियों और सीमित संसाधनों के कारण ग्रीनलैंड से पश्चिम की ओर, अनजान इलाकों में और अधिक भूमि की खोज में अभियान चलाने पड़े. नॉर्स गाथाओं में वर्णित है कि एरिक के बेटे लीफ ने इन अभियानों का नेतृत्व किया था. लेकिन वह किस चीज़ की खोज कर रहा था?
ऐसे शुरू हुई ग्रीनलैंड से वीनलैंड की यात्रा
ऐसा लगता है कि किसी नई जगह की खोज के लिए वहां प्रचूर मात्रा में प्राकृतिक संसाधन होना महत्वपूर्ण होता हैं. उससे भी ज्यादा खोजकर्ताओं में उस जगह जाने को लेकर रोमांच की भावना होनी चाहिए. साथ ही यह उम्मीद भी कि वहां कोई नई बस्तियां मिल जाए. ग्रीनलैंड के पश्चिमी तट से रवाना होकर, लीफ एरिकसन का अभियान संभवतः लैब्राडोर के तट पर पहुंचा - जिसे नॉर्स लोग मार्कलैंड या 'वन भूमि' कहते थे. फिर आगे दक्षिण की ओर रवाना होकर उस स्थान पर पहुंचा, जिसे उन्होंने विनलैंड (उत्तरी अमेरिका का तटीय इलाका) नाम दिया. नइसे न्यूफ़ाउंडलैंड का उत्तरी छोर माना जाता है.
वाइकिंग गाथाओं में लीफ ने जंगल और प्राकृतिक संसाधनों से भरपूर एक समृद्ध जमीन की खोजी. यह जगह ग्रीनलैंड के पथरीले, दुर्गम तट से बिल्कुल अलग थी. वहां उतरने के तुरंत बाद, उनका सामना इस क्षेत्र के मूल निवासियों से हुआ, जो संभवतः बेओथुक या अन्य एल्गोनक्वियन-भाषी समूहों के पूर्वज थे.
यह भी पढ़ें: ट्रंप चाहते तो बहुत कुछ हैं... मगर इन दो PM ने बता दिया ग्रीनलैंड पर कब्जा सिर्फ सपना ही है!
नॉर्स खोजकर्ताओं ने इन लोगों को 'स्क्रेलिंग्स' कहा. इसका मतलब 'दुखी लोग' या 'कमजोर लोग' था. अपमानजनक नाम देने के बावजूद, नॉर्स गाथाओं से मिले साक्ष्यों के अनुसार, नॉर्स और मूल अमेरिकी समुदायों के बीच शुरुआती संपर्क शुरू में शांतिपूर्ण थे. यह कहानी काफी सौहार्दपूर्ण ढंग से शुरू होती है. वे वस्तुओं का आदान-प्रदान कर रहे थे, दूध उत्पादों के बदले कपड़ा, खाल और फर का व्यापार कर रहे थे.
व्यापार से लेकर रक्तपात तक अमेरिका पर वाइकिंग्स का कहर
शांतिपूर्ण शुरुआत के बावजूद, रिश्ते जल्द ही बिगड़ गए और इनके बीच शत्रुता भड़क उठी. नेटिव अमेरिकन और वाइकिंग के शांतिपूर्ण संबंध टूट गए. नॉर्स लोगों ने वहां रहने वाले कुछ लोगों को मार दिया. फिर जाहिर तौर पर जवाबी कार्रवाई हुई. देखते ही देखते, अटलांटिक महासागर के उस पार की दो अलग-अलग संस्कृतियों के बीच पनपता यह रिश्ता प्रतिशोधात्मक हिंसा और रक्तपात के दुष्चक्र में तब्दील हो गया.
वाइकिंग्स ने जल्द ही उस समृद्ध भूमि को त्याग दिया, जिसे उन्होंने खोजा था और ग्रीनलैंड में अपने घर लौट आए, क्योंकि मूल निवासियों ने उन्हें प्रभावी रूप से खदेड़ दिया था. हालांकि, लीफ एरिक्सन अकेले ऐसे नॉर्स अन्वेषक नहीं थे जिन्होंने वहां बस्ती बसाने का प्रयास किया था. उन्होंने दूसरे वाइकिंग्स दलों के लिए अमेरिकी महाद्वीप का दरवाजा खोल दिया था.
नॉर्स गाथाओं में एरिक के बच्चों द्वारा विनलैंड के लिए चलाए गए कई अभियानों का वर्णन है, लेकिन उत्तरी अमेरिकी महाद्वीप के किनारे तक किए गए ये बाद के अभियान भी उसी तरह रक्तपात के साथ खत्म हुए. वाइकिंग अपने स्वभाववश वहां लूट-खसोट के बाद वापस अपनी देश ग्रीनलैंड लौट आए.
ग्रीनलैंड और फिर ग्रीनलैंड से आगे के साहसिक अभियानों के बावजूद, वाइकिंग्स उत्तरी अमेरिका में स्थायी रूप से नहीं बस पाए और एरिक के बसाए ग्रीनलैंड की बस्ती ही उनकी शरणस्थली बनी. यूरोप में वाइकिंग युग के अंत और उत्तरी अमेरिका के असफल अभियानों के बाद, ग्रीनलैंडवासी पूर्व में रहने वाले अपने रिश्तेदारों से तेजी से अलग-थलग पड़ते चले गए. सदियों से ग्रीनलैंड की बस्ती सिकुड़ती चली गई.
ग्रीनलैंड के मुद्दे पर नॉर्डिक देशों ने दिखाई एकजुटता
ऐसे में जब अमेरिका ने ग्रीनलैंड पर कब्जे की मंशा जाहिर की है, तो न सिर्फ डेनमार्क की प्रधानमंत्री मेटे फ्रेडरिक्सन ने अपना सख्त रुख दिखाया है, बल्कि स्वीडन के प्रधानमंत्री उल्फ क्रिस्टर्सन ने भी कहा कि स्वीडन डेनमार्क के साथ पूरी तरह से खड़ा है. उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि केवल डेनमार्क और ग्रीनलैंड को ही अपने भविष्य का फैसला करने का अधिकार है. स्वीडन ने उत्तर में अपने रक्षा निवेश में उल्लेखनीय वृद्धि की है, जिसमें 2028 तक दो उप-आर्कटिक मशीनीकृत ब्रिगेड का विकास भी शामिल है.
वहीं नार्वे के प्रधानमंत्री जोनास गहर स्टोरे ने इस बात की पुष्टि की कि ग्रीनलैंड डेनमार्क साम्राज्य का एक अभिन्न अंग है. इसके अलावा, नॉर्वे ने भी अब बोडो स्थित अपने उच्च सुरक्षा संयुक्त सैन्य कमान के माध्यम से आर्कटिक क्षेत्र में व्याप्त खतरों की निगरानी शुरू कर दी है. फिनलैंड के राष्ट्रपति अलेक्जेंडर स्टब ने भी एकजुटता का समर्थन करते हुए कहा कि इस क्षेत्र के फैसले का अधिकार सिर्फ डेनमार्क और ग्रीनलैंड के पास है. आइसलैंड के क्रिस्ट्रुन फ्रॉस्टडॉटिर ने भी एकजुटता का समर्थन किया है.
सिद्धार्थ भदौरिया