डॉ. पायल तड़वी केसः बॉम्बे हाईकोर्ट का फरमान, सुनवाई की होगी वीडियो रिकॉर्डिंग

डॉ पायल तड़वी का सुसाइड नोट बरामद होने के बाद पुलिस ने 29 मई 2019 को तीनों आरोपी महिला डाक्टरों को गिरफ्तार कर लिया था. कोर्ट ने उन्हें जेल भेज दिया है.

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इस मामले में तीनों आरोपी डॉक्टरों को जेल भेजा गया है (फाइल फोटो) इस मामले में तीनों आरोपी डॉक्टरों को जेल भेजा गया है (फाइल फोटो)

परवेज़ सागर

  • मुंबई,
  • 26 जुलाई 2019,
  • अपडेटेड 2:53 PM IST

मुंबई के नायर अस्पताल की डॉक्टर पायल तड़वी की मौत के मामले में बॉम्बे हाईकोर्ट ने सुनवाई की वीडियो रिकार्डिंग कराने का फरमान जारी किया है. इससे पहले मामले की जांच में जुटी पुलिस ने 1200 पन्नों की चार्जशीट कोर्ट में दाखिल की है.

मामला 22 मई 2019 का है. जब डॉक्टर तड़वी ने नायर अस्पताल के हॉस्टल में ही आत्महत्या कर ली थी. इस मामले में तीन डॉक्टरों पर डॉ. पायल को प्रताड़ित करने का इल्जाम है. जिसके चलते ही पायल ने ये खौफनाक कदम उठाया था. डॉ तडवी का सुसाइड नोट बरामद होने के बाद पुलिस ने 29 मई 2019 को तीनों आरोपी महिला डाक्टरों को गिरफ्तार कर लिया था.

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आरोपी महिला डॉक्टरों पर डॉ. पायल पर जातिगत टिप्पणी करने और उसे आत्महत्या के लिए उकसाने का इल्जाम है. कोर्ट के आदेश पर तीनों आरोपी डॉक्टरों को आर्थर रोड जेल में बंद किया गया है. पायल के सुसाइड नोट में उसके उत्पीड़न की पूरी दास्तान लिखी है.

सुसाइड नोट के मुताबिक कई माह तक तीनों आरोपी डॉक्टर उसका शोषण करती रहीं. बात बात पर उसकी बेइज्जती की. सुसाइड नोट में डॉ. पायल ने माता-पिता को लिखा कि उसने अपने उत्पीड़न की शिकायत की थी. लेकिन उसकी कोई मदद नहीं की गई. उसने सुसाइड में लिखा कि उसे इतनी यातनाएं दी गईं, जिसे वह सहन नहीं कर सकती थी.

पायल ने अपने आखरी खत में लिखा कि उसने आरोपियों के खिलाफ लिखित शिकायत भी की, लेकिन उसे कोई जवाब नहीं मिला. इस दौरान उसने अपनी लाइफ में सबकुछ खो दिया. उसकी पढ़ाई में अड़चन पैदा की गई. उसकी ड्यूटी कहीं और लगा दी गई. उसे लेबर रूम में नहीं जाने दिया गया. मरीजों की जांच नहीं करने दी. पुलिस ने सुसाइड नोट के कई हिस्सों को इस मामले की चार्जशीट में शामिल किया है.

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