दोषियों को उम्रकैद, VIP का एंगल और ऑडियो-वीडियो विवाद... CBI जांच तक कैसे पहुंचा अंकिता भंडारी मर्डर केस, पढ़ें पूरी कहानी

अंकिता भंडारी हत्याकांड में आखिरकार जनता का गुस्सा काम कर गया. और अब राज्य सरकार ने इस मामले में सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है. ऐसे में इस हत्याकांड से जुड़े कई सवाल हैं, जिनके जवाब सीबीआई को तलाश करने हैं. पढ़ें अंकिता भंडारी हत्याकांड की पूरी कहानी.

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इस केस की CBI जांच को लेकर उत्तराखंड में बवाल हो रहा था (फोटो-ITG) इस केस की CBI जांच को लेकर उत्तराखंड में बवाल हो रहा था (फोटो-ITG)

aajtak.in

  • देहरादून,
  • 10 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 8:51 AM IST

CBI Prob in Ankita Bhandari Murder Case: चर्चित अंकिता भंडारी हत्याकांड को लेकर उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने बड़ा ऐलान कर दिया है. उन्होंने इस मर्डर केस में सीबीआई जांच की सिफारिश कर दी है. यानी अब इस मामले की जांच सीबीआई करेगी. अंकिता का परिवार, विपक्षी दल और प्रदर्शनकारी इसी मांग को लेकर लगातार आवाज़ उठा रहे थे और अंकिता के हत्यारों को सजा दिए जाने की मांग को लेकर 11 जनवरी को उत्तराखंड बंद का आह्वान भी किया गया था. जो अब टल गया है.

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राज्यभर में बढ़ते विरोध प्रदर्शन और मुखर विपक्ष के तेवर को भांपते हुए मुख्यमंत्री धामी ने अंकिता के माता-पिता से भी मुलाकात की थी और उन्हें कहा था कि वो जो भी कहेंगे, सरकार उसका अध्ययन कर आगे की कार्रवाई करेगी. इसके अगले दिन ही अंकिता भंडारी के माता-पिता की सीबीआई जांच की मांग को राज्य सरकार ने मान लिया. 

हालांकि इस फैसले के बाद भी विपक्ष शांत नहीं हुआ है. उत्तराखंड कांग्रेस की प्रवक्ता गरिमा दसौनी ने कहा कि सिर्फ सीबीआई जांच की घोषणा काफी नहीं है. उन्होंने सवाल उठाया कि आखिर वह वीआईपी कौन था, जिसकी चर्चा इस मामले में बार-बार सामने आई? साथ ही यह भी पूछा कि घटना वाली रात रिजॉर्ट पर बुल्डोजर किसके आदेश पर चलाया गया. कांग्रेस का कहना है कि जब तक इन सवालों के जवाब नहीं मिलते, तब तक इंसाफ अधूरा है.

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कब क्या हुआ?
- 18 सितंबर 2022 को अंकिता भंडारी का मर्डर किया गया.
- 24 सितंबर 2022 को उसकी लाश मिली. 
- मई 2025 में यानी तीन साल चार महीने बाद कोर्ट ने बीजेपी नेता के पुत्र पुलकित आर्य, उसके सहयोगी अंकित गुप्ता और सौरभ भास्कर को उम्रकैद की सजा सुनाई. 

लेकिन सवाल यह है कि अगर इस मामले में इंसाफ मिल चुका था, तो...

- उम्रकैद के 8 महीने बाद जनता उत्तराखंड की सड़कों पर फिर क्यों उतर आई? 
- क्यों लोग एक बार फिर अंकिता के नाम पर आंदोलन कर रहे हैं? 
- क्या इस मामले में मिला इंसाफ अधूरा था? 
- अगर अंकिता को इंसाफ मिल चुका था तो फिर ये भीड़ अंकिता को और कौन सा इंसाफ दिलाने की मांग कर रही है?
- क्या अदालत का फैसला गलत है? 
- क्या अंकिता भंडारी का असली कातिल कोई और है? 
- क्या ताकतवर लोगों ने एक ताकतवर वीआईपी को बचाने के लिए कानून और इंसाफ का ये सारा ड्रामा रचा था? 
- आखिर तीन साल और चार महीने बाद अंकिता भंडारी का केस एक बार फिर क्यों इतनी सुर्खियों में आया? 
- उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने प्रेस कांफ्रेस बुलाकर इस मामले में सफाई क्यों दी?

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ऐसे फिर सुर्खियों में आया ये पूरा मामला
29 दिसंबर 2025 का दिन था. उसी दिन उर्मिला सनावर नाम की एक महिला सोशल मीडिया पर एक वीडियो डालती है. इस वीडियो के जरिए वो ये दावा करती है कि अंकिता का कत्ल इसलिए हुआ क्योंकि अंकिता ने एक वीवीआईपी को उस रिजॉर्ट में एक्स्ट्रा सर्विस देने से इनकार कर दिया था. जिस रिजॉर्ट में वो सिर्फ 20 दिन पहले बतौर रिसेप्सनिस्ट काम करने आई थी. इस वीडियो के बाद उसी उर्मिला सनावर ने एक ऑडियो भी जारी किया. जिसमे दावा किया गया कि वो वीवीआईपी नेता ही अंकिता के कत्ल के लिए जिम्मेदार है. इस ऑडियो और वीडियो में उस वीवीआईपी नेता का नाम भी लिया गया. 

हम इस स्टोरी में उस वीवीआईपी नेता का नाम इसलिए नहीं ले सकते क्योंकि दिल्ली हाईकोर्ट ने ऐसा करने पर 7 जनवरी को रोक लगा दी है. दरअसल, इस वीडियो ऑडियो के सामने आने के बाद वो वीवीआईपी नेता सीधे दिल्ली हाईकोर्ट पहुंच गया था. उसी की अर्जी पर दिल्ली हाईकोर्ट ने अंकिता भंडारी केस को लेकर इस वीवीआईपी नेता का नाम लेने पर रोक लगा दी है.

लेकिन उर्मिला सनावर के वीडियो ने हंगामा बरपा दिया और उत्तराखंड में लोग उस वीवीआईपी नेता के खिलाफ कार्रवाई की मांग को लेकर जगह-जगह धरना प्रदर्शन करने लगे. दरअसल, उर्मिला सनावर नाम की जिस महिला ने ऑडियो वीडियो के जरिए ये दावा किया कि वो एक एक्ट्रेस होने के साथ साथ खुद को हरिद्वार से बीजेपी के एक पूर्व विधायक सुरेश राठौर की दूसरी पत्नी हैं. उर्मिला ने अंकिता भंडारी के कत्ल से जुड़ा जो ऑडियो जारी किया है, उसमें उसकी अपनी आवाज के अलावा जो दूसरी आवाज है वो सुरेश राठौर की ही है. 

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उसी ऑडियो में सुरेश राठौर उर्मिला को ये बता रहा है कि अंकिता का कत्ल क्यों और कैसे हुआ और बीजेपी का वो वीवीआईपी नेता कौन है. उसी ऑडियो और वीडियो के सामने आते ही अचानक उत्तराखंड में लोग सड़कों पर उतर आए. इस मांग के साथ कि उस वीवीआईपी नेता को गिरफ्तार किया जाए और मामले की जांच सीबीआई को सौंपी जाए. यहां तक की खुद बीजेपी के अंदर ही बहुत सारे नेताओं ने मुख्यमंत्री धामी से अंकिता भंडारी केस की फिर से जांच कराने की मांग रखी है. 

खुद अंकिता भंडारी के पिता ने भी मुख्यमंत्री से ये मांग की है कि जो नए सबूत सामने आए हैं, उसके मद्देनजर अंकिता भंडारी केस की जांच दोबारा होनी चाहिए और ये जांच सीबीआई को सौंपी जानी चाहिए. इसी मांग को लेकर मुख्यमंत्री धामी के दफ्तर के बाहर भी धरना दिया गया.

अंकिता भंडारी मर्डर केस से जुड़ा ऑडियो वीडियो के सामने आने और लोगों के विरोध प्रदर्शन को देखते हुए उत्तराखंड सरकार को मजबूरन एक बार फिर से अंकिता मर्डर केस में एसआईटी का गठन करना पड़ा. एसआईटी ने पिछले हफ्ते उर्मिला सनावर से उनके ऑडियो वीडियो और दावों के बारे में लंबी पूछताछ की. 

इससे पहले उत्तराखंड सरकार और उत्तराखंड पुलिस ने ये कहा था कि ऑ़डियो वीडियो जारी करने के बाद उर्मिला कहीं गायब हो गईं हैं, लेकिन बुधवार को उर्मिला खुद ही एसआईटी के सामने पहुंची थी. एसआईटी उर्मिला से ऑडियो वीडियो की विश्वसनियता के साथ साथ ये भी जानना चाहती है कि उन्होंने इस बात का खुलासा इतने साल बाद क्यों किया?

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हालांकि 5 जनवरी 2026 को ही उर्मिला ने सोशल मीडिया पर फिर एक पोस्ट डाला और इसका जवाब भी दिया. उर्मिला का कहना था कि अंकिता भंडारी मर्डर केस में जो नया खुलासा हुआ वो एक नवंबर 2025 को हुआ था. उसी दिन उसने ये ऑडियो रिकॉर्ड किया था. इस पोस्ट में उर्मिला ये शक भी जता रहीं हैं कि शायद उनका ये मोबाइल अब गायब ना कर दिया जाए.

इस बीच मुख्यमंत्री पुष्कर धामी ने बुधवार को इस मुद्दे पर ये भी सफाई दी कि जिस वीवीआईपी नेता का नाम सामने आ रहा है, वो 10 सितंबर से 20 सितंबर के दरम्यान उत्तराखंड में थे ही नहीं. मुख्यमंत्री ने प्रेस कांफ्रेस में उस वीवीआईपी नेता को बार बार प्रभारी कह कर मुखातिब किया. वीवीआईपी नेता या प्रभारी की गिरफ्तारी और सीबीआई जांच की मांग को लेकर जिस तरह से उत्तराखंड में आंदोलन तेज होता जा रहा था, उसी के मद्देनजर मुख्यमंत्री के अलावा उत्तराखंड पुलिस ने भी मीडिया के सामने आकर सफाई दी थी. 

माना जा रहा है कि अब इस मामले की सीबीआई जांच का ऐलान हो जाने के बाद लोगों का गुस्सा शांत हो जाएगा. अब लोगों की निगाहें सीबीआई की जांच पर आकर टिक गई हैं.

(पौड़ी से सिद्धांत उनियाल, चमोली से कमलनयन सिलोरी, कोटद्वार से विकास वर्मा के साथ देहरादून से अंकित शर्मा का इनपुट)

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