असम में रविवार को एक बड़ा हादसा होते-होते टल गया, जब माजुली द्वीप को लखीमपुर जिले से जोड़ने वाले चेलेक धुनागुरी फेरी घाट पर एक कार फिसलकर सीधे सुबनसिरी नदी में जा गिरी. यह घटना उस वक्त हुई जब वाहन फेरी रैंप पर चढ़ाया जा रहा था. अचानक संतुलन बिगड़ने से कार नदी में गिर गई, जिससे घाट पर अफरा-तफरी मच गई. कुछ देर के लिए मौके पर मौजूद लोग सन्न रह गए. इस घटना ने फेरी सेवाओं की सुरक्षा पर एक बार फिर सवाल खड़े कर दिए.
ड्राइवर ने सूझबूझ से बचाई जान
कार के नदी में गिरते ही ड्राइवर ने समय रहते गाड़ी से बाहर निकलने का फैसला किया. पानी में पूरी तरह डूबने से ठीक पहले वह कार से बाहर कूद गया. स्थानीय लोगों और फेरी कर्मियों की मदद से उसे सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया. राहत की बात यह रही कि इस हादसे में कोई अन्य यात्री या फेरी कर्मचारी घायल नहीं हुआ. ड्राइवर को प्राथमिक जांच के बाद सुरक्षित बताया गया है.
बाधित रही फेरी सेवा
इस घटना के बाद चेलेक धुनागुरी घाट पर फेरी सेवाएं कुछ समय के लिए रोक दी गईं. नदी में गिरी कार को निकालने और हालात को सामान्य करने में वक्त लगा. यात्रियों को असुविधा का सामना करना पड़ा और घाट पर लंबी कतारें लग गईं. प्रशासन और फेरी प्रबंधन ने हालात संभालते हुए धीरे-धीरे सेवा को फिर से शुरू किया. हालांकि, इस दौरान लोगों में डर और नाराज़गी दोनों देखी गई.
फेरी घाटों की सुरक्षा पर सवाल
घटना के बाद असम के नदीय फेरी घाटों पर वाहनों की लोडिंग के दौरान सुरक्षा इंतजामों को लेकर गंभीर सवाल उठने लगे हैं. स्थानीय लोगों का कहना है कि रैंप पर पर्याप्त सुरक्षा बैरियर और गाइडेंस की कमी है. कई बार जल्दबाजी में वाहन चढ़ाने से ऐसे हादसे होते हैं. विशेषज्ञों का मानना है कि यदि समय रहते सुरक्षा प्रोटोकॉल सख्त न किए गए, तो भविष्य में बड़ा नुकसान हो सकता है.
प्रशासन से कड़े कदम उठाने की मांग
इस हादसे के बाद स्थानीय नागरिकों और यात्रियों ने प्रशासन से फेरी घाटों पर सुरक्षा मानकों को मजबूत करने की मांग की है. रैंप की मरम्मत, स्पष्ट संकेतक, प्रशिक्षित स्टाफ और वाहनों की नियंत्रित लोडिंग जैसे कदम जरूरी बताए जा रहे हैं. लोगों का कहना है कि माजुली जैसे संवेदनशील और नदी से घिरे इलाकों में फेरी सेवा जीवनरेखा है, इसलिए किसी भी तरह की लापरवाही जानलेवा साबित हो सकती है.
(लखीमपुर, असम से अश्मिता साहा का इनपुट)
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