उत्तर प्रदेश का बरेली जिला भले ही अपने झुमकों के लिए मशहूर हो, लेकिन इन दिनों बरेली में झुमका पहनने वाली महिलाएं और लड़कियां परेशान हैं. उनकी जान पर बन आई है. जिले के ढाई सौ गावों में एक अजीब सा ख़ौफ़ फैला है. वहां रहने वाले तमाम लोग खौफज़दा हैं. हालात ये हैं कि रात तो रात, लोग दिन में भी अपने घरों से बाहर निकलने में भी डरने लगे हैं.
6 महीने में 9 कत्ल
लोगों का ये डर यूं ही नहीं है. पिछले 6 महीने में बरेली के ग्रामीण इलाकों में एक-एक कर नौ महिलाओं की हत्याएं हो चुकी हैं. इनमें से तीन मामलों को तो पुलिस ने सुलझा लिया है, लेकिन बाकी के छह मामलों में पुलिस की जांच ठीक वहीं रुकी पड़ी है, जहां ये पहले दिन थी. यानी ये छह मामले पिछले छह महीने से जस के तस अनसुलझे पड़े हैं. और क़त्ल के इन्हीं अनसुलझे मामलों ने लोगों को गुमनाम सीरियल किलर के ख़ौफ़ से डराना शुरू कर दिया है. गांवों की महिलाएं अकेली घर से बाहर निकलने से डरने लगी हैं. वो या तो झुंड में निकलती हैं या फिर पुरुषों के साथ. लोग बच्चों को स्कूल भेजने से भी कतराने लगे हैं. खेतों में काम-काज का हर्जा होने लगा है.
9 में से 6 मामले अनसुलझे
लेकिन अब आप पूछेंगे कि क्या इन छह के छह मामलों का अनसुलझा होना महज़ इत्तेफ़ाक नहीं हो सकता? क्या ऐसा नहीं हो सकता है कि क़त्ल के ये सभी मामले एक दूसरे से बिल्कुल अलग हों और पुलिस अलग-अलग वजहों से उनकी तह तक नहीं पहुंच पा रही हो? आख़िर लोग इन मामलों को सीरियल किलर से ही जोड़ कर क्यों देख रहे हैं? तो आपको इन सवालों के जवाब भी बताएंगे, जिसके बाद ये कहानी आपके सामने काफी हद तक साफ हो जाएगी. लेकिन इस पहेली के बाकी पहलुओं को जानने से पहले आइए जल्दी से एक नज़र क़त्ल के उन मामलों पर डाल लेते हैं, जिनके अनसुलझे होने की वजह से इस मामले को सीरियल किलिंग से जोड़ कर देखा जाने लगा है.
1 जुलाई 2023
बरेली जिले के शाही थाना इलाके में आने वाले आनंदपुर गांव में 55 साल की प्रेमवती की हत्या कर दी गई.
21 जुलाई 2023
बरेली जिले के शाही थाना इलाके के गांव कुलचा में 50 साल की धनवती का मर्डर कर दिया गया.
1 नवंबर 2023
बरेली जिले के शीशगढ़ थाना इलाके के लखीमपुर गांव में 65 साल की महमूदन को मौत के घाट उतार दिया गया,
9 नवंबर 2023
बरेली जिले के फतेहगंज थाना इलाके के खानपुर गांव में 65 साल की ओमवती की हत्या कर दी गई.
20 नवंबर 2023
बरेली के शाही थाना इलाके के खुरसैनी में 65 साल की दुलारो देवी को बेरहमी के साथ कत्ल कर दिया गया.
26 नवंबर 2023
बरेली जिले के शीशगढ़ थाना इलाके के जगदीशपुर गांव में 63 साल की उर्मिला देवी को भी मौत की नींद सुला दिया गया.
मारी गई महिलाओं की उम्र 50 से 65 साल
क्या आपने कुछ ग़ौर किया? अगर नहीं तो हम आपको बताते हैं. क़ातिल का शिकार बनने वाली सभी की सभी महिलाओं की उम्र 50 से 65 साल के बीच की है. यानी कातिल जो भी है वो चुन-चुन कर बुजुर्ग हो चली महिलाओं को ही अपना निशाना बना रहा है. उसने अब तक ना तो किसी पुरुष की जान ली है और ना ही कम उम्र की किसी लड़की या महिला की. लेकिन महिलाओं के कत्ल का यही एक पैटर्न नहीं है, जो इन मामलों को एक दूसरे से जोड़ता है, बल्कि महिलाओं के कत्ल के इस सिलसिले में और भी कई ऐसी बातें हैं, जो सीरियल किलिंग की तरफ ईशारा करती हैं.
सुनसान इलाकों में मिली लाशें
कातिल का शिकार बनी महिलाओं के घरवालों की मानें तो मारी गई सभी की सभी महिलाओं की लाश गांव के आस-पास सुनसान इलाकों में मिली और तकरीबन सभी महिलाओं की हत्या गला घोंट कर की गई थी. ये हत्याएं तभी की गई थीं, जब महिलाएं अकेली बाहर गई थीं. तकरीबन सभी मामलों में कातिल ने महिलाओं की जान लेने के लिए दुपट्टा या गमछे जैसी किसी चीज का इस्तेमाल किया. यानी ना सिर्फ मरनेवाली महिलाओं का एज ग्रुप एक जैसा है, बल्कि क़त्ल का तरीका और हथियार भी बिल्कुल एक हैं.
कातिल का मोटिव?
अब आइए उसकी बात करते हैं, जिसके बग़ैर क़त्ल का कोई भी मामला पूरा नहीं हो सकता. या फिर यूं कहें कि जिसके बगैर दुनिया में कोई कत्ल होता ही नहीं यानी मोटिव. क्योंकि कहते हैं कि क़त्ल कोई भी हो, उसके पीछे कोई ना कोई मक़सद ज़रूर होता है. लेकिन बरेली में जिस तरह से एक के बाद एक महिलाओं का क़त्ल हो रहा है, उसके पीछे पुलिस को कोई मोटिव भी ढूंढे नहीं मिल रहा.
ना रेप, ना लूट
शायद यही वजह है कि पुलिस इन मामलों को सुलझा नहीं पा रही है. असल में कातिल का शिकार बनी किसी भी महिला के साथ सेक्सुअल अटैक यानी रेप या छेड़छाड़ जैसी किसी वारदात के सबूत नहीं मिले हैं. ऊपर से उनके पास मौजूद रुपये-पैसे या गहने भी जस के तस मिले हैं. यानी इन कत्ल के पीछे ना तो रेप की वजह है और ना लूटपाट की. ऐसे में सवाल ये है कि आखिर क़ातिल महिलाओं की जान क्यों ले रहा है?
क्या ये सीरियल किलिंग है?
वैसे महिलाओं के कत्ल की वजह सिर्फ रेप या लूटपाट ही नहीं होती. क़त्ल की वजह किसी से दुश्मनी भी हो सकती है. लेकिन पिछले छह महीने में मारी गई इन छह महिलाओं के घरवाले उनकी किसी से दुश्मनी की बात से भी इनकार कर रहे हैं. और यही वजह है कि पुलिस को इन मामलों को सुलझाने में बड़ी दिक्कत हो रही है. और शायद यही वजह है कि मामलों को सीरियल किलिंग से जोड़ कर देखा जाने लगा है. क्योंकि ऐसा पहले कई बार देखा गया है, जब दिमागी तौर पर अस्थिर लोग या फिर कोई साइको किलर चुन-चुन कर किसी खास वर्ग के लोगों को अपना निशाना बनाने लगता है, फिर चाहे उसकी उनसे कोई दुश्मनी हो या ना हो.
पहले हल्के में ले रही थी पुलिस
शुरू में तो बरेली पुलिस ने भी इस मामलों को हल्के में ही लिया था. वो इन सभी मामलों को एक-दूसरे से अलग कर देख रही थी. लेकिन नौ में से छह मामलों के अनसुलझे रह जाने के बाद अब पुलिस को भी लगने लगा है कि दाल में कुछ काला जरूर है.
ड्रोन से मिलेगा सीरियल किलर?
यही वजह है कि अब जिला पुलिस के साथ-साथ आईजी जोन और एडीजी जैसे बड़े अफ़सरों ने भी सीरियल किलर की इस पहेली को सुलझाने की कोशिश शुरू कर दी है. गांव-गांव में पुलिस की अलग-अलग 8 टीमें अपने मुखबिरों की मदद से उस गुमनाम सीरियल किलर के बारे में जानकारी जुटाने की कोशिश कर रही हैं. ड्रोन और सर्विलांस कैमरों से ढाई सौ से ज्यादा गांवों में बारी-बारी से तलाशी ली जा रही है. सीरियल किलिंग की वारदात से सबसे ज्यादा प्रभावित थाना इलाकों में चौकसी दुगनी कर दी गई है. और इलाके में आने जाने वाले हर शख्स की तलाशी ली जा रही है. लेकिन सच्चाई यही है कि इतनी कोशिश के बावजूद पुलिस के हाथ अब तक इस मामले में खाली हैं.
नहीं पता चली महिलाओं के कत्ल की वजह
हमने जिले में पसरे सीरियल किलर के इस खौफ को लेकर बरेली के एसपी ग्रामीण मुकेश चंद्र मिश्र से भी बात की. लेकिन उन्होंने अनसुलझे मामलों को लेकर कोई सटीक जवाब देने की जगह नया तर्क देना शुरू कर दिया. उन्होंने दुलारो और धनवती देवी के कत्ल के मामलों में मौत की वजह साफ नहीं होने की बात कहते हुए इन्हें कत्ल मानने से ही इनकार कर दिया. उन्होंने कहा कि चूंकि इन मामलों में पोस्टमार्टम से ये पता नहीं चल पाया है कि मौत कैसे हुई, पुलिस इन मामलों को फिलहाल क़त्ल का मामला मान कर ही नहीं चल रही.
इन हालात में जब तक पुलिस के हाथ एक-एक मारी गई महिलाओं के क़ातिल तक नहीं पहुंच जाते, तब तक इन मौतों को लेकर रहस्य बना रहेगा. यही नहीं, ऐसे में उस अनजान सीरियल किलर का ख़ौफ़ भी पसरा रहेगा, जिसकी तलाश पुलिस अब शिद्दत से कर रही है.
संतोष शर्मा