Murder in Jail: एक शख्स को जेल जाना था. जाहिर है जेल जाने के लिए उसे कोई जुर्म करना था. लिहाजा, उसने एक मोटरसाइकिल चोरी कर ली और इसके बाद वो पकड़ा गया. फिर उसे जेल भेज दिया गया. उसका आधा काम पूरा हो चुका था और आधा बाकी था. जिसे अब वो पूरा करना चाहता था. और वो काम था एक कैदी का कत्ल. वो कैदी भी कोई ऐसा-वैसा नहीं बल्कि एक ऐसा गैंगस्टर, जिसके खिलाफ 40 से ज्यादा मुकदमें दर्ज थे. फिर एक रोज मौका मिलते ही उस शख्स ने उस गैंगस्टर पर अंधाधुंध फायरिंग कर दी. इससे पहले और बाद की कहानी में कई मोड़ हैं. आइए, जानते हैं कोयला नगरी में हुए इस कत्ल की पूरी दास्तान.
रविवार, 3 दिसंबर 2023, दोपहर 3 बजे
झारखंड का धनबाद कोयला नगरी के नाम से पूरे भारत में मशहूर है. धनबाद के मंडल कारा में दोपहर तीन बजते-बजते अचानक एक ऐसी वारदात हुई कि जेल तो क्या, पूरा का पूरा धनबाद शहर ही थर्रा उठा. दरअसल, जेल में बंद कुख्यात शूटर, कोयले के नाजायज कारोबारी और धनबाद शहर के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह के क़त्ल के आरोपी अमन सिंह को किसी ने जेल के अंदर ही गोलियों से छलनी कर दिया. अमन सिंह पिछले कुछ दिनों से जेल के अस्पताल में ही भर्ती था. उसे दिमाग़ी परेशानी की शिकायत थी और एक रोज़ बाद यानी सोमवार को ही उसे जेल के अस्पताल से बाहर धनबाद के एसएनएमएमसीएच (SNMMCH) में सीटी स्कैन के लिए ले जाने की तैयारी थी. लेकिन इससे पहले कि उसे बेहतर इलाज के लिए बाहर ले जाया जाता, जेल के अस्पताल में धावा बोल कर एक अकेले क़ैदी ने उसे इतनी गोलियां मारी कि अमन सिंह की अस्पताल के बिस्तर पर ही मौत हो गई.
देसी पिस्टल से गैंगस्टर का मर्डर
अमन सिंह पर हमलावर ने एक देसी पिस्टल से एक के बाद एक कुल 7 गोलियां चलाईं, जिनमें से 6 गोलियां बिल्कुल करीब से अमन सिंह को लगी. इन छह गोलियों में से चार पेट में, जबकि 2 गोलियां सिर में लगी. जेल में हुई इस ताबड़तोड़ फायरिंग में धनबाद के एक बदनाम गैंगस्टर के क़त्ल की इस वारदात ने सिर्फ जेल बल्कि जिला प्रशासन के भी हाथ-पांव फूला दिए. आनन-फानन में लोकल थाने की पुलिस के साथ-साथ जिले के तमाम आला अधिकारी मौका-ए-वारदात पर पहुंचे और मामले की जांच शुरू कर दी गई.
अमन सिंह ने बताया था जान का खतरा
खास बात ये रही कि दिन दहाड़े जेल अस्पताल में एक कैदी ने दूसरे कैदी की हत्या कर दी और किसी ने उसे रोकने-टोकने की हिम्मत तक नहीं जुटाई. वो भी तब जब अमन सिंह पिछले कई महीनों से धनबाद के ही एक बेहद प्रभावशाली परिवार पर अपनी हत्या की साजिश रचने का इल्जाम लगा रहा था और अपनी जान का खतरा बता रहा था.
जेल में कैसे आया हथियार?
अब सवाल ये कि आखिर ऐसा कैसे हुआ? एक कैदी इतनी आसानी से अपने वार्ड से निकल कर जेल के अस्पताल में कैसे पहुंच गया? उसके पास हथियार और गोलियां कहां से आईं? क्या उसकी अमन सिंह से कोई निजी दुश्मनी थी? या फिर ये क़त्ल उसने किसी के इशारे पर किया? अमन सिंह जिनसे अपनी जान को खतरा बताता रहा था, वो कौन है? और उनसे अमन की क्या दुश्मनी थी? अमन सिंह की हत्या के बाद से ही ये सारे सवाल हर किसी की जुबान पर थे.
ऐसे पकड़ में आया कातिल
हद तो ये रही कि शुरू में हमलावर कैदी अमन सिंह की जान लेकर गुम हो चुका था. और उसकी पहचान करने और उसे पकड़ने में पुलिस और जेल प्रशासन को करीब डेढ़ घंटे से ज्यादा लग गए. दरअसल, अस्पताल के ही एक सफ़ाईकर्मी ने चश्मदीद के तौर पर संदिग्ध क़ातिलों में से एक सुंदर महतो की पहचान की और तब जाकर उसे गिरफ्तार किया गया.
सुंदर महतो वही है जिसे 25 नवंबर को धनबाद की ही मुनीडीह पुलिस ने बाइक चोरी के एक मामूली अपराध के सिलसिले में गिरफ्तार किया था. लेकिन हैरानी की बात ये रही कि 24 घंटे से ज्यादा का वक़्त गुज़र जाने के बावजूद पुलिस ना तो सुंदर महतो से कत्ल में इस्तेमाल किया गया हथियार बरामद कर पाई और ना ही इस साज़िश के राज़ ही उगलवा सकी.
आशीष सिंह का ऑडियो क्लिप वायरल
वारदात के चंद घंटे बाद ही यानी रविवार की रात होते-होते एक ऑडियो क्लिप धनबाद में हर किसी के मोबाइल फोन पर वायरल होने लगा. और ये ऑडियो क्लिप था आशीष सिंह उर्फ़ छोटू का. वही छोटू जिसने कभी अमन के साथ मिलकर कोयले के काले कारोबार में अपने हाथ काले किए थे और जिस पर अमन के साथ मिलकर शहर के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह के क़त्ल का इल्ज़ाम भी है.
कोयले का काला कारोबार
वैसे गैंगस्टर अमन सिंह के क़त्ल को लेकर छोटू सिंह की ओर से ऑडियो क्लिप के ज़रिए किए जा रहे दावे में कितनी सच्चाई है, इसका पता तो जांच के बाद ही चलेगा. लेकिन यूपी के रहने वाले अमन सिंह की झारखंड के जुर्म की दुनिया में एंट्री, उसके हाथों नीरज सिंह के क़त्ल और अब जेल में अमन सिंह के क़त्ल की पूरी कहानी को समझने के लिए आपको सबसे पहले धनबाद में कोयले के काले कारोबार के इर्द-गिर्द पनपते जुर्म के काले-कारोबार को समझने की जरूरत है.
रघुकुल और सिंह मेंशन की दबंगई
तारीख गवाह है कि धनबाद में कोयले के काले कारोबार के इर्द-गिर्द छोटे बड़े कई माफिया सरगनाओं की दुनिया भी आबाद होती रही है. जो कोयले की खुदाई का ठेका लेने के साथ-साथ नजायज़ कोयले की खुदाई से भी करोड़ों कमाते रहे हैं. और इस करोड़ों की काली कमाई के चक्कर में एक दूसरे का खून बहाने और लाशें बिछाने से भी बाज़ नहीं आते हैं. और कोयले के ऐसे ही काले कारोबार से नाम जुड़ता है धनबाद के दो ऐसे परिवारों का, जिन्हें रघुकुल और सिंह मेंशन के नाम से जाना जाता है.
दबंग बच्चा सिंह की सल्तनत
रघुकुल यानी दबंग बच्चा सिंह की सल्तनत. जिनके भतीजे कभी नीरज सिंह, हर्ष सिंह और एकलव्य सिंह कोयले के काले कारोबार पर राज करते थे. लेकिन 2017 में नीरज सिंह की हत्या के बाद नीरज सिंह की पत्नी पूर्णिमा जहां कांग्रेस से विधायक बन गईं. वहीं कोयले का बाकी का कारोबार हर्ष सिंह और एकलव्य सिंह संभालते रहे.
सिंह मेंशन का दखल
दूसरी ओर सिंह मेंशन भी शुरू से ही कोयले के काले कारोबार में अपना दखल रखता रहा. इसकी शुरुआत सूर्यदेव सिंह ने की और उनके बाद उनकी आने वाली पीढ़ी के संजीव सिंह, रागिनी सिंह और सिद्धार्थ गौतम ने ये कारोबार संभाला. जबकि सूर्यदेव सिंह के जाने के बाद उनकी पत्नी कुंती सिंह ने सियासत के साथ-साथ अपने बच्चों को इस कारोबार के गुर सिखाए.
सिंह मेंशन के इशारे पर नीरज सिंह की हत्या
वैसे तो रघुकुल और सिंह मेंशन भी कभी एक ही परिवार हुआ करता था, जिसके मुखिया सूर्यदेव सिंह थे. लेकिन सूर्यदेव सिंह के जाने के बाद परिवार टूट गया और फिर दोनों एक दूसरे के आमने-सामने आ गए. तब से लेकर अब तक यानी पिछले करीब डेढ़ दशकों में इन दोनों परिवारों की जंग में करीब 8 हत्याएं हो चुकी हैं और इनमें रघुकुल के बच्चा सिंह के अपने भतीजे नीरज सिंह का नाम भी शामिल है. इल़्जाम है कि नीरज सिंह की हत्या सिंह मेंशन के इशारे पर हुई, जिन्होंने इस काम के लिए अमन सिंह और छोटू सिंह सरीखे शूटरों को हायर किया था.
नीरज की मौत का बदला तो नहीं अमन सिंह का मर्डर
लेकिन वो कहते हैं न कि जब घात होता है, तो अक्सर प्रतिघात भी होता ही है. यही वजह है कि नीरज सिंह की जान लेने के आरोपी अमन सिंह पर भी मौत का खतरा मंडरा रहा था और अमन सिंह ने खुद पर मंडराते इस खतरे के पीछे कभी खुलकर नीरज सिंह के भाई हर्ष सिंह और एकलव्य सिंह यानी रघुकुल का नाम लिया था. और अब उसी अमन सिंह की जेल में हत्या कर दी गई. जिसकी जिम्मेदारी किसी और ने नहीं, बल्कि कभी उसके साथ जुर्म की दुनिया में हमकदम रह चुके छोटू सिंह ने लेने की बात कही. और इस दावे के मुताबिक छोटू सिंह ने अमन सिंह पर उसे धोखा देने और उसकी जान लेने की साजिश रचने का इल्ज़ाम लगाया है. लेकिन क्या साजिश इतनी भर है या फिर इसके पीछे वाकई उन लोगों का हाथ है, जिनके नाम अमन सिंह अपने जीते जी ले चुका है, यही असली जानने वाली बात है.
अमन की हत्या से यूपी तक भूचाल
अब धनबाद जेल में हुई गैंगस्टर अमन सिंह की हत्या की वारदात ने धनबाद से लेकर यूपी तक में भूचाल ला दिया है. असल में जेल में बंद होने के बावजूद अमन सिंह की हत्या जिस शातिराना तरीके से की गई, उसे लेकर कई सवाल उठ रहे हैं. सबसे बड़ा सवाल तो यही है कि अमन सिंह की हत्या को लेकर जो दावा किया जा रहा है, क्या उसका सच उतना ही है या फिर कहानी कहीं उससे आगे भी है?
झारखंड के क्राइम वर्ल्ड में अमन सिंह की एंट्री
झारखंड के जुर्म की दुनिया में अमन सिंह की एंट्री साल 2017 में एक शूटर के तौर पर हुई, जब उसका नाम धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की क़त्ल के मामले में सामने आया. इस मामले में सिंह मेंशन के संजीव सिंह का नाम साज़िशकर्ता के तौर पर आया था, जबकि इस मामले में बाकी जिन पांच शूटरों को नामजद किया गया था, उनमें अमन सिंह और उसके कत्ल का दावा करने वाले छोटू सिंह का नाम भी शामिल है. लेकिन अब इस कत्ल के बाद जिस तरह से छोटू सिंह ने अपना ऑडियो क्लिप जारी कर अमन सिंह की हत्या करने का दावा किया है, उसने मामले को नया मोड़ दे दिया है.
अमन सिंह के मर्डर के लिए जेल भेजा गया था आरोपी?
सूत्रों की मानें तो कभी नीरज सिंह के कत़्ल के मामले में जेल जा चुका छोटू सिंह ज़मानत मिलने के बाद फरार हो गया. और उसने अमन के कत्ल की ये साजिश अपने कुछ साथियों के साथ मिलकर इलाहाबाद में रची. और इसी साजिश के तहत पहले जेल में ही बंद एक कैदी तक असलहा पहुंचाया गया और फिर उसी असलहे से कैदी ने अमन सिंह को गोली मार दी. लेकिन अब सवाल ये भी है कि क्या कैदी को सिर्फ इस कत्ल को अंजाम दिलाने के इरादे से नवंबर के महीने में जेल भिजवाया गया था? क्योंकि जिस तरह से 25 नवंबर को सुंदर महतो नाम के कैदी को बाइक चोरी के मामले में गिरफ्तार कर जेल भेजा गया और जिस तरह उसने जेल में अमन सिंह को निशाना बना डाला, उससे तो कुछ यही लगता है.
हाई कोर्ट ने झारखंड सरकार से मांगी रिपोर्ट
फिलहाल, इस मामले में रघुकुल या सिंह मेंशन की ओर से कोई बात नहीं कही गई है, लेकिन जिस तरह अमन सिंह अपनी कत्ल की साजिश के पीछे सिंह मेंशन का हाथ होने की बात कहता रहा है, उसे देखते हुए सिंह मेंशन का भी जांच के दायरे में आना तय है. और सबसे बड़ा सवाल यही है कि ये सिर्फ छोटू सिंह से अमन सिंह की दुश्मनी का रिजल्ट है या फिर इस कत्ल में सिंह मेंशन की भी भूमिका है, जैसा कि अमन सिंह अपने जीते जी कहता रहा है. वैसे फिलहाल झारखंड हाई कोर्ट ने जेल में हुए इस शूटआउट पर खुद से संज्ञान लेकर झारखंड सरकार से रिपोर्ट मांगी है. अदालत ने आईजी जेल को पेश होने कहा है और इस मामले में 5 दिसंबर को सुनवाई की बात कही है.
मुन्ना बजरंगी के कहने पर किया था डॉक्टर का कत्ल
वैसे अमन सिंह की बात करें तो वो मूल रूप से अंबेडकर नगर का रहने वाला था और अपने गांव की एक लड़ाई में पहली बार साल 2010 में जेल गया था. फैजाबाद जेल में रहने के दौरान ही उसकी मुलाकात यूपी के कुख्यात बदमाश मुन्ना बजरंगी से हुई थी. इसके बाद वो मुन्ना बजरंगी का शागिर्द बन गया. मुन्ना बजरंगी के कहने पर ही उसने साल 2015 में आजमगढ़ में डॉक्टर सरोज को गोली मार दी थी. डॉक्टर की हत्या के बाद वो चर्चा में आ गया और जब इस मर्डर केस में जेल से बाहर आया तो जुर्म की दुनिया में अपना नाम बना चुका था.
नीरज सिंह की हत्या से चर्चा में आया था नाम
इसके बाद उसने धनबाद के पूर्व डिप्टी मेयर नीरज सिंह की हत्या कर दी. जिसके बाद वो यूपी के बाद झारखंड में भी मोस्ट वांटेड की लिस्ट में आ गया. और फिर दर्जनों आपराधिक घटनाओं को अंजाम देता रहा. उसने झारखंड में रंगदारी मांगने से लेकर अवैध कोयले के कारोबार से करोड़ों की रकम जुटाई, लेकिन आखिर जेल में हुए शूटआउट में उसकी स्टोरी का दी-एंड हो गया.
सिथुन मोदक / सत्यजीत कुमार