आम बजट के बाद के कारोबारी हफ्ते में लगातार तेजी में चल रहा भारतीय शेयर बाजार शुक्रवार टूट गया. सुबह सेंसेक्स 88 अंक की तेजी के साथ 41,394 पर खुला, लेकिन थोड़ी ही देर में यह लाल निशान में पहुंच गया. कारोबार के अंत में सेंसेक्स 164.18 अंकों की गिरावट के साथ 41141.85 पर बंद हुआ.
इसी तरह सुबह नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) का निफ्टी 14 अंक की तेजी के साथ 12,151.15 पर खुला था, लेकिन थोड़ी देर में इसमें भी गिरावट आने लगी. सुबह 9.30 बजे तक 13.15 अंक टूटकर 12,124.80 पर पहुंच गया. कारोबार के अंत में निफ्टी 51 अंक टूटकर 12,086.40 पर बंद हुआ.
किन शेयरों में आई गिरावट
एनएसई के 1199 शेयरों में तेजी और 1265 में गिरावट देखी गई. गिरने वाले प्रमुख शेयरों में आयशर मोटर्स, टाटा मोटर्स, इंडसइंड बैंक, महिंद्रा ऐंड महिंद्रा, ग्रासिम इंडस्ट्रीज प्रमुख रहे, जबकि बढ़ने वाले प्रमुख शेयरों में जी एंटरटेनमेंट, एनटीपीसी, कोल इंडिया, ओएनजीसी और यूपीएल शामिल हैं. ऑटो, एनर्जी और इन्फ्रा सेक्टर में गिरावट देखी गई, जबकि फार्मा, आईटी, मेटल एवं एफएमसीजी सेक्टर में खरीदारी देखी गई. बीएसई मिडकैप और स्मॉलकैप में तेजी देखी गई.
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रुपये में आई गिरावट
शुक्रवार को रुपये में ट्रेडिंग नरमी के साथ शुरू हुई है. डॉलर के मुकाबले रुपया 7 पैसे टूटकर 71.26 पर खुला. गुरुवार को रुपया 71.19 पर बंद हुआ था.
सेंसेक्स के शेयरों की हालत
गुरुवार को आई थी तेजी
सप्ताह के चौथे कारोबारी दिन गुरुवार को सेंसेक्स 163 अंक की बढ़त के साथ 41,306.03 अंक पर बंद हुआ. बजट के अगले हफ्ते लगातार शेयर बाजार में लगातार चौथे दिन कारोबार में तेजी रही. कारोबार के दौरान यह ऊंचे में 41,405.43 अंक तक गया. इसी तरह, नेशनल स्टॉक एक्सचेंज का निफ्टी 48.80 अंक यानी 0.40 प्रतिशत बढ़कर 12,137.95 अंक पर बंद हुआ. दुनिया के अन्य बाजारों में चीन का शंघाई, हांगकांग, जापान का टोक्यो और दक्षिण कोरिया का सोल 2.88 प्रतिशत की तेजी के साथ बंद हुए.
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रिजर्व बैंक के फैसले का असर
विशेषज्ञों के अनुसार नीतिगत दर में बदलाव नहीं होने के बाद भी आरबीआई के नरम रुख से निवेशकों की धारणा मजबूत हुई. बता दें कि आरबीआई ने रेपो रेट में कटौती नहीं की है और यह 5.15 फीसदी पर स्थिर है. यह लगातार दूसरी मौद्रिक समीक्षा बैठक है जब आरबीआई ने रेपो रेट को स्थिर रखा है. इससे पहले, दिसंबर में भी केंद्रीय बैंक ने रेपो रेट में कोई बदलाव नहीं किया था. वहीं 2019 के शुरुआती पांच मौद्रिक समीक्षा बैठक में लगातार 5 बार रेपो रेट में कटौती की गई थी.
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