पूर्व वित्त मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी. चिदम्बरम ने भारतीय जीवन बीमा निगम (LIC) की हिस्सेदारी बेचने के औचित्य पर सवाल उठाए हैं. इंडिया टुडे के कंसल्टिंग एडिटर राजदीप सरदेसाई के साथ खास बातचीत में चिदम्बरम ने कहा कि सरकार को यह बताना पड़ेगा कि इसकी जरूरत क्यों पड़ी. उन्होंने बजट की कई खामियों पर भी चर्चा की.
BPCL का विनिवेश एक घोटाला
चिदम्बरम ने कहा, 'मैं एअर इंडिया के विनिवेश का सपोर्ट करता हूं, लेकिन BPCL का विनिवेश तो एक घोटाला है. इसी तरह उन्हें यह बताना पड़ेगा कि वे LIC का विनिवेश क्यों कर रहे हैं? वे यदि 25 फीसदी बेचते हैं तो उन्हें यह बताना पड़ेगा कि क्या एलआईसी और एअर इंडिया को एक ही तराजू पर रखा जा सकता है?
गौरतलब है कि पिछले हफ्ते वित्त मंत्री सीतारमण ने बजट पेश करने के दौरान ऐलान किया था कि सरकार LIC में अपनी कुछ हिस्सेदारी बेचेगी. इसके लिए सरकार आईपीओ लेकर आ रही है. भारतीय जीवन बीमा निगम देश की सबसे बड़ी बीमा कंपनी है.
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पी. चिदम्बरम ने बजट की खामियों पर चर्चा करते हुए कहा, 'राजकोषीय घाटे का विवरण क्या है सरकार इसे देने से इंकार कर रही है. बैंकों में संकट है. हर बजट का कुछ उद्देश्य होता है. थोक महंगाई ऊंचाई पर है, खुदरा महंगाई ऊंचाई पर है. हमें इन सबको देखना होगा, हमें असल आंकड़ों पर नजर रखनी होगी. मुझे तो आंकड़े प्रभावित करते हैं. '
टैक्स ढांचे को और जटिल बनाया गया
उन्होंने कहा, 'टैक्स स्लैब में हुए बदलाव को भी मैं पूरी तरह से खारिज करता हूं. इसमें किसी भी तरह से सरलीकरण नहीं है. यह ढांचे को और जटिल बनाने वाला है. मैं यह नहीं मानता कि राजस्व और खर्च के जो आंकड़े हैं उनसे मांग में तेजी आएगी. वित्त मंत्री एक छोटे से वर्ग को ज्यादा पैसा दे रही हैं, न कि बड़े वर्ग को. बड़े वर्ग के हाथ में पैसा जाएगा तो ही मांग में बढ़त होगी.
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एक साल बर्बाद हो गया
चिदम्बरम ने कहा कि मैं यह नहीं कहता कि 2020-21 में आर्थिक सुस्ती बनी रहेगी, लेकिन यह साल सपाट रहेगा. निवेशक बजट से निराश हैं. साल 2019-20 एक तरह से बर्बाद हो चुका है. मोदी सरकार नवंबर-दिसंबर तक जगी है. सरकार अब भी यह मानने को तैयार नहीं कि संकट है.
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