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विश्व बैंक ने भारत के इस काम को सराहा, कहा- दुनिया के लिए मिसाल

aajtak.in
  • 16 अक्टूबर 2019,
  • अपडेटेड 7:25 PM IST
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विश्व बैंक से भारत को लेकर एक अच्छी खबर आई है. गरीबी के मोर्चे पर भारत के प्रयास को सराहा गया है. विश्व बैंक का कहना है कि भारत में 1990 के बाद से गरीबी के मामले में स्थिति में काफी सुधार हुआ है और इस दौरान गरीबी दर आधी रह गई. भारत ने पिछले 15 साल में 7 फीसदी से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर हासिल की है.

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दरअसल अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष (IMF) के साथ सालाना बैठक से पहले विश्व बैंक ने कहा कि भारत ने गरीबी दूर करने और पर्यावरण को लेकर बेहतर काम किया है. भारत ने इस चुनौती का मुकाबला किया और जो दुनिया के लिए एक अच्छा संदेश है.

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विश्व बैंक ने कहा कि देश ने पिछले 15 साल में 7 फीसदी से अधिक की आर्थिक वृद्धि दर हासिल की है और 1990 के बाद गरीबी की दर को आधा कर लिया है. इसके साथ ही भारत ने अधिकांश मानव विकास सूचकांकों में भी प्रगति की है. विश्व बैंक ने कहा कि भारत की वृद्धि रफ्तार के जारी रहने और एक दशक में अति गरीबी को पूरी तरह समाप्त कर लेने का अनुमान है.

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इसके अलावा विश्व बैंक का कहना है कि भारत को जल प्रबंधन के क्षेत्र में काम करने की जरूरत है. इसके साथ ही 23 करोड़ लोग बिजली ग्रिडों से अच्छी तरह जुड़े नहीं हैं. वहीं देश को कम कार्बन उत्सर्जन वाला विद्युत उत्पादन भी बढ़ाना होगा.

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विश्व बैंक की मानें तो भारत की तेज आर्थिक वृद्धि को बुनियादी संरचना में 2030 तक अनुमानित तौर पर जीडीपी के 8.8 फीसदी के बराबर यानी 343 अरब डॉलर के निवेश की जरूरत होगी. इसके साथ ही टिकाऊ वृद्धि के लिए समावेश को बढ़ाना होगा, विशेषकर अधिक और बेहतर रोजगार सृजित करने होंगे.

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अनुमानित तौर पर प्रति वर्ष 1.30 करोड़ लोग रोजगार योग्य आयुवर्ग में प्रवेश कर रहे हैं, लेकिन सालाना स्तर पर रोजगार के तहज 30 लाख अवसर सृजित हो पा रहे हैं. इसके साथ ही भारत के सामने एक अन्य चुनौती महिला कामगारों की संख्या में आ रही कमी है. भारत में श्रमबल में महिलाओं की भागीदारी 27 प्रतिशत है, जो विश्व में सबसे कम में से एक है.

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