कब खत्‍म होंगे निवेशकों के बुरे दिन? पहले 9 महीने तक क्रैश... फिर ट्रंप टैरिफ, अब स्‍टॉक मार्केट पर ये संकट

कभी विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली करते हैं, तो अचानक ट्रंप टैरिफ (Trump Tariff) का ऐलान करते हैं. फिर जियो-पॉलिटिकल तनाव... इन सभी कारकों ने निवेशकों को परेशानी में डाला है. अब ईरान-इजरायल के बीच युद्ध (Iran-Israel War) शुरू होने से फिर निवेशक चिंता में है.

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पिछले साल से ही गिर रहा बाजार पिछले साल से ही गिर रहा बाजार

आजतक बिजनेस डेस्क

  • नई दिल्‍ली,
  • 18 जून 2025,
  • अपडेटेड 1:34 PM IST

शेयर बाजार (Stock Market) में पैसे कमाना आसान नहीं... ये बात हम अक्‍सर सुनते आ रहे हैं, लेकिन पिछले साल से ही यह हकीकत लोगों ने महसूस की है. रिटेल निवेशक से लेकर बड़े-बड़े निवेशक तक ने पैसे गवाएं हैं. पिछले साल से भारतीय शेयर बाजार कई कारणों की वजह से दबाव में कारोबार कर रहा है. 

कभी विदेशी निवेशक लगातार बिकवाली करते हैं, तो अचानक ट्रंप टैरिफ (Trump Tariff) का ऐलान करते हैं. फिर जियो-पॉलिटिकल तनाव... इन सभी कारकों ने निवेशकों को परेशानी में डाला है. अब ईरान-इजरायल के बीच युद्ध (Iran-Israel War) शुरू होने से फिर निवेशक चिंता में है कि क्‍या किया जाए, आखिर ये बुरे दिन कब खत्‍म होंगे? 

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दरअसल, इजरायल और ईरान में तनाव बढ़ता जा रहा है, जिसका असर कच्‍चे तेल से लेकर शेयर बाजार और दुनिया भर के देशों के शिपिंग कारोबार पर पड़ता हुआ दिख रहा है. Crude Oil के दाम में लगातार इजाफा हो रहा है और यह ब्रेंट क्रूड ऑयल 75.88 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच चुका है, क्‍योंकि ज्‍यादातर कच्‍चा तेल ईरान के होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से होकर गुजरता है. ऐसे में अगर भविष्‍य में युद्ध के कारण ये रास्‍ता ब्‍लॉक होता है तो कच्‍चे तेल को लेकर दुनिया में गंभीर संकट आ सकता है. जिससे कई देशों की इंडस्‍ट्री भी ठप पड़ सकती है. 

हालांकि कई एक्‍सपर्ट का कहना है कि ईरान इस रास्‍ते को ब्‍लॉक करने की गलती नहीं करेगा, क्‍योंकि कच्‍चे तेल पर ईरान की इकोनॉमी निर्भर है और अगर यह रास्‍त बंद होता है तो फिर ईरान में गंभीर स्थिति भी पैदा हो सकती है. लेकिन फिर भी युद्ध के हालात बनने की वजह से भारतीय निवेशक बुरी तरह फंसे हुए हैं. 

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कभी ऑल टाइम हाई पर था बाजार 
पिछले साल सितंबर में शेयर बाजार ऑल टाइम हाई पर चला गया था. Sensex 85000 पर और Nifty 26000 के ऊपर था, लेकिन फिर जैसे कंपनियों के रिजल्‍ट खराब हुए बाजार में गिरावट हावी हो गई और विदेशी निवेशकों ने भी धड़ाधड़ पैसे निकालना शुरू किया. यह सिलसिला मई तक रहा और सेंसेक्‍स 80 हजार के नीचे, जबकि निफ्टी 23000 के नीचे आ गया था. 

ट्रंप टैरिफ का भी असर
सितंबर से शुरू हुई गिरावट जब अप्रैल में स्थिर दिखने लगी और इकोनॉमी के नतीजे भी अच्‍छे आ रहे थे. इस बीच, अमेरिकी राष्‍ट्रपति डोनाल्‍ड ट्रंप ने टैरिफ (Trump Tariff) का ऐलान किया और दुनियाभर में खलबली मचा दी. भारत पर 26 फीसदी टैरिफ का ऐलान करते ही मार्केट फिर से तेजी से गिरा. एक्‍सपर्ट्स मंदी की आशंका जाहिर करने लगे. हालांकि अभी 90 दिनों के लिए टैरिफ रुका हुआ है, लेकिन अभी भी निवेशक इस गिरावट से उबर नहीं पाए हैं. 

जियो पॉलिटिकल टेंशन 
ट्रंप टैरिफ का असर कम होते ही पाकिस्‍तान की ओर से आए आतंकवादियों ने कश्‍मीर के पहलगाम में घिनौनी हरकत की और 26 मासूमों पर अंधाधुन गोलियां बरसाईं. जिसके बाद भारत ने इसका जवाब देते हुए ऑपरेशन सिंदूर चलाया और कई आतंकी ठिकानों को खत्‍म किया. जिसके बाद भारत-पाकिस्‍तान में तनाव बढ़ गया और शेयर बाजार फिर गिरा. हालांकि सीजफायर के बाद शेयर बाजार में तेजी आई, लेकिन अब ईरान-इजरायल तनाव ने निवेशकों को चिंता में डाल दिया है. 

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क्‍या करें निवेशक? 
एक्‍सपर्ट्स का मानना है दुनिया में टेंशन की वजह से तनाव बढ़ा हुआ है, लेकिन भारतीय अर्थव्‍यवस्‍था मजबूत है और भारतीय शेयर बाजार में लिक्विडिटी की कमी नहीं है. जब स्थिति साफ होगी तो बाजार में फिर तेजी आ सकती है. ऐसे में निवेशकों को अच्‍छे फंडामेंटल शेयरों में निवेश करके बने रहने की कोशिश करनी चाहिए और लॉन्‍ग टर्म नजरिया रखना चाहिए. 

(नोट- किसी भी शेयर में निवेश से हपले वित्तीय सलाहकार की मदद जरूर लें.) 

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