अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ (Reciprocal Tariff) लगाने के बाद से ही 'ट्रेड वॉर' का संकट बढ़ने लगा है. इस बीच, यूरोपीय यूनियन चाहता है कि भारत लंबे समय से लंबित ट्रेड डील के तहत कार आयात पर टैरिफ को समाप्त कर दे. सूत्रों के मुताबिक, मोदी सरकार अपने वार्ता को अंतिम रूप देने के लिए प्रस्ताव को और अधिक सरल बनाने के लिए तैयार है.
रॉयट्रर्स के रिपोर्ट के मुताबिक, एक सरकारी अधिकारी ने कहा कि भारत टैरिफ को 100 प्रतिशत से घटाकर 10 प्रतिशत करने के लिए तैयार है. ऐसा तब है जब इंडस्ट्रीज इस बात की पैरवी कर रहा है कि भारत कम से कम 30 प्रतिशत टैरिफ बनाए रखे. साथ ही घरेलू कारोबारियों की सुरक्षा के लिए अगले चार सालों तक इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात शुल्क में कोई बदलाव न करे.
यूरोपीय संघ की कार इम्पोर्ट पर टैरिफ समाप्त करने की मांग ऐसे समय में आई है जब कुछ सप्ताह पहले ही अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप (Donald Trump) के प्रशासन ने भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापार वार्ता के तहत इलेक्ट्रिक वाहनों समेत कारों पर आयात शुल्क (Cars Import Duty) समाप्त करने की मांग की थी, जिससे घरेलू कार निर्माताओं पर दबाव बढ़ गया था.
सस्ते हो सकते हैं ये कार
टैरिफ में कटौती वोक्सवैगन, मर्सिडीज-बेंज और BMW जैसी यूरोपीय कार निर्माताओं के लिए एक जीत होगी, जिससे भारत में उनकी पहुंच बढ़ेगी. यह एलन मस्क की टेस्ला के लिए भी एक जीत हो सकती है, जो इस साल भारत में आयातित EV की बिक्री शुरू करेगी. सरकार अगर टैरिफ में कटौती का फैसला लेती है तो भारत इन कारों के दाम में कमी देखने को मिल सकती है.
उद्योग से जुड़े एक सूत्र ने कहा, 'यूरोपीय संघ ने बेहतर सौदे की मांग की है और भारत भी बेहतर पेशकश करना चाहता है.' सूत्रों ने बताया कि भारत के वाणिज्य मंत्रालय ने पिछले सप्ताह एक बैठक में भारी उद्योग मंत्रालय के अधिकारियों और ऑटो उद्योग के प्रतिनिधियों को यूरोपीय संघ की मांगों और भारत के रुख से अवगत कराया.
4 मिलियन यूनिट वाला मार्केट है भारत
भारत का 4 मिलियन यूनिट प्रति वर्ष का कार बाजार दुनिया में सबसे बड़े बाजारों में से एक है और घरेलू कार निर्माताओं ने तर्क दिया है कि टैरिफ में तीव्र कटौती से आयात सस्ता हो जाने से स्थानीय विनिर्माण में निवेश खत्म हो जाएगा. टाटा मोटर्स, महिंद्रा एंड महिंद्रा जैसी कंपनियों ने खासतौर से इलेक्ट्रिक वाहनों पर आयात शुल्क कम करने के खिलाफ पैरवी की है, उनका कहना है कि इससे उस क्षेत्र को नुकसान होगा जिसमें उन्होंने भारी निवेश किया है और जिसमें वे और अधिक पैसा लगाने की योजना बना रहे हैं.
अमेरिका को दिए गए अपने प्रस्ताव के समान ही, भारत के ऑटो उद्योग ने सीमित संख्या में पेट्रोल कारों पर टैरिफ को 100 प्रतिशत से अधिक से तत्काल घटाकर 70 प्रतिशत करने और फिर चरणबद्ध तरीके से 30 प्रतिशत तक कटौती करने का प्रस्ताव दिया है. सूत्रों ने कहा कि ईवी के मामले में कार निर्माता 2029 तक टैरिफ में कोई कटौती नहीं चाहते हैं, इसके बाद सीमित आयात में चरणबद्ध तरीके से 30 प्रतिशत तक कमी की जाएगी.
हालांकि यह अभी स्पष्ट नहीं है कि भारत ने यूरोपीय संघ के समक्ष 10 प्रतिशत टैरिफ का प्रस्ताव रखा है या नहीं, लेकिन विश्लेषकों का मानना है कि वैश्विक व्यापार युद्ध के खतरे और ट्रंप की भारी टैरिफ वृद्धि के कारण मंदी के प्रभाव को देखते हुए दोनों पक्ष वार्ता में अधिक लचीले होंगे.
आजतक बिजनेस डेस्क