Union Budget 2023: वित्त मंत्री निर्मला सीतारामन ने बुधवार, एक फरवरी को वित्त वर्ष 2023-24 का बजट पेश किया जिसमें मध्यम वर्ग को बड़ी राहत दी गई. सरकार ने आयकर छूट को पांच लाख से बढ़ाकर सात लाख कर दिया है. नए टैक्स रिजीम में सरकार ने टैक्स स्लैब में बड़ा बदलाव किया है. वित्त मंत्री ने जिन पांच टैक्स राहत उपायों की घोषणा की है, उनमें से चार नए टैक्स रिजीम के लिए थे. सरकार इसके जरिए मध्यम वर्ग को राहत तो दे रही है लेकिन उसके पीछे सरकार की एक खास रणनीति भी है.
सरकार का उद्देश्य यह है कि ज्यादा से ज्यादा लोग पुराने टैक्स रिजीम को छोड़कर नए टैक्स रिजीम को अपनाएं. हालांकि, टैक्सपेयर्स के पास अभी भी पुराने टैक्स रिजीम को जारी रखने का विकल्प मौजूद है. पुराने टैक्स रिजीम में पीपीएफ, होम लोन, एनपीएस समेत कई डिडक्शन मिलते हैं जो नए टैक्स रिजीम में नहीं हैं.
वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने बजट के बाद प्रेस ब्रीफिंग में भी कहा कि सरकार नए टैक्स रिजीम को आकर्षक बनाना चाहती है और इसीलिए नया टैक्स स्लैब लाया गया है. उन्होंने कहा कि जो लोग पुरानी व्यवस्था को जारी रखना चाहते हैं, वे इसे जारी रख सकते हैं.
हालांकि, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इस बार बजट में जो भी टैक्स छूट दी गई हैं, वो नए टैक्स रिजीम में ही दी गई हैं. इसे इसी रूप में देखा जाना चाहिए कि सरकार धीरे-धीरे पुराने टैक्स रिजीम को हटा रही है. साल 2020 में नया टैक्स रिजीम आने के बावजूद भी बहुत कम लोग ही इसे चुन रहे थे. क्योंकि इसमें कोई भी डिडक्शन नहीं मिलता था.
हालांकि, अब नए टैक्स रिजीम के तहत 7 लाख रुपये तक की आय वाले किसी व्यक्ति को कोई कर नहीं देना होगा.
अपने बजट भाषण में निर्मला सीतारामन ने कहा, 'वर्तमान में, 5 लाख रुपये तक की आय वाले लोग पुराने और नए टैक्स रिजीम दोनों में से किसी के तहत कोई आयकर नहीं देते हैं. मैं नए टैक्स रिजीम में टैक्स छूट की सीमा बढ़ाकर 7 लाख रुपये करने का प्रस्ताव करती हूं. इस प्रकार, नए टैक्स रिजीम में 7 लाख रुपये तक की आय वाले व्यक्तियों को कोई कर नहीं देना होगा.'
बजट 2023-24 का नया टैक्स स्लैब-
0 से तीन लाख पर 0 फीसदी
3 से 6 लाख पर 5 फीसदी
6 से 9 लाख पर 10 फीसदी
9 से 12 लाख पर 15 फीसदी
12 से 15 लाख पर 20 फीसदी
15 से ज्यादा लाख पर 30 फीसदी
नए टैक्स रिजीम के लिए दूसरा प्रमुख प्रोत्साहन टैक्स स्लैब की संख्या को छह से घटाकर पांच करते हुए छूट की सीमा को बढ़ाकर 3 लाख रुपये करना है. लेकिन ऐसा नहीं लगता कि यह छूट सीमा पुराने टैक्स रिजीम के लिए भी लागू होगी.
तीसरा और सबसे महत्वपूर्ण कर राहत उपाय नए टैक्स रिजीम को लोगों के बीच लोकप्रिय बनाने के लिए किया गया है. न्यू टैक्स रिजीम में 15.5 लाख और उससे ज्यादा की इनकम पर 52500 स्टैंडर्ड डिडक्शन दिया जाएगा. पहले स्टैंडर्ड डिडक्शन केवल पुराने टैक्स रिजीम में ही मिलता था.
बजट में अधितकम टैक्स रेट को भी घटाकर कम कर दिया गया है. भारत में अधिकतम टैक्स रेट अभी तक 42.74 प्रतिशत था जो कि विश्व में सबसे अधिक है. न्यू टैक्स रिजीम में इसे घटाकर अब 39 प्रतिशत कर दिया गया है.
नए टैक्स रिजीम को प्रोत्साहन, पुराने टैक्स पद्धति को खत्म करने की कोशिश?
निर्मला सीतारमन ने अपने बजट भाषण में नए टैक्स रिजीम को प्रोत्साहन देने के लिए कई कर राहत उपाय बताए लेकिन पुरानी टैक्स व्यवस्था में किसी तरह का कोई बदलाव नहीं किया गया.
पुरानी टैक्स व्यवस्था का इस्तेमाल करने वाले लोगों को उम्मीद थी कि सरकार आयकर अधिनियम, 1961 की धारा 80सी के तहत आयकर कटौती की सीमा में बढ़ोतरी करेगी लेकिन उनकी सभी उम्मीदें धराशायी हो गई हैं.
कटौती की यह सीमा लगभग एक दशक से समान बनी हुई है. 2014 में तत्कालीन केंद्रीय वित्त मंत्री अरुण जेटली ने इस सीमा को 1 लाख रुपये से बढ़ाकर 1.5 लाख रुपये कर दिया था. 1961 की धारा 80सी के तहत टैक्स में छूट टैक्स कटौती के रूप में मिलती है. इसमें लोग अपने आय का डेढ़ लाख रुपया अलग कर लेते हैं जिस पर कोई टैक्स नहीं देना पड़ता.
धारा 80डी के तहत स्वास्थ्य बीमा या होम लोन के ब्याज भुगतान पर भी सरकार ने किसी तरह का राहत नहीं दी जिससे यह लग रहा है कि सरकार पुराने टैक्स रिजीम को धीरे-धीरे खत्म करना चाहती है.
इंडिया टुडे ग्रुप के एडिटोरियल एडवाइजर रोहित सरन कहते हैं कि सरकार नए टैक्स रिजीम में कई तरह की छूट देकर पुरानी टैक्स प्रणाली को समाप्त करना चाहती है.
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