जैसे-जैसे केंद्रीय बजट 2026 नजदीक आ रहा है, भारत की पुरानी और नई आयकर व्यवस्थाओं (Old and New Tax Regime) पर बहस फिर तेज हो गई है. सैलरीड और मिडिल क्लास के टैक्सपेयर्स ज्यादा छूट और सरल टैक्स सिस्टम के बीच संतुलन बनाने की कोशिश कर रहे हैं. साथ ही ऐसे बदलावों की मांग कर रहे हैं, जिससे सभी आय वर्गों के लिए टैक्स को ज्यादा न्यायसंगत और व्यावहारिक बना सकें.
पुरानी टैक्स व्यवस्था के तहत कटौती
पुराने टैक्स सिस्टम उन व्यक्तियों को आकर्षित करती है, जिनके पास होम लोन, बीमा पॉलिसी और लॉन्ग टर्म निवेश है. यह टैक्स योग्य आय को कम करने में सहायक कई कटौतियां पेश करती है. इनकम टैक्स की धारा 80C के तहत भविष्य निधि योगदान, सार्वजनिक भविष्य निधि (PPF), इक्विटी-लिंक्ड बचत योजनाओं (ELSS) और जीवन बीमा प्रीमियम जैसे निवेशों पर ₹1.5 लाख तक की कटौती की अनुमति है.
स्वास्थ्य बीमा के लिए धारा 80D, धारा 24(b) के तहत होम लोन ब्याज पर कटौती, मकान किराया भत्ता (HRA) और अवकाश यात्रा भत्ता (LTA) पर छूट के माध्यम से अतिरिक्त राहत उपलब्ध है. वेतनभोगी टैक्सपेयर्स को लगभग ₹50,000 की मानक कटौती का भी लाभ मिलता है.
नई टैक्स व्यवस्था में ज्यादातर छूट समाप्त
एनपीवी एंड एसोसिएट्स एलएलपी के डायरेक्ट टैक्स जानकार अक्षय जैन का कहना है कि आयकर अधिनियम 1961 के तहत पुरानी टैकस व्यवस्था संरचित निवेश, आवास लोन और पात्र कटौतियों वाल टैक्सपेयर्स के लिए लाभकारी बनी हुई है. नई व्यवस्था में भले ही टैक्स स्लैब कम हैं, लेकिन इसमें ज्यादातर छूट और कटौतियां खत्म कर दी गई हैं.
पुरानी व्यवस्था को क्यों पसंद करते हैं टैक्सपेयर्स?
जैन ने कहा कि पुरानी कर व्यवस्था चुनने वाले करदाता धारा 80C के तहत 2 लाख रुपये तक के होम लोन पर कटौती, 1.5 लाख रुपये तक के निवेश पर कटौती और राष्ट्रीय पेंशन प्रणाली (एनपीएस) योगदान पर अतिरिक्त 50,000 रुपये की कटौती का दावा कर सकते हैं. उन्होंने कहा, "मुंबई, दिल्ली और बेंगलुरु जैसे महानगरों में बढ़ते किराए को देखते हुए, वेतनभोगी कर्मचारियों के लिए एचआरए छूट कहीं अधिक फायदेमंद है. उन्होंने आगे कहा कि जिन लोगों ने वित्तीय योजना, बीमा और सेवानिवृत्ति निवेश की योजना बना रखी है, उनके लिए पुरानी व्यवस्था अभी भी प्रासंगिक है.
नए टैक्स में कम राहत
धारा 115BAC के तहत नई टैक्स व्यवस्था में टैक्स की दरें कम हैं और इसमें स्टैंडर्ड डिडक्शन लगभग 75,000 रुपये तक है. हालांकि, इसमें धारा 80C और 80D, HRA और LTA जैसी कटौतियां नहीं मिलती हैं. सिर्फ मानक कटौती, NPS में नियोक्ता के योगदान और सेवानिवृत्ति से संबंधित चुनिंदा छूटों तक ही सीमित हैं. ऐसे में बजट में कुछ छूटों को नई टैक्स व्यवस्था में शामिल करने की मांग होगी.
बजट 2026 से क्या-क्या उम्मीदें?
मैक्सिओम वेल्थ के संस्थापक और सीईओ राम मेदुरी ने कहा कि 30 प्रतिशत टैक्स स्लैब को बढ़ाने, रेट्स को सरल बनाने और संभवतः स्लैब को महंगाई से जोड़ना चाहिए. उन्होंने कहा कि भारतीय वेतन धीरे-धीरे बढ़ते हैं, लेकिन टैक्स स्लैब लंबे समय तक अपरिवर्तित रहते हैं, जिससे समय के साथ टैक्स का बोझ धीरे-धीरे बढ़ता जाता है. उन्होंने आगे कहा कि इंडेक्सेशन प्रणाली को अधिक न्यायसंगत बना सकता है.
नांगिया ग्लोबल के निदेशक संजय कुमार ने कहा कि पुरानी व्यवस्था बचत, बीमा और घर खरीदने को प्रोत्साहित करती है, जबकि नई व्यवस्था की सरलता ने इसे स्वीकार्यता दिलाने में मदद की है. इसमें से किसी एक को चुनना चुनौतिपूर्ण हैं. ऐसे में कुछ निर्णायक बदलाव करने चाहिए.
आजतक बिजनेस डेस्क