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बजट

चीन और PAK के मुकाबले भारत की सेनाओं को मिलता है कितना पैसा

अमित कुमार दुबे
  • 07 जून 2019,
  • अपडेटेड 5:00 PM IST
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जब भी एशिया में वर्चस्व की बात होती है तो फिर भारत, चीन और पाकिस्तान में ठन जाती है. भारत का चीन और पाकिस्तान के साथ सीमा विवाद पुराना है, और इसी विवाद के चलते दोनों ओर से रक्षा बजट पर खास ध्यान दिया जाता रहा है. भारत और चीन तो आर्थिक रूप से संपन्न है, लेकिन आज की तारीख में पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति बेहद दयनीय है, इसके बावजूद वह साल-दर-साल रक्षा बजट को बढ़ाता रहा. लेकिन पहली बार पाकिस्तान ने रक्षा बजट में कटौती का ऐलान किया है.

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दरअसल पाकिस्तान को अब जाकर अपनी गलती का अहसास हुआ है. पाकिस्तान की सेना ने अपने रक्षा बजट में कटौती का फैसला किया है, जिसकी इमरान खान तारीफ कर रहे हैं. लेकिन आज जो पाकिस्तान की स्थिति है, उससे कोई अनभिज्ञ नहीं है. पिछले एक दशक में देखें तो भारत, चीन और पाकिस्तान का सबसे ज्यादा फोकस रक्षा बजट पर रहा है.

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साल 2018 में पाकिस्तान से 6 गुना अधिक भारत का रक्षा बजट रहा. वहीं चीन का रक्षा बजट भारत के बजट की तुलना में करीब तीन गुना रहा. यानी तीनों देश रक्षा बजट को सबसे ज्यादा अहमियत देता रहा है.

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भारत का रक्षा बजट
भारत का रक्षा बजट साल 2017 में 2.74 लाख करोड़ रुपये का था. उसके बाद साल 2018 में इसे बढ़ाकर 2.98 लाख करोड़ रुपये किया गया. 2018 में भारत का सैन्य खर्च करीब 66.5 अरब डॉलर रहा था. जबकि फरवरी 2019 में भारत सरकार की ओर से रक्षा बजट में 6.87 फीसदी की बढ़त करते हुए 3.18 लाख करोड़ रुपये तय किया गया है. रक्षा बजट को अगर जीडीपी के अनुपात में देखें तो अब तक का सबसे कम महज 1.4 फीसदी है. जबकि प्रतिरक्षा मामलों पर संसदीय समिति का कहना है कि इसे कम से कम 3 फीसदी होना चाहिए.

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दरअसल मोदी सरकार तमाम रक्षा खरीद सौदों को मंजूरी देने की रुचि दिखा रही है. संसद में जब बजट पेश किया जाता है तो 10 लाख से ज्यादा की संख्या वाली हमारी सेनाओं के सर्वोच्च अधिकारी बड़े ध्यान से इसे देखते हैं. इन लोगों के कंधे पर देश की सीमाओं की रक्षा, एक अरब से ज्यादा लोगों की सुरक्षा की जिम्मेदारी होती है.

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वहीं देश के सामने खतरे बड़े हैं, दो परमाणु ताकत वाले पड़ोसी हमारे दुश्मन हैं. लेकिन हमारे सैनिकों के पास जो साजोसामान उसे हाईटेक करने की जरूरत है. भारतीय सेना को अगले कुछ वर्षों में 2,200 155एएम तोपों की जरूरत है. फिलहाल भारत के पास ज्यादातर हेलिकॉप्टर पुराने हैं और अगले 10 वर्षों में 1,000 से 1200 हेलिकॉप्टरों की जरूरत पड़ेगी. ऐसे में इस बार रक्षा बजट पर सरकार का खास फोकस हो सकता है.

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चीन का रक्षा बजट
चीन ने साल 2019 के लिए अपने रक्षा बजट में 7.5 फीसदी की बढ़त की है. साल 2019 के लिए चीन ने 1.19 लाख करोड़ युआन (करीब 177.61 अरब डॉलर) का प्रतिरक्षा बजट पेश किया. अमेरिका के बाद रक्षा बजट पर सबसे ज़्यादा खर्च करने वाला चीन दूसरा देश है.

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चीन का साल 2018 का रक्षा बजट करीब 175 अरब डॉलर का था जो कि भारत के रक्षा बजट का करीब तीन गुना था. चीन ने साल 2018 में अपने GDP का 1.3 फीसदी रक्षा पर खर्च किया था.

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चीन सरकार के मुताबिक साल 2018 के प्रतिरक्षा बजट में 8.1 फीसदी की बढ़त की गई थी. चीन ने साल 2016 में उसके प्रतिरक्षा बजट में 7.6 फीसदी की बढ़त हुई थी, इसके बाद साल 2017 में 7 फीसदी और साल 2018 में 8.1 फीसदी की बढ़त की गई थी.

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पाकिस्तान का रक्षा बजट
पाकिस्तान का रक्षा बजट वहां के जीडीपी का करीब 4 फीसदी है. पाकिस्तान साल 2018 में रक्षा बजट पर 80 हजार करोड़ रुपये खर्च करने वाला दुनिया का 20वां देश था. स्कॉटहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्टिट्यूट की रिपोर्ट के मुताबिक 2018 में पाकिस्तान का कुल सैन्य खर्च 11.4 अरब डॉलर था. 2018 में पाकिस्तान का रक्षा बजट 11 फीसदी के जोरदार इजाफे के साथ 11.4 अरब डॉलर हो गया. पाकिस्तान पर कर्ज और उसकी GDP का अनुपात 70 फीसदी तक पहुंच गया है.

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