जैविक खेती से भी बढ़िया मुनाफा कमा सकते हैं किसान, इस राज्य में मिल रही बंपर सब्सिडी

जैविक खेती अपनाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लम्बे समय तक बनी रहती है. इस पद्धति की खेती में लागत भी कम आती है. इसी वजह से किसानों को लगातार जैविक खेती के लिए प्रोत्साहित किया जा रहा है. इसी कड़ी में राजस्थान सरकार जैविक खेती में दिलचस्पी दिखाने वाले किसानों को 50 प्रतिशत की सब्सिडी दे रही है.

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aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 03 मई 2023,
  • अपडेटेड 7:18 PM IST

मिट्टी की कम होती उर्वरकता के बीच जैविक खेती के लिए किसानों को लगातार प्रोत्साहित किया जा रहा है. किसानों को इसके लिए जागरूक करने के साथ-साथ सब्सिडी भी दी जा रही है. इसी कड़ी में राजस्थान सरकार किसानों को जैविक खेती करने पर 50 प्रतिशत तक की सब्सिडी दी जा रही है.

जैविक खेती अपनाने पर बंपर सब्सिडी

राज्य में किसानों को जैविक खेती पर अधिकतम 50 प्रतिशत या फिर 10 हजार रुपये की सब्सिडी दी जा रही है. किसानों को ये राशि कुल 3 किस्तों में दी जाएगी. पहली किस्त में 4 हजार, दूसरी में तीन और तीसरी किस्त में भी 3 हजार रुपये किसानों के खाते में भेजे जाएंगे.

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यहां करें आवेदन

इस योजना का लाभ लेने के लिए किसानों के खेती के लिए कम से कम एक हेक्टेयर की जमीन जरूर होनी चाहिए. इसके अलावा किसान के पास पशुधन, पानी और कार्बनिक पद्धार्थ उपलब्ध होने चाहिए. किसान को सब्सिडी पाने के लिए राजकिसान साथी पोर्टल पर जाकर आवेदन करना होगा. इसके अलावा किसान नजदीकी ई-मित्र केंद्र जाकर भी जैविक खेती पर अनुदान के लिए आवेदन कर सकते हैं.

जैविक खेती का लाभ

रासायनिक और जैविक खेती में बड़ा अंतर खर्च का आता है. अगर 1 एकड़ खेती रासायनिक तौर पर की जाए तो खर्च 30 हजार प्रति एकड़ तक होता है. वहीं जैविक खेती में मात्र 5 हजार का खर्चा आता है. वहीं, अगर कमाई की बात करें तो रासायनिक की तुलना में जैविक खेती में 20% से अधिक मुनाफा होता है. वहीं जैविक खेती का माल बेचने में आसानी होती है और बड़ी संख्या में उसके खरीदार मिलते हैं.

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जैविक खेती के लाभ अनेक हैं. इस पद्धति को अपनाने से मिट्टी की उर्वरा शक्ति लम्बे समय तक बनी रहती है, साथ ही सिंचाई अंतराल में वृद्धि होती है. इस पद्धति की खेती में लागत भी कम आती है. वहीं पर्यावरण पर भी अच्छा प्रभाव पड़ता है. भूजल को बढ़ावा मिलता है और स्वास्थ्यवर्धकऔर रसायन से मुक्त अनाज प्राप्त होता है.

 

 

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