धान का कटोरा कहे जाने वाले पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली में अन्नदाता दोहरी मार झेल रहे हैं. एक तरफ जहां बारिश नहीं होने की वजह से धान की फसल सूख रही है और सूखे की आशंका ने किसानों के माथे पर शिकन ला दी है. बारिश नहीं होने की वजह से आने वाले दिनों में सिंचाई का भी संकट गहरा गया है. वहीं, दूसरी तरफ उफ़नाई गंगा ने तटवर्ती किसानों की सब्जी की फसल को बर्बाद कर दिया है.
चंदौली को धान का कटोरा इसलिए कहा जाता है, क्योंकि यहां पर धान की बहुत ही अच्छी पैदावार होती है. लेकिन इस साल धान की पैदावार कम होने की आशंका दिखाई दे रही है, क्योंकि जनपद में औसत से तकरीबन 60% कम बारिश हुई है. कम बारिश होने की वजह से एक तरफ जहां धान की फसल सूख रही है. वहीं, दूसरी तरफ जनपद में पड़ने वाले जलाशय भी सूखने की कगार पर पहुंच गए हैं. एक तरफ पानी नहीं बरसने की वजह से धान के खेतों में दरारें पड़नी शुरू हो गई हैं. वहीं, दूसरी तरफ जनपद का सबसे बड़ा जलाशय चंद्रप्रभा डैम भी सूखने के कगार पर पहुंच चुका है.
चंद्रप्रभा डैम सहित जनपद में कई अन्य जलाशय भी हैं, जहां से नहरों के माध्यम से चंदौली के किसानों के खेतों में पानी पहुंचता है. लेकिन बारिश नहीं होने की वजह से यह जगह से भी सूखने की कगार पर पहुंच चुके हैं. चंद्रप्रभा डैम की बात करें तो इस डैम की कुल क्षमता 3600 मिलियन घनफुट है. वर्तमान समय में इसमें सिर्फ 251 मिलियन घन फीट पानी बचा है. विभागीय अधिकारियों की मानें तो इस पानी से सिर्फ 5 दिनों तक नहरों का संचालन किया जा सकता है.
यही हाल नौगढ़ बांध, मूसाखंड बांध का भी है. इन जलाशयों में भी नाम मात्र का पानी बचा है. बारिश नहीं होने की वजह से चंदौली में धान की फसल सूख रही है और किसान त्राहिमाम कर रहे हैं.
धान की खेती करने वाले किसान जोखू अहमद ने बताया कि धान की फसल पर बुरा असर पड़ रहा है. यहां के किसान खाने के बिना मर जाएंगे. धान पैदा होने के बिल्कुल ही चांस नहीं है. पानी बरस नहीं रहा है और अन्य कोई साधन नहीं है. धान की फसल नहीं होगी तो आने वाले जीवन पर बहुत असर पड़ेगा. मजदूरी भी नहीं मिल रही है. काम करने के लिए सरकार से हमारी मांग है कि सरकार कम से कम इसका मुआवजा दे.
वहीं, एक अन्य किसान सुमेर चौहान ने बताया कि हमने डेढ़ बीघा के लगभग धान की खेती की है. धान होने की संभावना नहीं है. सूखा पड़ गया है. पानी बरस नहीं रहा है. सरकार हम लोगों को सूखे से राहत दे. धान की फसल नहीं होगी तो किसी तरह से गर्म मिट्टी करके कमाएंगे खाएंगे दूसरा कोई रास्ता है नहीं. काम धंधा नहीं मिलेगा, तो जहां दो बार खा रहे हैं, वहां एक ही समय खाएंगे.
एक तरफ जहां चंदौली के किसान सूखे की मार झेल रहे हैं. वहीं, दूसरी तरफ कुछ नई गंगा ने भी तटवर्ती इलाके में बसने वाले किसानों की मुश्किलें बढ़ा दी है. पूर्वी उत्तर प्रदेश के चंदौली में भी गंगा नदी उफान पर हैं. हालांकि अभी रिहायशी इलाकों में तो पानी नहीं आया है लेकिन नदी के किनारे सब्जी की खेतों में पानी भर जाने की वजह से सैकड़ों एकड़ सब्जी की फसल खराब हो गई हैं. इन दिनों गंगा नदी में बाढ़ आई हुई है और गंगा नदी का जलस्तर लगातार बढ़ रहा है. नदी के किनारे बसने वाले कई दर्जन ऐसे गांव हैं जहां के किसान नदी किनारे स्थित अपने खेतों में सीजनल सब्जी की खेती करते हैं. यही नहीं, इन खेतों में किसान अपने पशुओं के लिए चारा भी उगाते हैं. लेकिन गंगा नदी के बढ़ते हुए जलस्तर ने चंदौली जनपद के दर्जनों गांव के सैकड़ों किसानों की सब्जी की फसल को अपनी जद में ले लिया है. गंगा नदी में आई बाढ़ की वजह से इन किसानों की सब्जी की फसल बर्बाद हो गई है और यह किसान अब त्राहिमाम कर रहे हैं.
चंदौली के छेमिया गांव के रहने वाले किसान चमन चौहान ने गंगा नदी किनारे स्थित अपने डेढ़ बीघे खेत में सब्जी की फसल लगाई थी, लेकिन अचानक गंगा नदी में आई बाढ़ ने इनकी फसल को बर्बाद कर दिया. चमन चौहान जैसे दर्जनों ऐसे किसान हैं जिनकी फसल गंगा मे आई बाढ़ के चलते बर्बाद हो गई है और इन किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है.
वहीं माया चौहान का कहना है कि 5 दिनों से गंगा जी का पानी इतनी तेजी से बढ़ा है कि हम लोगों की सब्जी जो खेत में थी वह खेत में ही रह गई और सड़ गई. हम लोग पानी में ऐसे सब्जी नहीं निकाल पाए. अभी तो हम लोगों की कमाई शुरू हुई थी कि उसी समय यह सब पानी की वजह से बर्बाद हो गया. अब हम लोग परेशान हैं कि जिस चीज के सहारे हम लोग जी रहे थे वह सहारा भी छिन गया अब हम लोग क्या करें. सरकार हम लोगों पर दया दृष्टि करें और हम लोगों को मुआवजा दे.
उदय गुप्ता