Rain affect Paddy Sowing: बारिश ना होने की वजह से धान की बुवाई में देरी, सूखे की तरफ बढ़ रहा ये राज्य

Rain affect Paddy Sowing: मौसम विभाग के अनुसार अभी तक झारखंड में अभी तक 51 फीसदी कम बारिश हुई है. जुलाई का आधा महीना बीत जाने के बाद भी यहां बुवाई नहीं शुरू हो पाई है. राज्य में धान की बुवाई प्रतिशत इस साल 10 प्रतिशत से भी कम रहा है. ऐसे में राज्य सूखे जैसी स्थिति की तरफ बढ़ रहा है.

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Paddy Sowing: Paddy Sowing:

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 21 जुलाई 2022,
  • अपडेटेड 4:50 PM IST
  • बारिश ना होने से उत्पादन होगा प्रभावित
  • सूखे की स्थिति में पहुंच चुके हैं कई जिले

Rain affect Paddy Sowing: उत्तर भारत के कई राज्यों में अभी तक मॉनसून कमजोर रहा है. उत्तर प्रदेश, झारखंड और बिहार समेत कई राज्यों में उम्मीद के मुताबिक बारिश नहीं हो पाई है. ऐसे में इन राज्यों में धान की बुवाई पर असर पड़ा है. ऐसे में अगर आने वाले 10-15 दिनों में ठीक-ठाक बारिश नहीं होती है तो किसानों को काफी नुकसान का सामना करना पड़ सकता है.

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मौसम विभाग के अनुसार अभी तक झारखंड में अभी तक 51 फीसदी कम बारिश हुई है. जुलाई का आधा महीना बीत जाने के बाद भी यहां बुवाई नहीं शुरू हो पाई है. राज्य में धान की बुवाई प्रतिशत इस साल 10 प्रतिशत भी कम रहा है. ऐसे में राज्य सूखे जैसी स्थिति की तरफ बढ़ रहा है.

उपज में आएगी गिरावट
झारखंड में किसान आमतौर पर 15 जून से अपने खेतों को बुवाई के लिए तैयार करते हैं. फिर 1 से 31 जुलाई तक बुवाई की प्रकिया जारी रहती है. लेकिन इस बार बारिश कम होने की वजह से बुवाई की गतिविधियां 15 अगस्त तक खिसकती दिख रही है. धान की खेती के लिए ये स्थिति बेहद खतरनाक है. अगर राज्य में अगले पांच दिनों में पर्याप्त बारिश नहीं हुई, तो उपज में भारी गिरावट आएगी.

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कई जिलों में धान की अभी भी बुवाई नहीं शुरू हो पाई है
राज्य के कृषि विभाग के कवरेज डेटा के मुताबिक बुधवार तक राज्य के 24 में से 13 जिलों में धान की बुवाई शुरू नहीं हो सकी है. सरकार ने इस साल 18 लाख हेक्टेयर से ज्यादा रकबे में इसकी खेती करने का फैसला लिया था लेकिन अभी तक कुल रकबे का केवल 9.56 प्रतिशत ही बुवाई हो पाई है. रांची के राहे ब्लॉक के किसान खीरू महतो कहते हैं कि खेतों में पानी की कमी की वजह से हम अभी तक धान की बुवाई नहीं कर पाए हैं. बुवाई का मौसम लगभग समाप्त होने को है. ऐसी ही स्थिति रही तो हम बर्बाद हो जाएंगे.

पहले भी आ चुकी है सूखे जैसी स्थिति
झारखंड में जून और जुलाई में कम बारिश होने पर सूखे का सामना करना पड़ता है. साल 2013, 2018 और 2019 में भी इस राज्य को सूखे करना पड़ा था. 2020 में, सात जिलों के 55 ब्लॉकों को सूखा प्रभावित घोषित किया गया था. 2013 में झारखंड में जून में आठ फीसदी और जुलाई में 37 फीसदी कम बारिश हुई थी. 2018 में, राज्य को जून में 35 प्रतिशत और जुलाई में 18 प्रतिशत कम बारिश का सामना करना पड़ा था.  2019 में, राज्य ने जून में 55 प्रतिशत और जुलाई में 25 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की थी इस साल, राज्य को जून में 49 प्रतिशत बारिश और 20 जुलाई तक 51 प्रतिशत की कमी का सामना करना पड़ा है. झारखंड में 1 जून से 20 जुलाई तक 192.9 मिमी बारिश हुई है.

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राज्य के छह जिलों में 70 प्रतिशत से अधिक बारिश की कमी का सामना करना पड़ रहा है, साहिबगंज में 20 जुलाई तक सबसे अधिक 82 प्रतिशत बारिश की कमी दर्ज की गई है. रांची मौसम विज्ञान केंद्र के प्रभारी अभिषेक आनंद कहते हैं कि हम उम्मीद कर रहे हैं कि अगले पांच दिनों के दौरान राज्य में अच्छी बारिश होगी. ऐसे में इसका लाभ किसानों को मिलेगा. उधर कृषि विभाग ने सूखे से निपटने की तैयारियां शुरू कर दी है.

सरकार हर तरह की स्थिति से निपटने के लिए सतर्क
राज्य की कृषि निदेशक निशा उरांव सिंघमार ने बताया कि विभाग ने निजी डीलरों को लंबी अवधि की धान की किस्मों की बिक्री तुरंत बंद करने और कम अवधि की किस्मों को प्रोत्साहित करने का निर्देश दिया है. हमने जिला कृषि अधिकारियों को किसान समूहों को संगठित करने का निर्देश दिया है, ताकि किसी भी परिस्थिति का सामना किया दा सके. वह बताती हैं  कि अन्य खरीफ फसलों का कवरेज थोड़ा उत्साहजनक है. अभी तक मक्के की बुआई 48 फीसदी, दलहन 24.26 फीसदी, तिलहन 32.24 फीसदी और मोटे अनाज 11.93 फीसदी है.

 

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