मधुमक्खी पालन को ग्रामीण क्षेत्रों के मुनाफा देने वाले व्यवसायों में से एक माना जाता है. बाजार में शहद की मौजूदा कीमत 400 से 700 रुपये प्रति किलोग्राम तक है. ऐसे में बड़ी संख्या में किसान इस व्यवसाय से जुड़कर बढ़िया मुनाफा कमा रहे हैं. बता दें केंद्र सरकार मधुमक्खी पालन के इच्छुक किसानों को बंपर सब्सिडी भी देती है.
नाबार्ड भी मधुमक्खी पालन करने वाले किसानों को देती है सब्सिडी
किसानों को मधुमक्खी पालन के दौरान हर संभव मदद करने के लिए राष्ट्रीय मधुमक्खी बोर्ड (NBB) ने नाबार्ड (NABARD) के साथ टाईअप कर रखा है. दोनों ने मिलकर भारत में मधुमक्खी पालन बिजनेस के लिए फाइनेंसिंग स्कीम भी शुरू की है. इससे इस क्षेत्र में रुचि रखने वाले किसानों को बेहद लाभ होता है. इसके अलावा केंद्र सरकार भी मधुमक्खी पालन पर 80 से 85% तक सब्सिडी देती है.
कम लागत में शुरू कर सकते हैं मधुमक्खी पालन
अगर 10 पेटी से मधुमक्खी पालन की शुरुआत करेंगे तो 35 से 40 हजार रुपये तक का खर्च आता है. मधुमक्खियों की संख्या भी हर साल बढ़ती जाती है. बता दें कि जितनी ज्यादा मधुमक्खियां बढ़ेंगी, उतना ज्यादा ही शहद उत्पादन भी होगा और मुनाफा भी कई गुना बढ़कर लाखों का हो जाएगा.
मधुमक्खियों को रखने के लिए मोम के डिब्बे की जरूरत
मधुमक्खियों को रखने के लिए किसानों को कार्बनिक मोम (डिब्बे) की व्यवस्था करनी होती है. इस डिब्बे में 50 से 60 हजार मधुमक्खियां एक साथ रखी जाती हैं. इन मधुमक्खियों द्वारा तकरीबन एक क्विंटल शहद का उत्पादन होता है.अगर आप प्रति बॉक्स 1000 किलोग्राम की शहद बनाते हैं, तो आप प्रति महीने में 5 लाख तक का शुद्ध मुनाफा हासिल कर सकेंगे. ऐसे में कमजोर आर्थिक स्थिति वाले किसानों के पास भी इस व्यवसाय से बढ़िया मुनाफा कमाने का मौका है.
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