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Sunflower Cultivation: सूरजमुखी की खेती से बंपर कमाई करने का ये है सही तरीका, किसान करें फॉलो

Sunflower Farming: सूरजमुखी को तिलहन फसलों की श्रेणी का माना जाता है. इसकी खेती कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बिहार में व्यापक रूप से की जाती है. इसके लिए रेतीली दोमट मिट्टी और काली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसकी खेती साल में 3 बार की जा सकती है.

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स्टोरी हाइलाइट्स
  • रेतीली दोमट मिट्टी और काली मिट्टी उपयुक्त
  • 9 से 10 सिचांइयों की जरूरत होती है

Sunflower Cultivation: खरीफ के सीजन की शुरुआत हो चुकी है. इस सीजन में ज्यादातर किसान धान और मक्के की खेती करते नजर आते हैं. हालांकि, इस बीच किसानों की दिलचस्पी सूरजमुखी की खेती की तरफ बढ़ी है. इन फसलों की खेती को बढ़ावा देने के लिए भारत सरकार भी कई तरह की योजनाओं को बढ़ावा दे रही है

सूरजमुखी की फसल प्रकाश अंसवेदी है, इसकी साल में 3 बार खेती की जा सकती है.  इसकी बुआई खरीफ में मानसून आने पर, रबी में 15 नवंबर से 30 दिसंबर तक और बसंत कालीन  बुआई 15 जनवरी से 10 फरवरी तक कर लेनी चाहिए.

इन राज्यों में होती है इसकी खेती

सूरजमुखी को तिलहन फसलों की श्रेणी का माना जाता है. इसकी खेती कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, ओडिशा, महाराष्ट्र, तमिलनाडु और बिहार में व्यापक रूप से की जाती है. इसके लिए रेतीली दोमट मिट्टी और काली मिट्टी सबसे उपयुक्त मानी जाती है. इसके अलावा मिट्टी का पीएच 6.5 और 8.0 के बीच होना जरूरी है.

कितनी सिंचाईं की जरूरत

खेतों में सूरजमुखी के बीज लगाने से पहले उसका उपचार करना बेहद जरूरी है. नहीं तो कई बीज जनित बीमारियों से आपका फसल खराब हो सकती है. इसके अलावा इस फसल को तकरीबन 9 से 10 सिचांइयों की जरूरत होती है.

फसल काटने का समय

सूरजमुखी की फसल तब काटी जाती है जब सभी पत्ते सूख जाते हैं और सूरजमुखी के सिर का पिछला भाग नींबू पीला हो जाता है. देर करने पर दीमक का हमला हो सकता है और फसल बर्बाद हो सकती है. सूरजमुखी के पौधे से तेल निकालने के अलावा दवाओं तक में इसका उपयोग होता है. किसान भाई इस फसल से कम लागत, कम वक्त में लाखों का मुनाफा हासिल कर सकते हैं.

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