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यूपी में सरकारी कब्जे में क्यों है युवाओं की नौकरी? देखें 10 तक

यूपी में सरकारी कब्जे में क्यों है युवाओं की नौकरी? देखें 10 तक

सरकारी व्यवस्था जब लुंज-पुंज नीतियों के आगे नौजवानों की नौकरी के सपने ही बंधक बना ले तो जरूरी है दस्तक दी जाए. उत्तर प्रदेश के दो हजार चार सौ छियासी युवाओं को उनके हक की नौकरी दिलाने की लड़ाई लड़नी है जिनके पास कहने को सरकारी नौकरी है लेकिन हकीकत बेरोजगारी की है. 2016 में हजारों नौजवानों ने यूपी में सब इंस्पेक्टर भर्ती के लिए आवेदन किया था, जुलाई 2017 में लिखित परीक्षा हुई, पर्चा लीक हुआ, फिर परीक्षा रद्द हो गई, 5 महीने बाद दिसंबर 2017 में दोबारा लिखित परीक्षा कराई गई, जब परिणाम आया तो उस पर सवाल उठाते कुछ नौजवान हाईकोर्ट चले गए. हाईकोर्ट ने नए सिरे से रिजल्ट तैयार करने को कहा. सरकार हाईकोर्ट के फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट चली गई. इस बीच जून 2019 से जून 2020 तक चयनित 2486 युवाओं की सब इंस्पेक्टर के लिए पुलिस ट्रेनिंग हुई. सुप्रीम कोर्ट ने फिर चयनित दारोगा की पासिंग आउट परेड पर रोक लगा दी और फरवरी 2021 से सुप्रीम कोर्ट में युवाओं को नियुक्ति देने का मसला ऑर्डर के तौर पर सुरक्षित रखा हुआ है. देखें 10 तक का ये एपिसोड.

Two thousand four hundred and eighty-six youths of Uttar Pradesh are struggling for employment. In 2016, thousands of youth had applied for sub-inspector recruitment in UP, in July 2017, the written examination was held, the form was leaked, then the examination was canceled, after 5 months in December 2017, the written examination was conducted again. Thereafter, candidates went to Hight Court raising questions on the results. The High Court asked to prepare the result afresh. The Government went to the Supreme Court against the decision of the High Court. Meanwhile, from June 2019 to June 2020, police training for sub-inspector of 2486 youths was held. But still, the youth have no jobs today. Watch this episode.

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