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10तक: सियासत के लिए भी नमक की तरह इस्तेमाल होते हैं किसान!

10तक: सियासत के लिए भी नमक की तरह इस्तेमाल होते हैं किसान!

देश की सियासत में किसान नमक की तरह इस्तेमाल होता है. जरूरत के हिसाब से सियासी दल उसका इस्तेमाल अपने हित के हिसाब से करते हैं. लखीमपुर खीरी का ही उदाहरण लीजिए जहां पहुंचने के लिए विपक्षी दलों में आज होड़ मच गई. मुश्किल में फंसी जनता का हाल जानना हर दल का फर्ज और हक दोनों है लेकिन जनता को कब कितना भाव दिया जाएगा ये चुनाव पर निर्भर करता है. यूपी में चुनाव है तो सभी दलों को किसानों की चिंता है. छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भी लखीमपुर खीरी आने को तैयार हैं, लेकिन उनके ही राज्य में पिछले 5 महीनों से आदिवासी किसान आंदोलन कर रहे हैं, उनकी सुध लेने का न तो मुख्यमंत्री को वक्त मिला है और न ही उनकी पार्टी के नेतृत्व ने उनके लिए आवाज उठाई है. देखें 10तक.

Farmers are used as salt in politics. Taking stock of the condition of the people in trouble is both the duty and the right of every party, but the amount of attention depends on the election. Lakhimpur Kheri is the current example of this where every political leader wants to reach. But no one cares about the tribal farmers agitating for the last 5 months in Chhattisgarh.

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