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झारखंड के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार ने पद से दिया इस्तीफा

कांग्रेस को अब झारखंड से एक बड़ा झटका लगा है. झारखंड के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अजय कुमार का कहना है कि उन्हें कई बार बेइज्जत किया गया. इससे पहले आशंका थी कि झारखंड में कांग्रेस पार्टी में चल रहे घमासान के बीच बड़ा उलटफेर हो सकता है.

कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश के साथ अजय कुमार (फाइल फोटो-IANS) कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जयराम रमेश के साथ अजय कुमार (फाइल फोटो-IANS)

कांग्रेस को अब झारखंड से एक बड़ा झटका लगा है. झारखंड के प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय कुमार ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है. अजय कुमार का कहना है कि उन्हें कई बार बेइज्जत किया गया. इससे पहले आशंका थी कि झारखंड में कांग्रेस पार्टी में चल रहे घमासान के बीच बड़ा उलटफेर हो सकता है. वहीं दिल्ली में शुक्रवार को कांग्रेस के सभी राज्यों के प्रदेश अध्यक्षों की एक अहम बैठक हुई. इसमें अजय ने हिस्सा नहीं लिया.

इस साल हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस की करारी हार के बाद झारखंड कांग्रेस में शुरू हुआ किचकिच थमता नजर नहीं आ रहा है. इस साल होने वाले विधानसभा चुनाव से पहले पार्टी में दो गुटों की लड़ाई अब खुलकर सामने आ गई है.

सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के दोनों पक्षों को दिल्ली तलब किया गया है. अजय कुमार के खिलाफ पूर्व प्रदेश अध्यक्ष डॉ. प्रदीप बालमुचू और रांची के सांसद रहे सुबोधकांत सहाय ने बिगुल फूंक दिया था. बागी गुट जहां कांग्रेस अध्यक्ष को हटाने की मांग कर रहा है, वहीं अजय कुमार ने बागी गुट के दो नेताओं सुरेंद्र सिंह और राकेश सिन्हा को पार्टी से निलंबित कर उनके आक्रोश को और हवा दे दी थी. निलंबित दोनों नेता सुबोधकांत सहाय के नजदीकी माने जाते हैं.

न्यूज एजेंसी आईएएनएस ने कांग्रेस के एक नेता के हवाले से बताया, "अजय कुमार को जब प्रदेश कांग्रेस का अध्यक्ष बनाया गया था, पार्टी के लोगों को लगा था कि अपने प्रबंधकीय कौशल का उपयोग वह पार्टी को मजबूत करने में करेंगे, लेकिन जल्द ही कांग्रेस के पुराने नेताओं-कार्यकर्ताओं को पता चल गया कि डॉ. अजय कुमार अब तक आईपीएस अधिकारी की मानसिकता से बाहर नहीं निकल सके हैं."

वैसे यह कोई पहली बार नहीं है कि कांग्रेस किसी नौकरशाह को परख रही हो. इससे पहले भी कांग्रेस ने डॉ. रामेश्वर उरांव, सुखदेव भगत, विनोद किसपोट्टा, डॉ. अरुण उरांव, बेंजामिन लकड़ा जैसे पूर्व नौकरशाहों को पार्टी ने परखा था और इन नेताओं ने पार्टी को गति दी थी.

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