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फैक्ट चेक: मूर्ति की इस वायरल तस्वीर का जगन्नाथपुरी और कोरोना से नहीं है कोई कनेक्शन

देश में कोरोना रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है. 7 अप्रैल 2021 को जारी सरकारी आंकड़ों  के मुताबिक देश में पहली बार 24 घंटे के अंदर कोविड-19 के तकरीबन 1.15 लाख केस दर्ज किए गए. ​फिर से जोर पकड़ती कोरोना वायरस की इस रफ्तार के बीच सोशल मीडिया पर एक काले रंग की मूर्ति की फोटो वायरल हो रही है.

सोशल मीडिया पर यह पोस्ट वायरल हो रही है. सोशल मीडिया पर यह पोस्ट वायरल हो रही है.

देश में कोरोना वायरस रोज नए रिकॉर्ड बना रहा है. 7 अप्रैल 2021 को जारी सरकारी आंकड़ों  के मुताबिक देश में पहली बार 24 घंटे के अंदर कोविड-19 के तकरीबन 1.15 लाख केस दर्ज किए गए. ​फिर से जोर पकड़ती कोरोना वायरस की इस रफ्तार के बीच सोशल मीडिया पर एक काले रंग की मूर्ति की फोटो वायरल हो रही है.

फोटो पर लिखा है, “पुरी मंदिर से संबंधित इस सालिग्राम को आखिरी बार 1920 में स्पेनिश फ्लू के दौरान महामारी के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए निकाला गया था. कोविड के मद्देनजर अब इसे फिर से निकाल लिया गया है. कृपया दर्शन करें और इसे परिवार व दोस्तों को दें.

इस पोस्ट का आर्काइव्ड वर्जन यहां  देखा जा सकता है. इंडिया टुडे के एंटी फेक न्यूज वॉर रूम (AFWA) ने पाया कि सोशल मीडिया पर काले रंग की मूर्ति की जो फोटो शेयर की जा रही है, उसका ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर से कोई संबंध नहीं है. जगन्नाथ पुरी मंदिर में बाड़ी नरसिंह भगवान की मूर्ति को हर साल शहर की परिक्रमा करवाई जाती है. ऐसा माना जाता है कि इससे बीमारियां दूर रहती हैं. फेसबुक पर ये फोटो काफी वायरल है. खबर लिखे जाने तक इस फोटो को शेयर करने वाली एक पोस्ट  पर तकरीबन 2000 लोग रीएक्शन दे चुके थे और करीब 200 लोग इसे शेयर कर चुके थे.  

क्या है सच्चाई

जगन्नाथ पुरी मंदिर प्रशासन ने इस बात की पुष्टि की कि सोशल मीडिया पर वायरल फोटो में जो मूर्ति नजर आ रही है, वो जगन्नाथ पुरी मंदिर की नहीं है. मंदिर के पुजारी इ​प्शित ने बताया, “महामारी दूर करने से जुड़ी मान्यता का संबंध शालिग्राम की मूर्ति से नहीं ब​ल्कि यहां की भगवान बाड़ी नरसिंह की मूर्ति से है. इस मूर्ति को हर साल शहर की परिक्रमा करवाई जाती है और ऐसा माना जाता है कि इससे लोग महामारी और बीमारियों से बचे रहते हैं.”  

पिछले साल भी भगवान बाड़ी नरसिंह की मूर्ति को शहर की परिक्रमा करवाई गई थी. इस बारे में 30 मार्च 2020 को द न्यू इंडियन एक्सप्रेस’ ने एक रिपोर्ट भी छापी थी.

वायरल फोटो के साथ ये भी कहा जा रहा है कि इस शालिग्राम को आखिरी बार 1920 में स्पेनिश फ्लू के दौरान महामारी के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए निकाला गया था. लेकिन सच्चाई ये है कि स्पेनिश फ्लू का 1920 में नहीं बल्कि 1918 में फैला था. ये जानकारी अमेरिकी संस्था सेंटर फॉर ​डिसीज कंट्रोल’ की वेबसाइट पर दी गई है.  

पिछले साल ‘एसएमहोक्सस्लेयर’ वेबसाइट भी इससे मिलते-जुलते एक दावे का खंडन कर चुकी है. सोशल मीडिया पर वायरल फोटो असल में कहां की है, इस बारे में हम कुछ नहीं कह सकते, लेकिन इतनी बात तय है कि इस फोटो का ओडिशा के जगन्नाथपुरी मंदिर से कोई संबंध नहीं है.

 

फैक्ट चेक

सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

पुरी मंदिर से संबंधित इस शालिग्राम को आखिरी बार 1920 में स्पेनिश फ्लू के दौरान महामारी के दुष्प्रभाव से बचाने के लिए निकाला गया था. कोविड के मद्देनजर अब इसे फिर से निकाल लिया गया है.

निष्कर्ष

इस मूर्ति का ओडिशा के जगन्नाथ पुरी मंदिर से कोई संबंध नहीं है. हालांकि ये सच है कि जगन्नाथ पुरी मंदिर में मौजूद बाड़ी नरसिंह भगवान की मूर्ति को हर साल शहर की परिक्रमा करवाई जाती है. मान्यता है कि ऐसा करने से बीमारियां दूर रहती हैं.

झूठ बोले कौआ काटे

जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

  • कौआ: आधा सच
  • कौवे: ज्यादातर झूठ
  • कौवे: पूरी तरह गलत
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