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फैक्ट चेक: पत्थरबाजी करती लड़की और आगजनी की इन तस्वीरों का जहांगीरपुरी हिंसा से कोई वास्ता नहीं

हमने पाया कि ये दोनों ही तस्वीर पुरानी हैं और इनका हालिया जहांगीरपुरी हिंसा से कुछ लेना-देना नहीं है. पत्थर फेंकती बुर्का पहने हुए युवती की तस्वीर अप्रैल 2018 की है जब श्रीनगर के लाल चौक इलाके में चार नागरिकों की कथित हत्या के विरोध में कुछ छात्राओं ने सुरक्षा बलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और पत्थरबाजी की थी.

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देश की राजधानी दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में हुई हालिया हिंसा मामले में गृह मंत्रालय ने पांच आरोपियों पर नेशनल सिक्योरिटी एक्ट (NSA) लगाया है. दरअसल इस इलाके में 16 अप्रैल 2022 को हनुमान जयंती शोभायात्रा के दौरान दो समुदायों के बीच टकराव हो गया था. जिसमें एक स्थानीय व्यक्ति और आठ पुलिसवाले जख्मी हो गए थे. पुलिस के मुताबिक, इस दौरान पथराव और आगजनी की गई थी और गाड़ियों को भी जलाया गया था.

अब इस घटना से जोड़ते हुए सोशल मीडिया पर दो तस्वीरें वायरल हो रही हैं. इनमें से पहली फोटो में बुर्का पहने हुए एक युवती पत्थर मारने की मुद्रा में नजर आ रही है. इस फोटो को ‘#जहांगीरपुरी’ जैसे हैशटैग्स के साथ शेयर किया जा रहा है और ये बताने की कोशिश की जा रही है कि ये युवती हाल ही में जहांगीरपुरी, दिल्ली में पत्थरबाजी कर रही थी.  

मिसाल के तौर पर, एक ट्विटर यूजर ने इसे पोस्ट करते हुए लिखा, “इसे तो भारत की महिला क्रिकेट टीम में होना चाहिए था. #Secularism #जहांगीरपुरी”.

इसी तरह, एक अन्य फोटो में एक वाहन में आग लगी हुई है. हर जगह धुआं ही धुआं नजर आ रहा है. साथ ही, सुरक्षा दस्ते के कुछ लोग जाते हुए दिख रहे हैं. इस फोटो को भी ‘#धार्मिक_दंगे_बंद_करो’, ‘#Riots’, ‘#DelhiCapitals’ और ‘#जहांगीरपुरी’ जैसे हैशटैग्स के साथ शेयर किया जा रहा है.

हमने पाया कि ये दोनों ही तस्वीर पुरानी हैं और इनका हालिया जहांगीरपुरी हिंसा से कुछ लेना-देना नहीं है. पत्थर फेंकती बुर्का पहने हुए युवती की तस्वीर अप्रैल 2018 की है जब श्रीनगर के लाल चौक इलाके में चार नागरिकों की कथित हत्या के विरोध में कुछ छात्राओं ने सुरक्षा बलों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन और पत्थरबाजी की थी.

वहीं जलते वाहन वाली तस्वीर मार्च 2018 की है जब पश्चिम बंगाल के बर्धमान जिले में रामनवमी का एक जुलूस निकलने के बाद दो पक्षों के बीच टकराव और हिंसा की घटनाएं हुई थीं.

तो आइए, जानते हैं कि हमने कैसे पता लगाई इन दोनों तस्वीरों की सच्चाई.

पहली फोटो: कश्मीर में हुई थी ये पत्थरबाजी  

रिवर्स सर्च करने पर हमें ये फोटो पीटीआई फोटो जर्नलिस्ट उमर गनी के 11 अप्रैल 2018 के एक ट्वीट में मिली. ‘#KulgamKillings’ हैशटैग के साथ किए गए इस ट्वीट में छात्राओं की पत्थरबाजी से जुड़ी कुछ और तस्वीरें भी देखी जा सकती हैं. उमर ने इस ट्वीट में बताया था कि ये श्रीनगर के लाल चौक इलाके की फोटो है. यहां कुलगाम में सेना के एक्शन में मारे गए चार नागरिकों को लेकर छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया और सुरक्षाबलों पर पत्थर फेंके. इस घटना में एक छात्रा जख्मी भी हो गई थी. 

इस जानकारी की मदद से कीवर्ड सर्च करने पर हमें एलेमी (Alamy) फोटो वेबसाइट पर इस विरोध प्रदर्शन की कुछ तस्वीरें मिलीं. इन तस्वीरों में छात्राओं की वेशभूषा और जूतों को देखकर कहा जा सकता है कि वायरल फोटो इसी मामले से संबंधित है.

दरअसल, जम्मू कश्मीर के कुलगाम जिले में 11 अप्रैल 2018 को सेना ने एक मिलिट्री ऑपरेशन चलाया था. इसमें चार नागरिकों और एक आर्मी के जवान की जान चली गई थी. इन मौतों के चलते इलाके में तनाव फैल गया था और सेना के विरोध में कई प्रदर्शन हुए थे.

दूसरी फोटो का बंगाल कनेक्शन

इस फोटो को रिवर्स सर्च करने से ये हमें ‘द हिन्दुस्तान टाइम्स’ की 30 मार्च 2018 की एक रिपोर्ट में मिली. यहां बताया गया है कि ये बर्धमान, पश्चिम बंगाल के रानीगंज इलाके का मामला था जहां राम नवमी का एक जुलूस निकलने के बाद हिंसा भड़क गई थी.

ठीक यही फोटो हमें ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ और ‘इंडिया टुडे’ की मार्च 2018 की न्यूज रिपोर्ट्स में भी मिली.

जाहिर है, दूसरे राज्यों की पुरानी तस्वीरों को दिल्ली के जहांगीरपुरी में हुई हालिया हिंसा से जोड़कर भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है.  

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सोशल मीडिया यूजर्स

दावा

तस्वीर में देखा जा सकता है कि कैसे इस युवती ने दिल्ली के जहांगीरपुरी इलाके में पत्थरबाजी की.

निष्कर्ष

साल 2018 की ये फोटो श्रीनगर के लाल चौक इलाके की है. उस वक्त वहां चार नागरिकों की हत्या के विरोध में छात्राओं ने विरोध प्रदर्शन किया था और सुरक्षा बलों पर पत्थर फेंके थे.

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जितने कौवे उतनी बड़ी झूठ

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