एक बयान के अनुसार, ईरान के साथ बातचीत की संभावना को देखते हुए, अगले दो हफ्तों में युद्ध में शामिल होने का फैसला किया जाएगा. ईरान के परमाणु ठिकानों पर हमले से रेडियोएक्टिव पदार्थों के रिसाव का खतरा है, जिससे बड़े पैमाने पर तबाही हो सकती है.