चीन का स्पाई बैलून (Spy Balloon) इस साल जनवरी के आखिरी हफ्ते में अमेरिका के हवाई क्षेत्र में नजर आया था. इस घटना ने दुनियाभर में हलचल मचा दी थी. चीन का यह जासूसी गुब्बारा अमेरिका के कई संवेदनशील इलाकों के ऊपर से होकर गुजरा था, जिसके बाद राष्ट्रपति बाइडेन के आदेश पर इस बैलून को दक्षिण कैरोलिना के पास मार गिराया गया था. इस बैलून को मार गिराए जाने की जानकारी अब अमेरिका ने भारत सहित कई अन्य देशों के साथ साझा की है.
अमेरिका के एक शीर्ष सैन्य अधिकारी ने बताया कि भारत के साथ अमेरिका के सैन्याभ्यास के बीच यह जानकारी साझा की गई है. अमेरिका ने 'एक्सरसाइज कोप इंडिया' सैन्याभ्यास के लिए बी1 लैंसर बॉम्बर को तैनात किया है. यह सैन्याभ्यास भारत में तीन जगह पश्चिम बंगाल के पानागढ़ और कलाईकुंडा और उत्तर प्रदेश के आगरा में हो रहा है.
इस सैन्याभ्यास के लिए अमेरिकी बमवर्षकों की तैनाती भारत और अमेरिका के सैन्य सहयोग के लिए बहुत महत्वपूर्ण है. यह सैन्याभ्यास ऐसे समय में भी हो रहा है, जब चीन और ताइवान के बीच तनाव बढ़ा है और चीन लगातार अमेरिका पर इस मामले में हस्तक्षेप करने का आरोप लगा रहा है.
पैसिफिक एयरफोर्सेज के कमांडर जनरल किनीथ एस. विल्सबाक ने नई दिल्ली में पत्रकारों के एक चुनिंदा समूह से बातचीत में कहा कि भारत सहित अन्य देशों के साथ बातचीत में उन्हें चीन के स्पाई बैलून को मार गिराए जाने का ब्योरा दिया गया.
उन्होंने कहा कि इस क्षेत्र के कुछ देशों के वायुसेना प्रमुखों के साथ हमारी बात हुई. हमने उनके साथ चीन के स्पाई बैलून का ब्योरा साझा किया है.
चीन के स्पाई बैलून के हवाई सीमा के उल्लंघन के बारे में कहा कि किसी देश के हवाई क्षेत्र में घुसपैठ उस देश की संप्रभुता का उल्लंघन है और जो भी देश इसका पालन नहीं करता या अंतर्राष्ट्रीय नियमों का अनुसरण नहीं करता. वह चिंता का सवाल है.
बता दें कि भारत के ट्राई-सर्विस मिलिट्री एक्सरसाइज के दौरान अंडमान एवं निकोबार द्वीप के आसपास कुछ रहस्यमयी बैलून देखे गए थे.
भारत में भी दिखे थे स्पाई बैलून
अमेरिका द्वारा चीन के जासूसी गुब्बारे को गिराए जाने के बाद एक रिपोर्ट में दावा किया गया था कि चीन ने भारत, जापान आदि देशों को निशाना बनाते हुए कई जासूसी गुब्बारे ऑपरेट किए थे. इसके जरिए इन देशों की सैन्य जानकारियां जुटाई गई थी.
रिपोर्ट में कहा गया था कि पीपुल्स लिबरेशन आर्मी उन देशों में निगरानी के लिए अपने जासूसी गुब्बारों का इस्तेमाल करती हैं जिनमें उसकी सामरिक रूचि होती है.
वाशिंगटन पोस्ट ने अपनी एक रिपोर्ट में लिखा था कि 'गुब्बारे के जरिए दूसरे देशों पर निगरानी रखने का काम चीन के दक्षिण तट से दूर हैनान प्रांत से संचालित होता है. इसके जरिए चीन ने जापान, भारत, वियतनाम, ताइवान और फिलीपींस सहित कई उभरती सामरिक रुचि के देशों और क्षेत्रों की जासूसी की है. चीन इसके जरिए सैन्य जानकारियां जुटाता है.'
क्या था मामला?
इस साल जनवरी में चीन का एक गुब्बारा अमेरिकी वायुक्षेत्र में मंडराता दिखा था. अमेरिकी सेना ने उस पर कड़ी नजर रखी थी. तीन दिनों तक गुब्बारा अमेरिका के मोंटाना क्षेत्र में उड़ता रहा. मोंटाना में ही अमेरिका का एक न्यूक्लियर मिसाइल क्षेत्र है और अमेरिका को अंदेशा था कि गुब्बारा संवेदनशील क्षेत्र से गुजरते हुए जानकारी चीन तक पहुंचाएगा.
अमेरिकी राष्ट्रपति जो बाइडेन ने इसे गिराने के आदेश दे दिए थे. उनका कहना था कि इस बात का ध्यान रखा जाए कि तीन बसों के आकार के गुब्बारे से किसी को नुकसान न हो, इसलिए गुब्बारे के अटलांटिक महासागर के ऊपर आने का इंतजार किया गया. गुब्बारा शनिवार को समुद्री क्षेत्र में आया और राष्ट्रपति बाइडेन के आदेश पर अमेरिकी एयरफोर्स ने हाई टेक F-22 रैप्टर एयरक्राफ्ट की मदद से चीनी गुब्बारे को मार गिराया. चीन ने गुब्बारा गिराए जाने से पहले तो नरमी दिखाई थी लेकिन जब अमेरिका ने उसे मार गिराया और मलबा देने से इनकार कर दिया तो चीन भड़क गया.
चीन ने क्या कहा था?
चीन का कहना था कि उसका मौसम की जानकारी जमा करने वाला गुब्बारा गलती से अमेरिकी एयरस्पेस में चला गया था. इस प्रकरण को लेकर अमेरिका-चीन के बीच तनाव चरम पर है. अमेरिकी विदेश मंत्री एंटनी ब्लिंकन इसी हफ्ते रिश्तों को सामान्य करने के लिए चीन जाने वाले थे लेकिन अब उनका यह दौरा रद्द कर दिया गया है. गुब्बारा गिराए जाने के बाद अमेरिकी रक्षा मंत्रालय ने कोशिश की थी कि दोनों देशों के रक्षा मंत्रियों की फोन पर बात हो, लेकिन चीन ने इस पेशकश को ठुकरा दिया था.
अभिषेक भल्ला