बेरूत में हसन नसरल्लाह के समर्थकों और लेबनानी सेना के बीच शनिवार को कुछ झड़पें हुईं. भीड़ को तितर-बितर करने के लिए लेबनानी सेना ने हवा में गोलीबारी की. एक बयान में लेबनान की आर्मी ने कहा, 'हम नागरिकों से राष्ट्रीय एकता बनाए रखने का आह्वान करते हैं और ऐसे कार्यों में शामिल नहीं होने का आग्रह करते हैं जिससे इस मुश्किल समय में शांति-व्यवस्था प्रभावित हो.'
बता दें कि हिज्बुल्लाह लेबनान का एक शिया मिलिशिया ग्रुप है, जो वहां की राजनीति में भी हस्तक्षेप रखता है. हिज्बुल्लाह लेबनान में एक राजनीतिक पार्टी के रूप में भी सक्रिय है और वहां के शासन में इस संगठन की काफी दखलंदाजी है. हालांकि, इसे आधिकारिक मान्यता नहीं प्राप्त है और लेबनान के संविधान के तहत देश की सुरक्षा के लिए एक मान्यता प्राप्त सेना है.
साल 1982 में इजरायल ने जब दक्षिणी लेबनान पर आक्रमण किया था तब हिज्बुल्लाह मिलिशिया संगठन अस्तित्व में आया था, जिसे ईरान का समर्थन प्राप्त है. हिज्बुल्लाह के संस्थापक अब्बास अल-मुसावी की 1992 में इजरायली हवाई हमले में मौत के बाद हसन नसरल्लाह संगठन का प्रमुख बना और 32 वर्षों तक इसका नेतृत्व किया. वह 27 सितंबर, 2024 को दक्षिणी बेरूत के दहियाह इलाके में स्थित हिजबुल्लाह हेडक्वार्टर पर इजरायली हवाई हमले में मारा गया. इजरायल लेबनान में हिज्बुल्लाह के ठिकानों पर लगातार हमले कर रहा है.
नसरल्लाह के मारे जाने के बाद भी इजरायली वायुसेना की बमबारी नहीं रुकी है. दक्षिणी लेबनान और बेरूत से लोगों ने पलायन करना शुरू कर दिया है. वे लेबनान के सुरक्षित हिस्सों में पनाह ले रहे हैं. कुछ सीमा पार करके सीरिया में भी दाखिल हो रहे हैं. बेरूत में लोगों के बीच डर का माहौल है. यहां लोग अपने घरों में रहने की बजाय खुले आसमान के नीचे रातें गुजार रहे हैं. उन्हें डर सता रहा है कि पता नहीं कब इजरायली विमान बम बरसाने लग जाएं.
पिछले साल 7 अक्टूबर को हमास ने इजरायल पर हमला किया था, उसके बाद इस क्षेत्र में तनाव काफी बढ़ गया. इजरायल ने बड़े पैमाने पर जवाबी कार्रवाई शुरू की और हमास के गढ़ गाजा को तहस-नहस कर दिया. सीरिया सीमा के पास स्थित लेबनानी इलाके पक्का वैली को भी इजरायल 8 अक्टूबर, 2024 से ही लगातार निशाना बना रहा है, क्योंकि यह हिज्बुल्लाह का गढ़ माना जाता है. यहां से हिज्बुल्लाह के लड़ाके अपनी सुविधा के मुताबिक बिना किसी रोक-टोक के सीरिया में घुस सकते हैं.
इस बीच ईरान समर्थित मिलिशिया समूह हिज्बुल्लाह ने हाशिम सफीद्दीन को अपना नया प्रमुख घोषित किया है. सफीद्दीन नसरल्लाह का ममेरा भाई है. 1964 में दक्षिणी लेबनान के दीर कानून अल-नाहर में जन्मे हाशिम को 1990 के दशक से ही नसरल्लाह के उत्तराधिकारी के रूप में देखा जाता रहा है. तब हाशिम ईरान में पढ़ाई करता था और उसे बेरूत वापस बुलाया गया था. नसरल्लाह के नेतृत्व संभालने के दो साल बाद ही हाशिम ने हिजबुल्लाह की कार्यकारी परिषद का नेतृत्व करना शुरू कर दिया.
हिज्बुल्लाह प्रमुख बनने से पहले हाशिम सफीद्दीन संगठन के राजनीतिक मामलों को देखता था और एग्जीक्यूटिव काउंसिल का प्रमुख था. हाशिम, संगठन के मिलिट्री ऑपरेशंस की प्लानिंग करने वाले जिहाद काउंसिल का चेयरमैन भी है. अमेरिका ने 2017 में हाशिम को आतंकवादी घोषित किया था. हिज्बुल्लाह के लिए काम करने और सीरिया में बशर अल-असद शासन का समर्थन करने के चलते सऊदी अरब ने भी उसे ब्लैक लिस्ट कर दिया था. हाशिम सफीद्दीन फिलिस्तीन के मुद्दों पर काफी मुखर है. वह हमेशा इजरायल, अमेरिका और उनके मित्र देशों के खिलाफ उग्र भाषण देता रहा है.
अशरफ वानी