यूक्रेन पर जारी रूसी हमलों के बीच यूक्रेन के लाखों लोग पोलैंड, हंगरी, रोमानिया सहित कई यूरोपीय देशों की शरण ले रहे हैं. शरणार्थियों की तादाद इस कदर बढ़ती जा रही है कि संसाधनों की व्यवस्था करने में परेशानी उठानी पड़ रही है. यूक्रेन का बॉर्डर क्रॉस कर इन देशों में पहुंचने वाले लोगों में बहुत से भारतीय नागरिक भी शामिल हैं. इनमें बड़ी तादाद मेडिकल की पढ़ाई के लिए यूक्रेन जाने वाले छात्रों की है.
जंग की इस घड़ी में अब पोलैंड, हंगरी और रोमानिया में रहने वाले भारतीय मूल के लोग मदद के लिए आगे आए हैं. ये लोग शरणार्थी कैंप में वॉलंटियर बनकर काम कर रहे हैं. इनमें से कई लोग ऐसे भी हैं, जो पिछले कई दिनों से लगातार बिना खाए और सोए लोगों की मदद करने में जुटे हुए हैं.
कैंप में बिजली और पानी की किल्लत
रोमानिया की राजधानी बुखारेस्ट के शरणार्थी कैंप में पहुंची आजतक की टीम को लोगों ने बताया कि यहां बिजली और पानी की शॉर्टेज है. बहुत परेशानी का सामना करना पड़ रहा है, लेकिन इस बात की तसल्ली है कि वे किसी तरह यूक्रेन बॉर्डर को पास कर रोमानिया पहुंच गए. यहां बहुत से ऐसे लोग भी हैं, जो यूक्रेन से भारत में अपने घर जाने के लिए आए थे, लेकिन यहां वॉलंटियर बने लोगों का जज्बा देखकर खुद भी वॉलंटियर बन गए.
भारतीय शरणार्थियों की सूचना मिलते ही पहुंचे
बुखारेस्ट के शरणार्थी कैंप में वॉलंटियर का काम कर रहे एक छात्र ने बताया कि वे गुजरात के रहने वाले हैं और रोमानिया में रहते हैं. उन्होंने बताया कि जैसे ही उन्होंने यूक्रेन से भारतीय शरणार्थियों के आने की बात सुनी तो वे तत्काल बुकारेस्ट के शरणार्थी कैंप पहुंच गए. उन्होंने बताया कि वे 44 घंटे से सोए नहीं है, 3 दिन से ठीक से खाना नहीं खाया है, लेकिन उन्हें इस बात की खुशी है कि वे मुसीबत में फंसे भारतीय नागरिकों के काम आ रहे हैं. उन्होंने बताया कि वे रोमानिया की भाषा अच्छे से जानते हैं.
शरणार्थी ज्यादा, वॉलंटियर कम
250 लोगों का खाना लेकर बुखारेस्ट के शरणार्थी कैंप पहुंची महिला नीता ने बताया कि यहां शरणार्थियों की तादाद ज्यादा है और काम करने वाले लोग बेहद कम हैं. नीता ने बताया कि यहां आने वाले भारतीयों को जब भी किसी चीज की जरूरत पड़ती है, वे तुरंत पास के स्टोर पर जाकर वह सामान ले आती हैं. दुकान बंद होने पर भी वे दुकान खुलवाकर सामान ले आती हैं. रोमानिया के लोग भी शरणार्थियों की काफी मदद कर रहे हैं.
MBBS की छात्रा ने हंगरी में संभाला मोर्चा
यूक्रेन के ओडेसे इलाके में चौथे साल की MBBS स्टूडेंट सिमरन की कहानी भी कुछ ऐसी ही है. वे हरियाणा के करनाल की रहने वाली हैं. सिमरन 2 दिन की यात्रा के बाद हंगरी के जाहोनी सीमा तक पहुंचीं. और फिर वह दोस्त कार्तिक के साथ बुडापेस्ट पहुंचने में कामयाब रहीं. सिमरन को भारत सरकार द्वारा प्रबंध किए गए विमान से वतन लौटना था, लेकिन जिस हॉस्टल में उसे ठिकाना मिला, वहां उसने बतौर वॉलंटियर काम करना शुरू कर दिया. दरअसल हुआ यूं कि हंगरी में भारत के दूतावास ने बुडापेस्ट में पढ़ने वाले भारतीय छात्रों और स्थानीय नागरिकों से मदद मांगी, तो सिमरन ने बतौर वॉलंटियर हॉस्टल में मोर्चा संभाल लिया.
ये भी पढ़ें:
लवीना टंडन