पाकिस्तान से नाराज हुआ दोस्त चीन, मजबूरी में इमरान खान उठाएंगे ये कदम

हाल ही में खबर आई थी कि पाकिस्तान में सीपीईसी (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर) योजनाओं की धीमी गति के चलते चीनी कंपनियां काफी हताश हो चुकी हैं और पिछले तीन सालों में हुई प्रगति को लेकर चीन ने गहरा असंतोष जाहिर किया था. अब चीनी कंपनियों की चिंताओं को दूर करने के लिए पाकिस्तानी सरकार अगले कुछ दिनों में 1.4 बिलियन डॉलर्स का आंशिक भुगतान करने की कोशिश कर रही है.

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बलोचिस्तान के ग्वादर पोर्ट में पाकिस्तान और चीन के झंडे, फोटो क्रेडिट: Getty Images बलोचिस्तान के ग्वादर पोर्ट में पाकिस्तान और चीन के झंडे, फोटो क्रेडिट: Getty Images

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 22 सितंबर 2021,
  • अपडेटेड 1:01 PM IST
  • पाकिस्तान में काम कर रही चीनी फर्मों को जल्द भुगतान करेगा पाकिस्तान
  • CPEC प्रोजेक्ट से हताश चीनी कंपनियों को राहत देने की कोशिश

हाल ही में खबर आई थी कि पाकिस्तान में सीपीईसी (चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर) योजनाओं की धीमी गति के चलते चीनी कंपनियां काफी हताश हो चुकी हैं और पिछले तीन सालों में हुई प्रगति को लेकर चीन ने गहरा असंतोष जाहिर किया था. अब चीनी कंपनियों की चिंताओं को दूर करने के लिए पाकिस्तानी सरकार अगले कुछ दिनों में 1.4 अरब डॉलर्स का आंशिक भुगतान करने की कोशिश कर रही है. पाकिस्तान की सरकार खासतौर पर स्वतंत्र बिजली उत्पादकों और अन्य प्रोजेक्ट्स पर काम कर रहीं चीनी कंपनियों की आशंकाओं को दूर करने के लिए ऐसा कर रही है. 

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इस मामले में बात करते हुए एक वरिष्ठ सरकारी अधिकारी ने डॉन वेबसाइट को बताया कि हम कम से कम कुछ भुगतान जल्द से जल्द पूरा करने के लिए कोशिश कर रहे हैं. उन्होंने ये भी कहा कि चीन-पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरीडोर (सीपीईसी) के तहत काम कर रहे बिजली उत्पादकों की देनदारी लगभग डेढ़ बिलियन डॉलर्स यानि 230 अरब रुपए हो चुकी है और चीन के निवेशक अब सरकार के शीर्ष नेताओं से इसकी शिकायत कर रहे हैं.

चीन पाकिस्तान इकोनॉमिक कॉरिडोर (CPEC) चीन की अरबों डॉलर की महत्वाकांक्षी योजना बेल्ट ऐंड रोड का सबसे अहम हिस्सा है. इसी महीने पाकिस्तान के एक सीनेट पैनल ने भी इस प्रोजेक्ट पर पिछले तीन सालों में हुई जीरो प्रगति पर चिंता जाहिर की थी. सीनेट की स्थाई समिति की अध्यक्ष सलीम मांडवीवाला ने कहा था कि चीनी सीपीईसी पर काम की गति से संतुष्ट नहीं हैं और पिछले तीन वर्षों के दौरान पोर्टफोलियो पर उन्होंने कोई प्रगति नहीं देखी है. मांडवीवाला ने बताया कि चीनी राजदूत ने भी उनसे शिकायत करते हुए कहा था कि सीपीईसी योजना को बर्बाद कर दिया गया है.

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आतंकी हमले के बाद चीनी ठेकेदारों ने रोका था पाकिस्तान में काम 

गौरतलब है कि पाकिस्तान में चीनी कंपनियों के लिए भुगतान के अलावा सुरक्षा भी मुद्दा बना हुआ है. दासु हाइड्रोपावर प्रोजेक्ट से जुड़े चीनी ठेकेदारों ने दो महीने से अधिक समय से निर्माण गतिविधियों को रोका हुआ है. दरअसल इस प्रोजेक्ट से जुड़े चीनी ठेकेदारों ने एक आतंकी हमले के बाद काम रोक दिया था. पाकिस्तानी सेना द्वारा सिक्योरिटी कवर देने के बाद भी ये लोग काम शुरू नहीं कर रहे हैं. बता दें कि ये प्रोजेक्ट सीपीईसी का हिस्सा नहीं है. 

इस मामले में सीनियर अधिकारी का कहना था कि उन्होंने काम पर वापस आने के लिए मुआवजे का मुद्दा उठाया है. इसे उचित चर्चा के माध्यम से सुलझाया जा सकता है. लेकिन निर्माण कार्य बिना किसी देरी के शुरू किया जाना चाहिए. चीनी ठेकेदारों ने इसी तरह की घटना के बाद मोहमेंद बांध पर काम करना बंद कर दिया था लेकिन उन्होंने पाकिस्तान और चीन के द्विपक्षीय संबंधों को देखते हुए एक हफ्ते बाद ही काम शुरु कर दिया था. 

उन्होंने आगे कहा कि सीपीईसी मामलों पर प्रधानमंत्री के विशेष सहायक खालिद मंसूर तत्काल आधार पर कुछ भुगतान सुनिश्चित करने के लिए सभी संबंधित अधिकारियों के साथ बातचीत कर रहे हैं. खालिद मंसूर के एक करीबी ने कहा, 'हम इस महीने या अगले महीने की शुरुआत में कुछ भुगतानों को चुकाने के लिए कड़ी मेहनत कर रहे हैं. उन्होंने आगे कहा कि चीनी कंपनियां बहुत मिलनसार हैं. वे नोटिस जारी करने या बेहद गंभीर कदम उठाने में नहीं बल्कि सरकारी स्तर पर मामलों को सुलझाने की कोशिश करते हैं. हमारे लिए कामकाजी रिश्ते मायने रखते हैं.

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