ग्लेशियर पिघलने पर किन शहरों पर डूबने का खतरा, बताएगा ये टूल

ग्रेडिअंट फिंगरप्रिंट मैपिंग (GFM) नाम का यह टूल हर शहर के हिसाब से भविष्यवाणी करने में सक्षम होगा. नासा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एरिक ईविन्स के अनुसार, सभी शहर भविष्य को ध्यान में रखकर अपनी योजनाओं पर काम करते हैं, यह टूल उनकी उम्मीदों के अनुसार ही काम करता है.  

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ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ेगा खतरा ग्लोबल वार्मिंग से बढ़ेगा खतरा

मोहित ग्रोवर

  • न्यूयॉर्क,
  • 17 नवंबर 2017,
  • अपडेटेड 2:09 PM IST

ग्लोबल वार्मिंग को लेकर दुनिया भर में चिंता बढ़ती ही जा रही है. अमेरिकी अंतरिक्ष एजेंसी नासा ने एक ऐसा टूल बनाया है जिससे यह पता लगाया जा सकता है कि अगर ग्लोबल वार्मिंग के कारण ग्लेशियर पिघलते हैं तो सबसे पहले कौन-से शहर डूबेंगे. नासा का यह टूल धरती के घूमने की प्रक्रिया, ग्लेशियर के पिघलने की गति के आधार पर शहरों का चुनाव करेगा.

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नासा के इस टूल के आकलन के अनुसार, इसमें भारत का भी एक शहर शामिल है. कर्नाटक का मंगलोर पर इसका सबसे ज्यादा खतरा है. नासा के डाटा के अनुसार, ग्रीनलैंड और अंटार्कटिक आइसशीट के पिघलने का असर मंगलोर पर पड़ेगा. इसके अनुसार, अगले 100 साल में अगर ग्लेशियर पिघलता है तो मंगलोर का समुद्री लेवल 15.98CM तक पहुंच जाएगा, जबकि मुंबई का लेवल 15.26 CM और न्यूयॉर्क का 10.65CM होगा.

वैज्ञानिकों की मानें, तो ग्रेडिअंट फिंगरप्रिंट मैपिंग (GFM) नाम का यह टूल हर शहर के हिसाब से भविष्यवाणी करने में सक्षम होगा. नासा के वरिष्ठ वैज्ञानिक एरिक ईविन्स के अनुसार, सभी शहर भविष्य को ध्यान में रखकर अपनी योजनाओं पर काम करते हैं, यह टूल उनकी उम्मीदों के अनुसार ही काम करता है.   

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ग्लेशियर पिघलने की स्थिति में दुनिया में कुल 293 शहरों पर खतरा जताया गया है. इनमें भारत के तीन शहरों का नाम भी है, कर्नाटक का मंगलोर, महाराष्ट्र का मुंबई और आंध्र प्रदेश का काकिंदा.

गौरतलब है कि पृथ्वी की सतह पर तापमान में वृद्धि लगातार हो रही है. मौजूदा समय तक वैज्ञानिकों की आम राय है कि 1950 से अभीतक के आंकड़े बता रहे हैं कि पृथ्वी का तापमान 0.8 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ चुका है. पृथ्वी के तापमान में हो रही इस वृद्धि के पीछे वैज्ञानिकों में आम राय है कि 1950 के दशक के बाद से तेजी से होता औद्योगिकरण इसके लिए काफी हद तक जिम्मेदार है. वहीं मौजूदा तापमान के अधिक स्तर का संकेत हमें पृथ्वी के मौसम में तेजी से होते बदलाव के तौर पर भी देखने को मिल रहा है.

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