हमास के खिलाफ इजरायल की जंग जारी है. इजरायल की सेना का दावा है कि वो गाजा शहर के दरवाजे तक पहुंच चुकी है, यानी वो अब हमास के गढ़ पर चढ़ाई की तैयारी कर रही है. इजरायल की जमीनी चढ़ाई के बीच हमास नेताओं में भी खलबली मची है. वो लगातार इजरायल के खिलाफ जहर उगल रहे हैं. उसके एक नेता ने कहा है कि इस धरती पर इजरायल का अस्तित्व मिटाकर दम लेंगे, चाहे इसके लिए लाखों हमले क्यों ना करने पड़ें.
इस सबके बीच लेबनान के संगठन हिज्बुल्ला का प्रमुख हसन नसरल्लाह आज शुक्रवार को युद्ध के बाद पहली बार भाषण देगा. इस पर दुनिया भर की निगाहें टिकी रहेंगी. वहीं इजरायली सेना की भी इसके चलते मुश्किलें बढ़ सकती हैं. कारण, अभी तक हिज्बुल्ला खुलकर हमास के समर्थन में युद्ध में नहीं उतरा है. लेकिन पिछले कुछ दिनों से उसकी तरफ से लगातार इजरायली बॉर्डर पर हमले किए जा रहे हैं. जवाबी कार्रवाई में उसके 50 लड़ाके भी अब तक मारे जा चुके हैं.
सैय्यद की काली पगड़ी और शिया मौलवी की पोशाक पहनने वाला नसरल्लाह अरब दुनिया में सबसे प्रमुख शख्सियतों में से एक है.
सीमा पर हिज्बुल्ला का हमला तेज
इस भाषण से एक दिन पहले ही बॉर्डर पर एक साथ 19 इजरायली ठिकानों पर हमला किया गया. इसका इजरायल की सेना भी जवाब दे रही है. अब इस भाषण के बाद तय होगा कि हिज्बुल्ला इस युद्ध में खुलकर मैदान में उतरेगा या नहीं. ईरान द्वारा समर्थित हिज्बुल्ला फिलाहल बॉर्डर पर ही इजरायली सेना से लड़ रहा है. उसकी तरफ से युद्ध में उतरने की आधिकारिक घोषणा नहीं की गई है.
वहीं लेबनान में बहुत से लोग दोपहर 3 बजे होने वाले इस भाषण का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं. कुछ लोगों का कहना है कि इस भाषण के बाद तनाव बढ़ने की संभावना है. इस भाषण की अधिक व्यापक रूप से अपेक्षा भी की जा रही है. कारण, नसरल्लाह अमेरिका और इजरायल का मुकाबला करने के लिए ईरान द्वारा स्थापित क्षेत्रीय सैन्य गठबंधन में एक है.
हिज्बुल्ला के युद्ध में सीधे तौर पर उतरने के संकेत नहीं: अमेरिका
उधर, अमेरिका का कहना है कि फिलहाल हिज्बुल्ला के इजरायल के खिलाफ युद्ध में सीधे तौर पर उतरने के संकेत नहीं है. व्हाइट हाउस राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद के अध्यक्ष जॉन किर्बी ने कहा कि अमेरिका ने कोई ऐसे संकेत नहीं देखे हैं कि हिजबुल्लाह इजरायल के खिलाफ हमास के युद्ध में पूरी तरह से शामिल होने के लिए तैयार है. अमेरिका हिज्बुल्ला प्रमुख हसन नसरल्लाह के बहुप्रतीक्षित टेलीविजन संबोधन पर निगाहें बनाए हुए है.
रॉयटर्स के मुताबिक लेबनानी संगठन ने 7 अक्टूबर के हमले के बाद से इजरायल पर लगभग 100 मिसाइलें दागी हैं, जबकि हिज्बुल्ला ने फिलहाल अधिक तीव्र बैराज फायर करने या एक के समान जमीनी आक्रमण शुरू नहीं किया है. हालांकि हिज़्बुल्ला ने गुरुवार को इजरायल में अपनी गोलीबारी तेज कर दी. माना जा रहा है कि नसरल्लाह के भाषण से पहले हमले तेज हुए हैं.
हमास से कितना अलग है हिज्बुल्ला?
1982 में ईरान के रिवॉल्यूशनरी गार्ड्स ने इस आतंकी संगठन को बनाया था. इसका मकसद ईरान में हुई इस्लामी क्रांति को दूसरे देश में फैलाना और लेबनान में इजरायली सेना के खिलाफ मोर्चा खड़ा करना था. हमास और हिजबुल्ला, दोनों ही संगठनों का एक ही मकसद है और वो है- इजरायल का विनाश. हमास और हिज्बुल्ला, दोनों को ही अमेरिका ने आतंकी संगठन घोषित कर रखा है.
हिज्बुल्ला के पास ऐसे रॉकेट हैं, जो इजरायल के किसी भी हिस्से को टारगेट कर सकते हैं. अगर हमास और हिज्बुल्ला एकसाथ हमला करते हैं तो इजरायल के लिए बड़ी मुश्किल खड़ी हो सकती है. हिज्बुल्ला इजरायल के उत्तर में है तो हमास गाजा पट्टी में एक्टिव है. इनके पास रॉकेट, मिसाइलों, एंटी-टैंक मिसाइलों और एयर डिफेंस सिस्टम जैसे हथियार हैं. हिज्बुल्ला के पास किसी देश की सेना के बराबर क्षमता है.
इजरायल और हिज्बुल्लाः एक-दूसरे के दुश्मन
इजरायल और हिज्बुल्ला एक-दूसरे के कट्टर दुश्मन हैं. जुलाई 2006 में हिज्बुल्ला ने दो इजरायली सैनिकों को बंधक बना लिया था. जवाब में इजरायल ने जंग छेड़ दी थी. 34 दिन तक चली इजरायल और हिज्बुल्ला की इस जंग में 1100 से ज्यादा लेबनानी नागरिक मारे गए थे. इजरायल के भी 165 नागरिकों की इसमें मौत हुई थी. इस जंग में वैसे तो कोई नहीं जीता था, लेकिन सीधे तौर पर लेबनान को भारी नुकसान हुआ था.
इंटरनेशनल रेड क्रॉस कमेटी के मुताबिक, उस जंग में इजरायली सेना ने 30 हजार से ज्यादा घर या तो पूरी तरह तबाह कर दिए थे या फिर उन्हें क्षति पहुंचाई थी. 109 पुल और 78 मेडिकल फैसेलिटी को डैमेज कर दिया था. रिपोर्ट्स के मुताबिक, उस समय हिज्बुल्ला के पास तीन से पांच हजार लड़ाके थे और कम दूरी की मिसाइलें ही थीं. लेकिन बीते 17 साल में न सिर्फ उसका संगठन बड़ा हुआ है, बल्कि हथियारों का जखीरा भी काफी बढ़ा है.
आज कितना मजबूत है हिज्बुल्ला?
ऐसा अनुमान है कि आज के समय में हिज्बुल्ला के पास 60 हजार से ज्यादा लड़ाके हैं. इतना ही नहीं, 2006 में उसके सिर्फ 14 हजार मिसाइलें थीं, जिनकी संख्या अब बढ़कर डेढ़ लाख से ज्यादा हो गई होगी. हिज्बुल्ला के पास आज के समय कम दूरी में मार करने वाली मिसाइलें तो हैं ही. इनके अलावा उसके पास ईरानी मिसाइलें भी हैं जो 300 किलोमीटर की दूरी तक मार सकती हैं. इसके अलावा हिज्बुल्ला की एक 'स्पेशल फोर्स' भी है, जिसे युद्ध के समय इजरायल में घुसपैठ करने के लिए खास ट्रेनिंग दी गई है.
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