ईरान में आर्थिक संकट के ख़िलाफ़ चल रहे विरोध प्रदर्शन देशभर के कई शहरों में फैल गया है. राजधानी तेहरान समेत मशहद और इस्फ़हान जैसे प्रमुख शहरों में लोग सड़कों पर उतर आए. प्रोटेस्टरों और सुरक्षाबलों के बीच झड़प की भी खबरें सामने आई हैं. विरोध प्रदर्शन तेज होने के बाद इंटरनेट पर पाबंदी लगा दी गई है. ईरान में सत्ता के खिलाफ खुला विद्रोह चल रहा है.
पिछले महीने तेहरान के ग्रैंड बाज़ार से शुरू हुए प्रदर्शन अब देश भर में फैल चुके हैं. व्यापारियों द्वारा ईरानी मुद्रा रियाल के तेज गिरावट और बढ़ती महंगाई के खिलाफ आवाज़ उठाई गई थी, जो जल्द ही बेरोज़गारी, वस्तुओं की कमी और पश्चिमी प्रतिबंधों के कारण बढ़ते आर्थिक संकट में तब्दील हो गया.
सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे वीडियो और पोस्ट में देखा गया है कि कई शहरों में पूर्व शाह के समर्थन में नारे लगाए जा रहे हैं.
इसी बीच, राष्ट्रपति मसूद पेजेशकियान ने घरेलू आपूर्तिकर्ताओं को चेतावनी दी है कि वे वस्तुओं की जमाखोरी या मूल्य वृद्धि न करें, जिससे जनता को राहत मिल सके.
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी ईरान पर दबाव बढ़ रहा है. अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने कहा है कि अगर सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की तो अमेरिका कड़े कदम उठाएगा. किसी की भी आवाज़ दबाने की कोशिश की गई तो हम छोड़ेंगे नहीं.
ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों से जुड़ी हर ब्रेकिंग अपडेट सबसे पहले और सबसे सटीक रूप में आपको आजतक के इस लाइव ब्लॉग में मिलेगी. ईरान के भीतर हालात कैसे बदल रहे हैं, प्रदर्शनकारियों पर क्या कार्रवाई हो रही है और दुनिया भर से इस पर कैसी प्रतिक्रियाएं आ रही हैं - हर अहम घटनाक्रम पर हमारी लगातार नज़र बनी हुई है.
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ईरान में जारी विरोध प्रदर्शनों के बीच मौतों का आंकड़ा बढ़कर कम से कम 62 हो गया है. न्यूज एजेंसी एपी ने मानवाधिकार कार्यकर्ताओं के हवाले से इसकी जानकारी दी. महंगाई और आर्थिक संकट के खिलाफ शुरू हुए ये प्रदर्शन लगातार उग्र होते जा रहे हैं, जिससे ईरान में हालात और ज्यादा तनावपूर्ण बनते जा रहे हैं.
मानवाधिकार संगठनों के अनुसार ईरान में आर्थिक संकट के खिलाफ चल रहे देशव्यापी प्रदर्शनों के दौरान पिछले 12 दिनों में 42 लोगों की मौत हो गई है, दर्जनों लोग घायल हुए हैं और 2,200 से ज्यादा लोगों को गिरफ्तार किया गया है. यूएस स्थित ईरान ह्यूमन राइट्स एक्टिविस्ट्स न्यूज एजेंसी (HRANA) की रिपोर्ट के मुताबिक मारे गए लोगों में 34 प्रदर्शनकारी और आठ सुरक्षा बलों के सदस्य शामिल हैं. कैस्पियन पोस्ट और विदेशी मीडिया के हवाले से बताया गया है कि ये प्रदर्शन ईरान के सभी 31 प्रांतों में फैल चुके हैं.
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों के बीच दुबई से ईरान जाने वाली कई उड़ानों को रद्द कर दिया गया है. दुबई एयरपोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक, दुबई से ईरान के कई शहरों के लिए जाने वाली कम से कम छह उड़ानें रद्द कर दी गई हैं. एयरपोर्ट प्रशासन ने यात्रियों को सलाह दी है कि वे यात्रा से पहले अपनी उड़ान की स्थिति की जांच कर लें और संबंधित एयरलाइन से संपर्क करें.
ईरान के सर्वोच्च नेता अली खामेनेई जल्द ही देश में जारी प्रदर्शनों को लेकर राष्ट्र को संबोधित करने वाले हैं. यह जानकारी ईरान की सरकारी टीवी ने दी है.
तेहरान में सरकार विरोधी आंदोलन के बीच हालात और ज्यादा उग्र होते दिख रहे हैं. सड़कों पर प्रदर्शनकारियों की भीड़ जुट रही है और जगह-जगह वाहन जलते नजर आ रहे हैं. आगजनी के बीच गुस्सा खुलकर सड़कों पर फूट पड़ा है.
इस्लामिक क्रांति को करीब पांच दशक बीत चुके हैं, लेकिन ईरान के धार्मिक शासक आज भी वक्त के साथ कदम मिलाने में नाकाम नजर आ रहे हैं. सत्ता की प्राथमिकताएं और एक युवा समाज की उम्मीदों के बीच की खाई लगातार चौड़ी होती जा रही है.
देश की बड़ी आबादी अब सवाल पूछ रही है, जवाब चाहती है और बदलाव की मांग कर रही है. लेकिन शासन अब भी पुराने ढांचे और सख्त नियंत्रण के भरोसे हालात संभालने की कोशिश कर रहा है.
ईरान की सरकारी टीवी ने आखिरकार प्रदर्शनों पर चुप्पी तोड़ी है. सरकारी प्रसारण में हताहतों की बात मानी गई है, लेकिन साथ ही पूरा ठीकरा बाहरी ताकतों पर फोड़ने की कोशिश की गई है. ईरान स्टेट टीवी का दावा है कि आगजनी की घटनाओं के पीछे अमेरिका और इज़रायल से जुड़े “आतंकी एजेंट” शामिल हैं. पूरी खबर को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं - बढ़ते विरोध के बीच ईरान का बदला सुर
इनपुट: AP
ईरान में हालात तनावपूर्ण हैं. अमेरिका ने भी खामनेई शासन को खुली धमकी दे डाली है. ऐसे में सवाल उठता है कि अगर अमेरिका ईरान पर हमला करता है तो इजरायल साथ देगा या नहीं. तो आइए जानते हैं इसका जवाब क्या है. पढ़ें पूरा लेख - ईरान में बगावत के बीच हमले को तैयार अमेरिका, क्या इजरायल भी शामिल होगा ऑपरेशन में?
तेल बाजार में हलचल लगातार दूसरे दिन भी जारी रही. शुक्रवार को कच्चे तेल की कीमतों में फिर उछाल देखने को मिला और यह तीसरे हफ्ते की बढ़त की ओर बढ़ती दिखीं. इसकी बड़ी वजह वेनेजुएला से तेल सप्लाई को लेकर अनिश्चितता और ईरान में बढ़ती राजनीतिक अशांति मानी जा रही है.
ईरान में चल रहे विरोध प्रदर्शनों ने वहां तेल उत्पादन को लेकर चिंता बढ़ा दी है, जिसका असर सीधे वैश्विक बाजार पर पड़ रहा है. इसी दबाव में ब्रेंट क्रूड की कीमत 40 सेंट यानी करीब 0.7 प्रतिशत बढ़कर 62.39 डॉलर प्रति बैरल पर पहुंच गई.
वहीं अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट क्रूड में भी मजबूती दिखी. डब्ल्यूटीआई की कीमत 35 सेंट या 0.6 प्रतिशत बढ़कर 58.11 डॉलर प्रति बैरल हो गई. साफ है कि ईरान और वेनेजुएला से जुड़ी अनिश्चितताओं ने तेल बाजार की बेचैनी और बढ़ा दी है.
इनपुट: रॉयटर्स
ईरानी पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता मासिह अलीनेजाद ने सीएनएन से बातचीत में कहा कि ईरान में चल रहे प्रदर्शन अब सिर्फ आर्थिक या आर्थिक स्तर तक सीमित नहीं हैं.
ईसा मसीह अलीनेजाद के अनुसार, इस शासन में अब किसी भी प्रकार का सुधार संभव नहीं है. जनता अब सीधे तौर पर इस्लामिक रिपब्लिक ऑफ ईरान के अंत की मांग कर रही है. उनका कहना है कि लोग साफ-सुथरे शब्दों में कह रहे हैं कि उन्हें इस सिस्टम से पूरी तरह से मुक्त किया जाना चाहिए.
राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने तो ईरान को खुली धमकी दे ही है कि अगर प्रदर्शनकारियों पर गोली चलता है तो अमेरिका तगड़ा हमला करेगा. आइए जानते हैं फिर अमेरिका से लड़ने के लिए कितना तैयार है ईरान, यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं - ईरान के पास कौन-कौन से हैं हथियार
तेहरान में हालात अब सड़कों तक ही सीमित नहीं रहे. लोग अपने घरों से बाहर निकलकर और खिड़कियों-बालकनियों से नारे लगाते नजर आए. जैसे-जैसे प्रदर्शन फैलते गए, राजधानी की सड़कों पर भीड़ उमड़ पड़ी. यह पूरे देश में जारी अशांति का एक नया और ज्यादा गंभीर मोड़ माना जा रहा है.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ने ईरान में जारी सरकार विरोधी प्रदर्शनों को लेकर खामेनेई शासन को सख्त चेतावनी दी है. ट्रंप ने साफ कहा है कि अतीत में ईरानी सुरक्षा बलों ने प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी की थी, लेकिन अगर इस बार ऐसा हुआ तो अमेरिका बेहद कड़ी कार्रवाई करेगा.
ट्रंप के मुताबिक, फिलहाल बड़े पैमाने पर गोलीबारी की खबरें सामने नहीं आई हैं, लेकिन हालात तेजी से बदल रहे हैं. उन्होंने यह भी कहा कि मौजूदा माहौल में ईरान के अंदर शासन को पलटने का जोश और उत्साह बहुत तेज दिखाई दे रहा है.
ट्रंप का यह बयान ऐसे वक्त आया है जब ईरान की सड़कों पर गुस्सा उफान पर है और खामेनेई शासन हर कदम दबाव में उठाता नजर आ रहा है. अमेरिका की इस चेतावनी से तेहरान की बेचैनी और बढ़ना तय माना जा रहा है.
ईरान के निर्वासित प्रिंस रेज़ा पहलवी अगले हफ्ते अमेरिका में डोनाल्ड ट्रंप के मार-ए-लागो आवास का दौरा कर सकते हैं. यह दावा अमेरिकी पत्रकार लॉरा लूमर ने किया है. बताया जा रहा है कि रेजा पहलवी यरुशलम प्रेयर ब्रेकफास्ट में भी हिस्सा लेंगे. हालांकि अभी यह साफ नहीं है कि इस दौरान उनकी डोनाल्ड ट्रंप से कोई मुलाकात होगी या नहीं.
ऐसे वक्त में जब ईरान के भीतर सत्ता विरोधी आंदोलन तेज हो रहे हैं, रेजा पहलवी की यह संभावित अमेरिका यात्रा खामेनेई शासन की बेचैनी और बढ़ा सकती है. बाहर से मिल रहा राजनीतिक और प्रतीकात्मक समर्थन तेहरान के लिए नई चुनौती बनता दिख रहा है.
खामनेई शासन की परेशानियां लगातार बढ़ती जा रही है. एक तरफ़ ईरान में सड़कों पर जनसैलाब उतर आया है. दूसरी ओर डोनाल्ड ट्रंप धमकी भी दे रहे हैं और ईरान के लोगों को ख़ास संदेश. ट्रंप ने ईरानी जनता के नाम फ़ारसी संदेश दिया है.
ट्रंप ने कहा है कि आज़ादी से बड़ा कुछ नहीं, आप बहादुर लोग हैं. आपका देश कभी महान था, जो हुआ वह दुखद है. स्वतंत्रता सबसे अनमोल है.
तेहरान में जिस तरह लगातार तनाव बढ़ रहा है और हवाई सुरक्षा को लेकर सख्त कदम उठाए जा रहे हैं, उससे साफ संकेत मिल रहे हैं कि ईरानी सरकार किसी भी तरह की अस्थिरता को बर्दाश्त करने के मूड में नहीं है. शासन पूरी ताकत के साथ हालात को दबाने की तैयारी में दिख रहा है.
सत्ता को डर है कि अगर हालात हाथ से निकल गए तो प्रदर्शन और फैल सकते हैं. इसी आशंका में सरकार हर मोर्चे पर सख्ती दिखा रही है. तेहरान में बढ़ती बेचैनी यह साफ कर रही है कि आने वाले वक्त में टकराव और तेज हो सकता है.
ईरान की सड़कों पर अब नारे सीधे सत्ता के खिलाफ गूंज रहे हैं. प्रदर्शनकारियों ने खुलकर “डेथ टू डिक्टेटर” के नारे लगाए हैं. बड़ी संख्या में लोग सड़कों पर उतर आए हैं और गुस्सा दबाने की बजाय और तेज होता दिख रहा है.
जिस पैमाने पर भीड़ सामने आ रही है, उससे साफ संकेत मिल रहा है कि हालात फिलहाल थमने वाले नहीं हैं. खामेनेई शासन के लिए चुनौती हर घंटे बढ़ती जा रही है. मौजूदा हालात यही बता रहे हैं कि आने वाले दिनों में मामला और ज्यादा बिगड़ सकता है और सत्ता पर दबाव और तेज होगा.
ईरान में गुरुवार रात प्रोटेस्टर्स देशभर के कई शहरों में उतर आए. संख्या इतनी बड़ी थी कि खामनेई शासन पूरी तरह से हिल गया. ऊपर से डोनाल्ड ट्रंप ने एक फिर से धमकी दे डाली है. तो आइए जानते हैं कि ईरान में क्या चल रहा है. पूरी खबर को आप यहां क्लिक कर पढ़ सकते हैं - इंटरनेट-टेलीफोन बंद, जगह-जगह आगजनी और ट्रंप की खामेनेई को वॉर्निंग
ईरान के निर्वासित क्राउन प्रिंस रेज़ा पहलवी ने अब सीधे तौर पर जनता से सड़कों पर उतरने की अपील कर दी है. उनका कहना है कि बड़े और संगठित प्रदर्शनों ने पहले ही खामेनेई शासन को हिला दिया है. हालात ऐसे बन चुके हैं कि कई जगहों पर सुरक्षा बल पीछे हटते नजर आए हैं और कुछ लोग जनता के पक्ष में भी आ गए हैं.
ईरान से आ रही तस्वीरें साफ इशारा कर रही हैं कि अब प्रदर्शनकारी सीधे खामेनेई शासन को चुनौती दे रहे हैं. हालात इतने बिगड़ चुके हैं कि सड़कों पर कारें जलती हुई नजर आ रही हैं. गुस्सा खुलकर सड़कों पर उतर आया है और भीड़ अब किसी दबाव में दिख नहीं रही.
जिस तरह से आगजनी की घटनाएं सामने आ रही हैं, उससे साफ है कि शासन की पकड़ कमजोर पड़ती जा रही है. प्रदर्शन अब सिर्फ नारेबाजी तक सीमित नहीं रहे. सड़कों पर बढ़ता उबाल खामेनेई के लिए बड़ी परेशानी बनता जा रहा है.
तेहरान समेत पूरे देशभर में सत्ता विरोधी आंदोलन बड़े पैमाने पर चल रहा है. रातभर प्रोटेस्टर और सुरक्षाबलों के बीच सड़कों पर झड़प हुई है. सड़कों से भीड़ को हटाने की कोशिशें की जा रही है. हालांकि, प्रोटेस्टर मानने को तैयार नहीं हैं.
ईरान संकट पर अमेरिकी उपराष्ट्रपति जेडी वेंस ने कहा है कि अमेरिका शांतिपूर्ण प्रदर्शनकारियों के साथ खड़ा है. ईरान को परमाणु मुद्दे पर बातचीत करनी चाहिए. अमेरिका अधिकारों की लड़ाई लड़ने वालों के साथ हैं. परमाणु कार्यक्रम पर अमेरिका से वास्तविक बातचीत ही सबसे समझदारी है.
ईरान में सत्ता के खिलाफ प्रदर्शन जिस तेजी से बढ़ रहे हैं, उससे खामेनेई शासन साफ तौर पर घबराया हुआ दिख रहा है. हालात हाथ से फिसलते देख सरकार ने बड़ा और सख्त सुरक्षा फैसला लिया है. पूरे देश का एयरस्पेस बंद कर दिया गया है. तेहरान का मुख्य एयरपोर्ट भी ठप कर दिया गया है, ताकि किसी भी तरह की आवाजाही पर पूरी तरह रोक लगाई जा सके.
इतना ही नहीं, खामेनेई शासन ने देशभर में एयर डिफेंस सिस्टम भी सक्रिय कर दिए हैं. साफ है कि सत्ता को डर है कि हालात और बिगड़े तो स्थिति काबू से बाहर जा सकती है. सड़कों पर बढ़ते विरोध और जनता के गुस्से के बीच शासन हर कदम डर और दबाव में उठा रहा है.
राजधानी तेहरान में रात को प्रदर्शन इतने बड़े स्तर पर पहुंच गया था कि शहर के प्रमुख सड़कों को ब्लॉक कर दिया गया.
इनपुट: सुमीत चौधरी
तेहरान में मौजूदा हालात को पिछले कई सालों में सबसे गंभीर संकट के रूप में देखा जा रहा है. बढ़ता जनआक्रोश, इंटरनेट ब्लैकआउट और सुरक्षा बलों की तैनाती यह संकेत दे रही है कि आने वाले घंटे ईरान के लिए बेहद निर्णायक हो सकते हैं.
अमेरिका के राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने ईरान को लेकर कड़ा बयान दिया है. उन्होंने कहा कि अगर प्रदर्शनकारियों की हत्या की गई तो अमेरिका कड़ा जवाब देगा. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि कुछ मौतें भगदड़ में हुई हैं.
बाद में लेकिन यह साफ किया गया है कि ईरान में किसी भगदड़ की नहीं हुई है.
इन प्रदर्शनों की शुरुआत ईरान के पूर्व शाह के बेटे रेज़ा पहलवी के आह्वान के बाद हुई. उनके समर्थन में उतरे लोग सड़कों पर ‘यह आखिरी लड़ाई है, पहलवी लौटेंगे’ और ‘लॉन्ग लिव द शाह’ जैसे नारे लगा रहे हैं.
तेहरान की सेंट्रल स्क्वायर आग की लपटों और नारों से घिरी हुई बताई जा रही है. प्रदर्शनकारियों ने ऐतिहासिक ‘लायन एंड सन’ झंडा लहराया, जिसे ईरान में राजशाही के प्रतीक के रूप में देखा जाता है.
राजधानी तेहरान में प्रदर्शन के दौरान हालात बेहद तनावपूर्ण हो गए हैं. ऐसे रिपोर्ट्स आए हैं कि प्रदर्शनकारियों पर गोलीबारी हुई है, जिससे स्थिती बेहद गंभीर हो गई है. हालात बिगड़ते देख ईरानी प्रशासन ने पूरे देश में इंटरनेट सेवा काट दी है.
इनपुट: सुमीत चौधरी