जासूसी के आरोप में 2 भारतीयों को ऑस्ट्रेलिया से निकाला गया था, ऑस्ट्रेलियाई मीडिया का दावा

एबीसी की रिपोर्ट में दावा किया गया है कि देश के डिफेंस प्रोजेक्ट्स और एयरपोर्ट सिक्योरिटी से जुड़े खुफिया दस्तावेज चुराते पकड़े जाने के बाद भारतीय जासूसों को ऑस्ट्रेलिया से निष्कासित किया गया. ये जासूस ऑस्ट्रेलिया के व्यापारिक संबंधों से जुड़ी खुफिया जानकारी भी चुरा रहे थे. 

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 ASIO Director-General Mike Burgess ASIO Director-General Mike Burgess

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 01 मई 2024,
  • अपडेटेड 8:19 AM IST

ऑस्ट्रेलिया ने 2020 में दो भारतीय जासूसों को देश से निष्कासित कर दिया था. इन पर देश की सुरक्षा से जुड़ी खुफिया जानकारी चुराने का आरोप था. आरोप था कि ये ऑस्ट्रेलिाय के खुफिया डिफेंस प्रोजेक्ट्स और एयरपोर्ट सिक्योरिटी से जुड़ी जानकारी चुराने की कोशिश कर रहे थे. 

द ऑस्ट्रेलियन और द सिडनी मॉर्निग हेराल्ड की रिपोर्ट्स में दावा किया गया है कि इस मामले में दो भारतीयों को देश से निष्कासित किया गया था. लेकिन भारत ने इन रिपोर्ट्स पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है. एबीसी की रिपोर्ट में दावा किया गया कि देश के डिफेंस प्रोजेक्ट्स और एयरपोर्ट सिक्योरिटी से जुड़े खुफिया दस्तावेज चुराते पकड़े जाने के बाद भारतीय जासूसों को ऑस्ट्रेलिया से निष्कासित किया गया. ये जासूस ऑस्ट्रेलिया के व्यापारिक संबंधों से जुड़ी खुफिया जानकारी भी चुरा रहे थे. 

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बता दें कि ऑस्ट्रेलिया सिक्योरिटी इंटेलिजेंस ऑर्गेनाइजेशन (एएसआईओ) ने 2020 में तथाकथित विदेशी जासूसों के ग्रुप का भंडाफोड़ किया था. ये जासूस ऑस्ट्रेलिया में रह रहे भारतीयों पर करीब से निगरानी भी रख रहे थे और देश के मौजूदा और पूर्व नेताओं के साथ अपने संबंध बनाने में जुटे थे. 

ऑस्ट्रेलिया के अखबारों में ये दावे वॉशिंगटन पोस्ट की उस रिपोर्ट के बाद हो रहे हैं, जिसमें कहा गया था कि पिछले साल अमेरिकी जमीं पर सिख चरमपंथी गुरपतवंत सिंह पन्नू की हत्या की साजिश रचने के आरोप में भारतीय खुफिया एजेंसी RAW के एक अधिकारी शामिल था. इस पर भारत ने मंगलवार को कहा था कि वॉशिंगटन पोस्ट ने इस तरह के गंभीर मामले पर अप्रमाणित आरोप लगाए हैं. 

वॉशिंगटन पोस्ट की रिपोर्ट में ये भी कहा गया था कि 2020 में RAW के दो अधिकारियों को भी 2020 में ऑस्ट्रेलिया से निष्कासित किया गया था. एबीसी की रिपोर्ट में कहा गया कि ASIO के महानिदेशक माइक बुर्गेस ने 2021 में पहली बार जासूसों के ग्रुप के भंडाफोड की बात स्वीकार की थी लेकिन उन्होंने उस समय ये नहीं बताया था कि इस गतिविधि के पीछे कौन सा देश है. 

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बुर्गेस ने अपनी रिपोर्ट में बताया था कि जासूसों ने चुन-चुनकर देश के नेताओं, एक विदेशी दूतावास और स्टेट पुलिस सर्विस के साथ करीबियां बढ़ाईं. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया में रह रहे विदेशी नागरिकों पर निगरानी रखी. उन्होंने ऑस्ट्रेलिया के व्यापारिक संबंधों को लेकर खुफिया जानकारी हासिल करने की कोशिश की.  

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