कार्बन उत्सर्जन में कटौती को लेकर बढ़ रहा दबाव, भारत की विकसित देशों को दो टूक

स्कॉटलैंड में संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP26) से पहले भारत ने विकसित देशों से एक महत्वपूर्ण अपील की है. भारत का कहना है कि विकसित देशों को अब कार्बन उत्सर्जन कम करना चाहिए ताकि विकासशील देश भी कार्बन ऊर्जा का लाभ उठाकर अपने आपको विकसित कर सकें. भारत के प्रतिनिधि पीयूष गोयल ने ये बात कही है. 

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पीएम मोदी फोटो क्रेडिट: रॉयटर्स पीएम मोदी फोटो क्रेडिट: रॉयटर्स

aajtak.in

  • नई दिल्ली ,
  • 01 नवंबर 2021,
  • अपडेटेड 1:04 PM IST
  • जलवायु परिवर्तन पर जी-20 देशों का सम्मेलन
  • भारत ने बताया अपना नजरिया

स्कॉटलैंड में शुरू हुए संयुक्त राष्ट्र जलवायु परिवर्तन सम्मेलन (COP26) से पहले भारत ने कार्बन उत्सर्जन में कमी को लेकर महत्वपूर्ण बयान दिया है. भारत ने कहा है कि पहले विकसित देशों को कार्बन उत्सर्जन कम करना चाहिए ताकि विकासशील देश भी कार्बन ऊर्जा का लाभ उठाकर अपने आपको विकसित कर सकें. COP 26 (कॉन्फ्रेंस ऑफ पार्टीज) सम्मेलन में भारत का प्रतिनिधित्व करने जा रहे केंद्रीय मंत्री पीयूष गोयल ने ये बयान दिया है. 

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पीयूष गोयल ने कहा कि जो देश ऊर्जा का भरपूर फायदा उठा चुके हैं, उन्हें अब तेजी से इसके उत्सर्जन में कटौती करनी चाहिए ताकि विकासशील देश भी कार्बन ऊर्जा का फायदा उठा सकें. विकासशील देशों के पास क्लीन एनर्जी को अवशोषित करने के लिए पर्याप्त तकनीक नहीं है. फिलहाल हमें ऐसी तकनीक और संसाधनों पर अधिक काम करने की जरूरत है. इसके बाद ही हम नेट जीरो के टारगेट को लेकर अपना साल घोषित कर सकते हैं. भारत विकासशील देशों के हितों के लिए जोर देता रहा है. पहली बार ऐसा हुआ है कि जी20 देशों ने क्लाइमेट चेंज के लक्ष्यों को प्राप्त करने के लिए खपत को एक महत्वपूर्ण कारक माना है.  

पीयूष गोयल से पहले शिखर सम्मेलन के अध्यक्ष आलोक शर्मा ने भी एक अहम बयान देते हुए कहा था कि ग्लोबल वार्मिंग को 1.5C तक सीमित रखने के लिए 'अंतिम और सबसे अच्छी उम्मीद' COP26 जलवायु सम्मेलन ही है. उद्घाटन समारोह के दौरान उन्होंने कहा था कि हम जानते हैं कि हमारी दुनिया के हालात बदतर होते जा रहे हैं. हम अभी से प्रयास करेंगे तो हम अपनी दुनिया को बचा सकते हैं. 

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भारत ने अब तक नहीं बताया नेट जीरो एमिशन का साल

बता दें कि जी-20 देश पूरी दुनिया के कार्बन उत्सर्जन में करीब 80 फीसदी का योगदान देते हैं, इसलिए संयुक्त राष्ट्र इन देशों से कार्बन उत्सर्जन में कटौती के लक्ष्यों का दृढतापूर्वक पालन चाहता है लेकिन अभी तक ऐसा संभव नहीं हो सका है.

चीन और अमेरिका के बाद दुनिया में ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन के मामले में भारत तीसरे नंबर पर है. अमेरिका, चीन, सऊदी अरब और ब्रिटेन समेत तमाम देश ग्रीन हाउस गैसों के उत्सर्जन में कटौती कर नेट जीरो कार्बन एमिशन के लक्ष्य तक पहुंचने की समयसीमा का ऐलान कर चुके हैं. हालांकि भारत ने अब तक ऐसा कोई ऐलान नहीं किया है. नेट जीरो कार्बन एमिशन का मतलब है कि सभी देश उतनी ही मात्रा में कार्बन उत्सर्जन करें जितना जंगल बढ़ाकर या फिर आधुनिक तकनीक से अवशोषित किया जा सके.

जी-20 के प्रमुख देशों ने जलवायु परिवर्तन के खतरों से बचने के लिए ग्लोबल वार्मिंग को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित करने के प्रमुख लक्ष्य के प्रति अपनी-अपनी प्रतिबद्धता जताई है. इस सम्मेलन के मेजबान ब्रिटेन के प्रधानमंत्री बोरिस जॉनसन भी एक बयान में कह चुके हैं कि अगर सीओपी-26 में कोई निश्चित हल नहीं निकलता है तो ये काफी खतरनाक साबित हो सकता है.

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भारत के पर्यावरण मंत्री भूपेंद्र यादव ने इसके अलावा क्लाइमेट इक्विटी मॉनीटर को लॉन्च किया है. यादव का कहना है कि ये मॉनीटर क्लाइमेट चेंज जैसे मुद्दे के लिए काफी फायदेमंद है. उन्होंने ट्वीट करते हुए लिखा कि वैज्ञानिक पहल, क्लाइमेट इक्विटी मॉनिटर का स्वागत कीजिए.  डेटा और साक्ष्य आधारित नजरिए से इक्विटी और क्लाइमेट एक्शन पर इसका फोकस क्लाइमेट चेंज जैसे महत्वपूर्ण मुद्दे पर चर्चा के लिए प्रोत्साहित करेगा और सभी देशों के विशेषज्ञों को भी शामिल होने का अवसर देगा. 

यादव ने इससे पहले कहा था कि ग्लासगो सम्मेलन की सफलता इस बात से तय होगी कि विकासशील देशों को उत्सर्जन में कटौती करने में मदद के लिए कितना फंड मिलता है. पर्यावरण मंत्री ने कहा कि भारत पेरिस कॉन्फ्रेंस, 2015 में निर्धारित लक्ष्य के करीब है और इसमें बदलाव के लिए भी तैयार है. भारत ने साल 2030 तक कार्बन उत्सर्जन में 33 से 35 फीसदी कटौती करने का संकल्प लिया था. साल 2016 तक भारत ने कार्बन उत्सर्जन में 24 फीसदी की कमी की है.

 

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