पिछले महीने इजरायल के हमले के बाद से दक्षिणी लेबनान में शांति स्थापना के लिए तैनात संयुक्त राष्ट्र के शांति मिशन (UNIFIL) पर कई बार हमले हो चुके हैं. भारत, जो UNIFIL का प्रमुख सदस्य देश है, ने दक्षिणी लेबनान में अपने 900 से अधिक सैनिकों की तैनाती की है, जिससे यह मिशन में दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन गया है. इन सैनिकों की सुरक्षा को लेकर भारत सहित अंतरराष्ट्रीय समुदाय में चिंता बढ़ गई है.
UNIFIL, जिसे संयुक्त राष्ट्र अंतरिम बल इन लेबनान के नाम से जाना जाता है, ने हाल के हफ्तों में कई हमलों की सूचना दी है, जिनमें कम से कम पांच शांति सैनिक घायल हुए हैं. कुछ हमलों का जिम्मा UNIFIL ने इजरायली रक्षा बलों (IDF) पर डालते हुए आरोप लगाया है कि ये हमले जानबूझकर किए गए थे. हालांकि, अब तक इन हमलों में कोई भी भारतीय सैनिक घायल नहीं हुआ है, फिर भी भारतीय सैनिकों की सुरक्षा को लेकर चिंता लगातार बनी हुई है.
भारतीय सैनिकों के जिम्मेदारी क्षेत्र की स्थिति
भारत के जिम्मेदारी क्षेत्र (Area of Responsibility - AoR) की स्थिति लेबनान के दक्षिण-पूर्वी हिस्से में है, जो शेबा फार्म्स और सीरिया की सीमा के पास स्थित है. यह क्षेत्र अब तक हमलों से सुरक्षित रहा है, लेकिन हाल के घटनाक्रम ने भारतीय सैनिकों के लिए संभावित खतरे को बढ़ा दिया है.
पिछले कुछ हफ्तों में हुए हमलों में मारौन एल रस का हमला, जो भारत के AoR से लगभग 25 किमी दूर है, सबसे निकटतम घटना थी. इजरायल ने इस क्षेत्र में कई नागरिकों को क्षेत्र खाली करने का आदेश दिया है, जो संभावित सैन्य कार्रवाई का संकेत देता है और हिजबुल्लाह के साथ संघर्ष की संभावना को बढ़ा देता है.
UNIFIL सैनिकों की आत्मरक्षा और चुनौतियां
UNIFIL के लिए आत्मरक्षा हमेशा से एक चुनौतीपूर्ण विषय रहा है. पिछले 10 अक्टूबर को, UNIFIL ने एक घटना की रिपोर्ट की, जिसमें IDF द्वारा एक UN परिसर पर हमले का जिक्र था. इसके बाद से सैनिकों की आत्मरक्षा के मुद्दे पर चिंता जताई जा रही है.
सेवानिवृत्त मेजर जनरल ए.के. बारदालाई, जो UNIFIL में उप मिशन प्रमुख और उप बल कमांडर के रूप में सेवा दे चुके हैं, ने इस बारे में इंडिया टुडे से बातचीत में कहा कि, “शांति सैनिकों के पास बल का उपयोग करने की अनुमति होती है, लेकिन यह बिल्कुल अनिवार्य स्थिति में ही किया जाता है, ताकि टकराव को टाला जा सके. किसी भी शांति मिशन का उद्देश्य हिंसा को कम करना होता है, इसलिए बल का प्रयोग एक अंतिम विकल्प के रूप में किया जाता है.”
UNIFIL का मंडेट और ब्लू लाइन की सुरक्षा
UNIFIL का मुख्य कार्य 120 किमी लंबी 'ब्लू लाइन' की निगरानी करना है, जो इजरायल और लेबनान के बीच एक अद्वितीय रेखा है. इस रेखा पर कई बार इजरायली और हिजबुल्लाह बलों के बीच झड़पें हुई हैं. UNIFIL ने हाल के हफ्तों में कई बार इस रेखा पर रॉकेट हमलों और तोप के गोलों की सूचना दी है.
यह ब्लू लाइन एक संयुक्त राष्ट्र द्वारा मान्यता प्राप्त सीमांकन रेखा है, जो इजरायल की दक्षिणी लेबनान से वापसी को इंगित करती है. यह एक आधिकारिक अंतरराष्ट्रीय सीमा नहीं है, लेकिन UNIFIL को इसके सुरक्षित संचालन की जिम्मेदारी सौंपी गई है.
भारतीय सैनिकों की सुरक्षा पर भारत का रुख
भारत ने अंतरराष्ट्रीय समुदाय के साथ मिलकर लेबनान में तैनात शांति सैनिकों की सुरक्षा को सर्वोपरि बताया है. संयुक्त राष्ट्र में भारतीय मिशन ने कहा कि "भारत ने UNIFIL के 34 अन्य सदस्य देशों के संयुक्त बयान के साथ अपनी पूरी एकजुटता दिखाई है." इस बयान में शांति सैनिकों की सुरक्षा और सुरक्षा की प्राथमिकता पर जोर दिया गया है और इसे संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद (UNSC) के संबंधित प्रस्तावों के तहत सुनिश्चित करने की मांग की गई है.
भारतीय मिशन ने यह भी स्पष्ट किया कि UNIFIL में भारतीय सैनिक केवल शांति स्थापना में ही नहीं, बल्कि लेबनानी सेना के साथ मिलकर 17% संयुक्त गतिविधियों में भी सक्रिय भूमिका निभा रहे हैं.
बिदिशा साहा / शुभम तिवारी