भारत-अमेरिका संबंधों को पर्सनल केमिस्ट्री से आगे बढ़ाने की जरूरत, डिप्लोमेसी पर बोले फरीद जकारिया

फरीद जकारिया ने कहा कि भारत-अमेरिका के रिश्ते व्यक्तित्वों से परे जाकर संरचनात्मक और रणनीतिक साझेदारी पर बनने चाहिए. उन्होंने व्यापार, टैरिफ और वीजा जैसे मुद्दों पर कूटनीतिक तरीके से हल निकालने की बात कही.

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वरिष्ठ पत्रकार और भू-राजनीतिक विश्लेषक फरीद जकारिया स्विट्जरलैंड के दावोस में World Economic Forum (WEF) में. वरिष्ठ पत्रकार और भू-राजनीतिक विश्लेषक फरीद जकारिया स्विट्जरलैंड के दावोस में World Economic Forum (WEF) में.

aajtak.in

  • दावोस, स्विट्जरलैंड ,
  • 24 जनवरी 2025,
  • अपडेटेड 12:30 PM IST

वरिष्ठ पत्रकार और भू-राजनीतिक विशेषज्ञ फरीद जकारिया ने कहा कि भारत और अमेरिका के रिश्ते अब व्यक्तिगत नेताओं तक सीमित नहीं रहने चाहिए. उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के नेतृत्व में इन संबंधों को संरचनात्मक और रणनीतिक साझेदारी के रूप में विकसित किया जाना चाहिए.  

दावोस में गुरुवार को आजतक से बातचीत करते हुए फरीद जकारिया ने कहा, 'भारत और अमेरिका का रिश्ता अब व्यक्तित्वों से आगे बढ़ चुका है. इसे दोनों देशों द्वारा संरचनात्मक और रणनीतिक साझेदारी की ओर बढ़ाना जाना चाहिए. दोनों देश अगर सहयोग को और गहरा करते हैं तो इससे बहुत लाभ होगा. हालांकि वीजा और टैरिफ जैसे मुद्दे होंगे, लेकिन इन्हें कूटनीतिक तरीके से सुलझाया जाना चाहिए. ट्रंप का नजरिया एक मजबूत भू-राजनीतिक गठजोड़ बनाने का है.'  

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भारत को खोलने होंगे व्यापारिक दरवाजे  

फरीद जकारिया ने भारत की आर्थिक नीतियों को लेकर भी अपने विचार साझा किए. उन्होंने कहा कि भारत एक संरक्षणवादी देश है और इस कारण तेजी से विकास नहीं कर पा रहा है.

उन्होंने कहा, 'भारत में मैन्युफैक्चरिंग तेजी से आगे नहीं बढ़ पा रही है क्योंकि यहां उच्च टैरिफ के कारण लागत बहुत ज्यादा हो जाती है. जो उत्पाद भारत में बनाए जा रहे हैं, उनमें से कई केवल असेंबलिंग का काम हैं. अगर ट्रंप का दबाव भारत को अपने व्यापारिक दरवाजे खोलने के लिए मजबूर करता है, तो यह भारत के लिए अच्छा रहेगा.'  

मोदी और ट्रंप के नेतृत्व में समानताएं और अंतर
  
जकारिया ने प्रधानमंत्री मोदी और राष्ट्रपति ट्रंप के नेतृत्व की शैली की तुलना करते हुए बताया कि दोनों ने खुद को बाहरी और पहले से चली आ रही व्यवस्था-विरोधी नेता के रूप में स्थापित किया है.

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उन्होंने कहा, 'डोनाल्ड ट्रंप और नरेंद्र मोदी में मुख्य समानता यह है कि दोनों ने खुद को व्यवस्था-विरोधी, बाहरी और एक परिवर्तन लाने वाले नेता के रूप में पेश किया है. मोदी ने लंबे समय तक सत्ता में रहने के बावजूद अपनी यह छवि बनाए रखी है. ट्रंप अपने दूसरे कार्यकाल में भी खुद को ऐसा ही पेश कर रहे हैं. मोदी नीतियों पर बहुत गहराई से ध्यान देते हैं और काफी विश्लेषण के बाद फैसले लेते हैं, जबकि ट्रंप का रवैया अधिक सहज और तुरंत बदलने वाला होता है.'  

फरीद जकारिया के इन विचारों से यह साफ है कि भारत-अमेरिका के रिश्ते अब केवल नेताओं की छवि पर निर्भर नहीं रह सकते. व्यापारिक और कूटनीतिक स्तर पर ठोस कदम उठाने की जरूरत है, ताकि यह रिश्ता पहले से अधिक मजबूत और एक स्थायी साझेदारी का रूप ले सके.

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