अपनी भारतीय पत्नी के लिए विपक्ष से लड़ गए ब्रिटिश वित्त मंत्री, ससुर नारायण मूर्ति की जमकर की तारीफ

टैक्स विवाद को लेकर ऋषि सुनक ने कहा है कि उनकी पत्नी भारत की हैं और उन्होंने अपने नॉन डॉमिसाइल स्टेटस का इस्तेमाल टैक्स बचाने के लिए नहीं किया. उन्होंने कहा कि उनकी पत्नी ब्रिटेन में जितना कमाती हैं, उस पर कानून के हिसाब से पूरा कर देती हैं.

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ऋषि सुनक की पत्नी टैक्स बचाने के आरोपों से घिरी हैं (Photo- Getty Images) ऋषि सुनक की पत्नी टैक्स बचाने के आरोपों से घिरी हैं (Photo- Getty Images)

aajtak.in

  • नई दिल्ली,
  • 08 अप्रैल 2022,
  • अपडेटेड 6:45 PM IST
  • पत्नी को लेकर लगे आरोपों पर बोले ऋषि सुनक
  • पत्नी का किया बचाव
  • कहा- वो भारत की नागरिक है, अपने देश से प्यार करती है

ब्रिटेन के वित्त मंत्री भारतीय मूल के ऋषि सुनक की पत्नी अक्षता सुनक को ब्रिटेन में नॉन डॉमिसाइल टैक्स स्टेटस को लेकर विपक्ष का निशाना बनना पड़ा है. दरअसल, वो भारत की नागरिक हैं और ब्रिटेन के कानून के अनुसार वो ब्रिटेन में कर देने के लिए बाध्य नहीं हैं. इसी बात को लेकर विपक्षी लेबर पार्टी ने ऋषि सुनक को घेरने की कोशिश की है. विपक्ष का कहना है कि नॉन डॉमिसाइल स्टेटस का फायदा उठाकर ऋषि सुनक का परिवार लाखों का टैक्स बचा रहा है. अब खुद ऋषि सुनक ने सामने आकर विपक्ष के सवालों का जवाब दिया है.

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सुनक ने कहा है कि अक्षता सुनक अपने देश भारत से प्यार करती हैं और वो अंततः अपने परिवार की देखभाल के लिए भारत लौट जाएंगी.

ब्रिटेन के द सन अखबार से बात करते हुए कहा, 'उनके पास ये स्टेटस तब भी था जब हम मिले नहीं थे...जब वो इस देश में आकर रहने लगीं, उससे पहले भी उनके पास यही स्टेटस था. उन्होंने मुझसे शादी की है महज इसलिए मैं उनसे ये नहीं कह सकता कि वो अपने देश से संबंध तोड़ लें. वो अपने देश से प्यार करती हैं. जिस तरह से मैं अपने देश से प्यार करता हूं और कभी सपने में भी ब्रिटिश नागरिकता छोड़ने की नहीं छोड़ सकता, उसी तरह मुझे लगता है कि अधिकतर लोग अपने देश की नागरिकता नहीं छोड़ना चाहेंगे.'

अक्षता पर लगे आरोपों का जवाब उनकी एक प्रवक्ता की तरफ से भी आया था. अक्षता की तरफ से प्रवक्ता ने कहा कि वो ब्रिटेन के कर कानूनों का पालन करती हैं और ब्रिटेन में अपनी कमाई पर टैक्स देती हैं. वो भारत की नागरिक हैं इसलिए विदेशों से अपनी कमाई पर ब्रिटेन में उन्हें कोई कर नहीं देना पड़ता.

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'मुझे अपने ससुर पर गर्व है'

सॉफ्टवेयर कंपनी इंफोसिस के संस्थापक नारायण मूर्ति की बेटी अक्षता मूर्ति के पास इंफोसिस की 0.9 फीसद की हिस्सेदारी है. अपने ससुर नारायण मूर्ति की तारीफ करते हुए ऋषि सुनक ने कहा कि उन्होंने फर्श से अर्श तक का सफर तय किया है और मुझे उन पर गर्व है.

सुनक ने कहा, 'ये मेरे ससुर को बदनाम करने की कोशिश है, जिन पर मुझे बहुत गर्व है. जिसके पास कुछ नहीं था, उस आदमी ने एक बड़ा साम्राज्य खड़ा कर दिया. मुझे लगता है कि उनकी कंपनी दुनिया भर के ढाई लाख लोगों को रोजगार देती है... उन्होंने भारत का चेहरा बदल दिया. मेरे ससुर ने अपने जीवन में जो हासिल किया, अगर मैं उसका दसवां हिस्सा भी हासिल कर पाऊं तो खुद को एक खुशनसीब इंसान समझूंगा. उन पर मुझे वास्तव में गर्व है.'

ऋषि ने हालांकि ये जरूर कहा कि ब्रिटेन में कुछ अमीर लोग अपने नॉन डॉमिसाइल स्टेटस का इस्तेमाल कर टैक्स बचाते हैं लेकिन उनके परिवार के साथ ऐसा नहीं है. उनकी पत्नी ब्रिटेन की नागरिक नहीं हैं बल्कि उनके पास भारत की नागरिकता है.

'पत्नी ने नहीं तोड़ा कोई नियम'

उन्होंने जोर देकर कहा कि उनकी पत्नी ने ब्रिटेन का कोई नियम नहीं तोड़ा है. वो भारत की नागरिक हैं और अंततः अपने माता-पिता की देखभाल के लिए वहीं जाकर रहना चाहती हैं. वो ब्रिटेन में अपनी कमाई पर टैक्स देती हैं और विदेशों की कमाई का टैक्स विदेशों में भरती हैं.

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उन्होंने कहा, "ब्रिटेन में वो जितना पैसा कमाती हैं, हरेक पैसे पर टैक्स का भुगतान करती हैं. जो पैसा वो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर, उदाहरण के लिए भारत में कमाती हैं, उस पर भी वो पूरा टैक्स चुकाती हैं.'

ऋषि सुनक ने कहा कि अगर अक्षता सुनक की उनसे शादी नहीं हुई होती तो ये विवाद खड़ा ही नहीं किया जाता. ये विवाद जानबूझकर खड़ा किया जा रहा है.

ऋषि सुनक कुछ समय पहले भी पत्नी को लेकर सवालों के घेरे में थे. रूस पर प्रतिबंधों के बावजूद इंफोसिस का कारोबार रूस में जारी है जिसे लेकर ऋषि से सवाल किया गया कि उनका परिवार अप्रत्यक्ष रूप से रूस की वित्तीय मदद कर रहा है. जवाब में उन्होंने कहा था कि वो इंफोसिस के मालिक नहीं हैं और न ही उनकी पत्नी कोई चुनी हुई नेता हैं. उन्होंने कहा था कि वो इंफोसिस के कारोबार के लिए जिम्मेदार नहीं हैं.

ऋषि सुनक को बनाया जा रहा निशाना?

इसी बीच द टाइम्स अखबार ने बताया है कि सुनक और उनके सहयोगियों का मानना है कि ऐसे आरोपों से उन्हें राजनीति का शिकार बनाकर उनके करियर को नुकसान पहुंचाने की कोशिश हो रही है.

अखबार ने दावा किया कि ऋषि के कुछ सहयोगियों का मानना है कि ये सब प्रधानमंत्री कार्यालय से हो रहा है क्योंकि ऋषि और ब्रिटेन के पीएम बोरिस जॉनसन के बीच नीतियों को लेकर मतभेद रहा है. लेकिन प्रधानमंत्री कार्यालय ने इन दावों को खारिज कर दिया है. कार्यालय की तरफ से कहा गया है कि ये दावे झूठ और आधारहीन हैं. 

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