आसिया बीबी के वकील को जान का खतरा, छोड़ा पाकिस्तान, सरकार से मांगी सुरक्षा

पाकिस्तान की सुप्रीम कोर्ट ने हाल ही में ईशनिंदा मामले में ईसाई महिला आसिया बीबी को रिहा कर दिया है. लेकिन इसके बाद पाकिस्तान के कई शहरों में कोर्ट के इस फैसले के खिलाफ विरोध प्रदर्शन किया जा रहा था.

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आसिया बीबी (इंडिया टुडे आर्काइव) आसिया बीबी (इंडिया टुडे आर्काइव)

सना जैदी

  • इस्लामाबाद,
  • 03 नवंबर 2018,
  • अपडेटेड 8:42 PM IST

पाकिस्तान में ईशनिंदा के मामले में बरी की गई आसिया बीबी के वकील ने अपनी जान के खतरे के डर से शनिवार तड़के पाकिस्तान छोड़ दिया है. उन्होंने सरकार से अपने परिवार की सुरक्षा करने का आग्रह भी किया है.

एक्सप्रेस ट्रिब्यून की एक रिपोर्ट के अनुसार उसके वकील सैफुल मलूक ने दावा किया है कि वकीलों के समूह से जान से मारने की धमकी दी है. उन्हें अपनी जान का खतरा है और ऐसे हालातों में उनके लिए प्रैक्टिस करना मुश्किल हो रहा है.

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हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि अगर उन्हें सुरक्षा दी जाती है तो वह समीक्षा याचिका की सुनवाई के दौरान अपनी मुवक्किल की पैरवी करने के लिए पाकिस्तान वापस आएंगे. मलूक ने कहा, मेरा परिवार भी खतरे का सामना कर रहा है, सरकार को उन्हें सुरक्षा देनी चाहिए.

इस बीच मामले के शिकायतकर्ता कारी मोहम्मद सलाम ने कोर्ट से आसिया बीबी को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ दायर समीक्षा याचिका की जल्द सुनवाई करने का अनुरोध किया है. गौरतलब है कि पाकिस्तान में ईसाई महिला आसिया को बरी किए जाने के फैसले के खिलाफ सैकड़ों कट्टरपंथियों के नेतृत्व में कुछ दिनों से हो रहे विरोध प्रदर्शनों के रुकने के बाद शनिवार को स्थिति सामान्य हो गई है. समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक सरकार के साथ हुए समझौते के बाद मामला शांत हो गया है.

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बता दें कि आसिया बीबी (47) को पड़ोसियों से झगड़े के बाद इस्लाम की निंदा के लिए 2010 में सजा सुनाई गई थी. हालांकि वह खुद को बेकसूर बताती रही, लेकिन पिछले आठ साल में ज्यादातर वक्त कारावास में बिताया.

पाकिस्तान के सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद 31 अक्टूबर को पूर देश में प्रदर्शन शुरू हो गया था. इस्लामी राजनीतिक पार्टी तहरीक-ए-लबैक (TLP) पाकिस्तान और अन्य समूहों की अगुवाई में प्रदर्शनकारियों ने सड़कों पर जाम लगाया था.

विरोध प्रदर्शन को वापस लेने से पहले तहरीक-ए-लबैक के प्रमुख खादिम हुसैन रिजवी ने अपने अनुयायियों से कहा, मैं उन सभी मुस्लिमों का आभारी हूं जिन्होंने पैगंबर मोहम्मद के प्रति सम्मान सुनिश्चित करने के लिए अपनी भूमिका निभाई है.  हालांकि उन्होंने लोगों से स्थिति के मद्देनजर किसी भी गैरजरूरी यात्रा से बचने के लिए कहा है.

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