अफगानिस्तान में तालिबान के जुल्म के खिलाफ अकेली लड़ रही 18 साल की ये लड़की कौन है?

अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से ज्यादातर एक्टविस्ट्स की गिरफ्तारी हो गई है. इसके बाद से महिलाओं के विरोध प्रदर्शन काफी रेयर हो गए हैं. अफगानिस्तान में प्रदर्शन करने पर गिरफ्तारी हो जाती है या उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है. इसके बावजूद मारवा इन सब चीजों से डरे बिना तालिबान के विरोध में खड़ी हुईं.

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मारवा तालिबान के फैसले का अकेले विरोध करने पहुंचीं (फोटो- AFP) मारवा तालिबान के फैसले का अकेले विरोध करने पहुंचीं (फोटो- AFP)

aajtak.in

  • काबुल,
  • 28 दिसंबर 2022,
  • अपडेटेड 10:14 AM IST

अफगानिस्तान में तालिबान ने महिलाओं के यूनिवर्सिटी जाने पर पाबंदी लगा दी है. तालिबान के अत्याचारों के डर से इस फैसले का छिटफुट विरोध हो रहा है. इन सबके बीच अफगानिस्तान की 18 साल की लड़की चर्चा में है, जो बिना डरे तालिबान के इस फैसले का विरोध कर रही है. इतना ही नहीं अफगानिस्तान की यह स्टूडेंट अकेले ही हाथ में पोस्टर लेकर तालिबान के खिलाफ विरोध करने निकल पड़ी. 

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समाचार एजेंसी एएफपी से बातचीत में मारवा ने कहा, जिंदगी में पहली बार मैं गौरवान्वित, मजबूत और शक्तिशाली महसूस कर रही हूं. क्यों कि मैं उनके खिलाफ खड़ी हूं और अपने उन अधिकारों की मांग कर रही हूं जो मुझे अल्लाह ने दिए हैं. मारवा को कुछ महीनों में ही यूनिवर्सिटी में एडमिशन लेना था. अगर वे यूनिवर्सिटी में दाखिला ले लेती, तो ऐसा करने वाली परिवार की पहली महिला होतीं. 

अफगानिस्तान में तालिबान के सत्ता में आने के बाद से ज्यादातर एक्टविस्ट्स की गिरफ्तारी हो गई है. इसके बाद से महिलाओं के विरोध प्रदर्शन काफी रेयर हो गए हैं. अफगानिस्तान में प्रदर्शन करने पर गिरफ्तारी हो जाती है या उत्पीड़न का शिकार होना पड़ता है. इसके बावजूद मारवा इन सब चीजों से डरे बिना तालिबान के विरोध में खड़ी हुईं. मारवा ने काबुल यूनिवर्सिटी कैंपस के पास हाथ में पोस्टर लेकर शांतिपूर्ण तरीके से तालिबान के इस फैसले के खिलाफ अपना विरोध जताया. इस दौरान उनकी बहन ने उनका वीडियो भी बनाया. 

 

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अफगानिस्तान में महिलाओं की यूनिवर्सिटी में एंट्री पर बैन (फोटो- रॉयटर्स)

तालिबान ने महिला अधिकारों पर हमला करते हुए पिछले हफ्ते ही यूनिवर्सिटी शिक्षा पर प्रतिबंध लगा दिया है. इसे लेकर दुनियाभर से प्रतिक्रिया भी आई है. अफगानिस्तान में भी कुछ महिलाओं ने विरोध प्रदर्शन करने की कोशिश की, लेकिन तालिबान ने उन्हें प्रदर्शन नहीं करने दिया. 

काबुल यूनिवर्सिटी के बाहर रविवार को बड़ी संख्या में तालिबान गार्ड्स तैनात किए गए. मारवा ने अपने हाथ में जो पोस्टर ले रखा था, उसमें लिखा था Iqra. इसका हिंदी में अर्थ- अध्ययन या पढ़ना होता है. मारवा ने कहा कि हमारे साथ बहुत बुरा हुआ. लेकिन हम शांत रहे. लेकिन मैं अकेली अफगान लड़की की ताकत दिखाना चाहती थी कि वह भी उत्पीड़न के खिलाफ खड़ी हो सकती है. मारवा कहती हैं कि जब दूसरी मेरी बहनें (छात्राएं) देखेंगी कि एक अकेली लड़की तालिबान के खिलाफ खड़ी हो सकती है, तो इससे उन्हें भी आवाज उठाने की ताकत मिलेगी और वे तालिबान को हराएंगी. 

अफगानिस्तान में पिछले साल अगस्त में तालिबान सत्ता में आई थी. तालिबान ने वादा किया था वे नरम शासन करेंगे. लेकिन उन्होंने सत्ता में आने के बाद महिलाओं पर कठोर प्रतिबंध लगाए हैं. इससे पहले शनिवार को ही तालिबान प्रशासन ने सभी सहयोगी संगठनों से कहा है कि वे महिलाओं को काम पर आने से रोकें. 

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इतना ही नहीं अफगानिस्तान में एक साल से लड़कियों के सेकेंडरी स्कूल बंद हैं. वहीं कई महिलाएं अपनी सरकारी नौकरी खो चुकी हैं उन्हें घर पर रहने के लिए वेतन का एक हिस्सा दिया जा रहा है. इतना ही नहीं महिलाओं के पार्क, जिम और पूल में जाने पर पाबंदी लगा दी गई है. तालिबान का कहना है कि ये प्रतिबंध इसलिए लगाए गए हैं, क्योंकि महिलाएं सख्त इस्लामिक ड्रेस कोड का पालन नहीं कर रही हैं, जिसमें हिजाब पहनना भी शामिल है. 
 


 

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