पिछले कई दिनों से केपटाउन शहर में पानी की किल्लत ज्यादा बढ़ गई है. लोगों को जरूरत भर पानी भी मयस्सर नहीं हो पा रहा है. घंटों कतारों में खड़े होने के बाद भी लोगों को पानी नहीं मिल पा रहा है.
पानी को लोग कितना तरस रहे हैं, इसका अंदाजा इस बात से भी लगाया जा सकता है कि पानी लेने के लिए लोग रात के वक्त भी लाइनों में खड़े नजर आ रहे हैं.
देश के दूसरे सबसे ज्यादा आबादी वाले इस शहर की कुल जनसंख्या करीब साढ़े 4 लाख है. बावजूद इसके पानी की सप्लाई नहीं हो पा रही है. बुजुर्गों से लेकर महिला और बच्चे सभी पानी हासिल करने के लिए दिन-रात कतारों में खड़े नजर आ रहे हैं.
पानी संकट के बीच अफरा-तफरी का माहौल न बने, इसके लिए सुरक्षा के इंतजाम भी किए गए हैं. सार्वजनिक स्थानों पर दी जा रही पानी सप्लाई के दौरान सुरक्षाकर्मी भी तैनात किए गए हैं.
पानी के लिए इमरजेंसी जैसे हालात हो गए हैं. इलाके के सभी बड़े बांध लगभग सूख चुके हैं. ऐसे में प्रशासनिक लोग आसपास जमा बचे हुए पानी को भरकर सप्लाई करने में जुटे हैं.
दरअसल, केपटाउन में थीवाटरक्लूफ नाम के सबसे बड़े बांध से पानी की सप्लाई होती है. शहर में करीब 40 फीसदी पानी सप्लाई इसी बांध से होती है. लेकिन बारिश न होने के चलते बांध सूख गया है और पानी का संकट पैदा हो गया है. आलम ये हो गया है कि बूंद-बूंद भरकर पानी सप्लाई की जा रही है.
पिछले तीन साल से केपटाउन में सूखा पड़ा हुआ है. बारिश न होने के चलते पानी खत्म होने की कगार पर पहुंच गया है. हालात, Day Zero तक आ गए हैं.
Day Zero यानी जिस दिन पानी मिलना बिल्कुल बंद हो जाएगा. आशंका है, इसी साल अप्रैल में केपटाउन की पानी सप्लाई पूरे तरीके से बंद हो जाएगी.
ये हालात तब हैं, जबकि पूरा शहर समुद्र से घिरा है. लेकिन ये पानी इस्तेमाल करने लायक नहीं है और न ही इसे पीने लायक बनाया गया है. हालांकि, अब सरकार जल्द से जल्द पानी साफ करने के लिए ट्रीटमेंट प्लांट्स लगाने की तैयारी कर रही है. लेकिन, अगर आने वाले दिनों में शहर में बारिश नहीं हुई तो हालात बद से बदतर हो जाएंगे.