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मलाला का नाम पूछकर मारी थी गोली, 5 घंटे चला था ब्रेन का ऑपरेशन

सना जैदी
  • 29 मार्च 2018,
  • अपडेटेड 11:58 AM IST
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नोबेल शांति पुरस्कार विजेता मलाला यूसुफजई तालिबानी आतंकियों द्वारा किए गए हमले के बाद गुरुवार को पहली बार पाकिस्तान पहुंची हैं. वर्ष 2012 में लड़कियों की शिक्षा की वकालत करने पर तालिबानी आतंकवादियों ने उनके सिर पर गोली मार दी थी.

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साल 2007 से मई 2009 तक स्वात घाटी में तालिबानियों ने खूब आतंक मचा रखा था. तालिबान आतंकियों के डर से लड़कियों ने स्कूल जाना बंद कर दिया था. साल के अंत तक वहां करीब 400 स्कूल बंद करा दिए गए. मलाला तब आठवीं की छात्रा थीं. मलाला ने तभी से लड़कियों की पढ़ाई के लिए आवाज उठानी शुरू कर दी थी.

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9 अक्टूबर 2012 को तालिबानी आतंकी उस बस पर सवार हो गए, जिसमें मलाला अपने साथियों के साथ स्कूल जाती थीं. उनमें से एक ने बस में पूछा, ‘मलाला कौन है?’ सभी खामोश रहे लेकिन उनकी निगाह मलाला की ओर घूम गईं. इससे आतंकियों को पता चल गया कि मलाला कौन है. उन्होंने मलाला पर गोली चलाई जो उसके सिर में जा लगी.

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मलाला पर यह हमला खैबर पख्तूनख्वा प्रांत के स्वात घाटी में किया था. पाकिस्तान में डॉक्टरों ने मलाला के सिर से गोली तो निकाल दी लेकिन गंभीर रूप से घायल मलाला को इलाज के लिए ब्रिटेन ले जाया गया. जहां उन्हें क्वीन एलिजाबेथ अस्पताल में भर्ती कराया गया. मलाला के ब्रेन का ऑपरेशन 5 घंटे तक हुआ था.

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मलाला तालिबानी हमले को मात देकर दुनिया के सामने महिलाओं की आवाज को बुलंद करने वाली आवाज बनकर उभरीं.

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मलाला को साल 2013 में भी नोबेल शांति पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया था. 2013 में मलाला को यूरोपीय यूनियन का प्रतिष्ठित शैखरोव मानवाधिकार पुरस्कार भी मिला.

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2014 में मलाला को शांति का नोबेल पुरस्कार मिला. मलाला 17 साल की उम्र में नोबेल पाने वाली सबसे युवा पुरस्‍कार विजेता हैं.

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पिछले साल कनाडा के दौरे पर मलाला को देश की संसद को संबोधित करने का अवसर मिला था.

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