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विश्व

भारत-पाक के बीच अगर हुई जंग तो जानें कौन है कितना ताकतवर

प्रज्ञा बाजपेयी
  • 22 फरवरी 2019,
  • अपडेटेड 2:15 PM IST
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जम्मू-कश्मीर के पुलवामा में हुए आतंकी हमले में 40 CRPF जवानों की शहादत के बाद पूरा देश पाकिस्तान से बदले की मांग कर रहा है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा है कि वह इस कायराना हमले का माकूल जवाब देंगे. वहीं, पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान ने भी चेतावनी देते हुए कहा कि अगर भारत पाकिस्तान पर हमला करता है तो वो भी चुप नहीं बैठेगा.

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भारत और पाकिस्तान 1947 में आजादी के बाद कश्मीर के मुद्दे पर दो जंग लड़ चुके हैं. आइए जानते हैं भारत की सेना के आगे पाकिस्तान कहां टिकता है और अगर जंग होती है तो किसे कितना नुकसान पहुंचेगा.

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सैन्य बजट-
2018 में भारत ने 58 अरब डॉलर या जीडीपी का 2.1 फीसदी सैन्य बजट के लिए आवंटित किया था. इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर स्ट्रैटेजिक स्टडीज (IISS) के मुताबिक, भारत के पास 14 लाख सैनिक हैं.

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पिछले साल पाकिस्तान ने 11 अरब डॉलर या जीडीपी का 3.6 फीसदी अपनी 6.5 लाख सैनिकों वाली फौज के लिए आवंटित किया था. 2018 में पाकिस्तान को 100 मिलियन डॉलर की विदेशी सैन्य मदद भी मिली थी.

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स्टॉकहोम इंटरनेशनल पीस रिसर्च इंस्ट्टीट्यूट (SIPRI) के मुताबिक, 1993 से लेकर 2006 के बीच पाकिस्तान ने अपने सालाना सरकारी खर्च का करीब 20 फीसदी सेना पर खर्च किया. वहीं, 2017 में पाकिस्तान ने कुल सरकारी खर्च का 16.7 फीसदी सेना पर खर्च किया.


SIPRI के मुताबिक, भारत का सैन्य खर्च 1993 से 2006 के बीच सरकारी खर्च का 12 फीसदी था. 2017 में यह 9.1 फीसदी था.

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मिसाइल्स और न्यूक्लियर हथियार-

दोनों देश परमाणु हथियार संपन्न देश हैं. भारत के पास 9 तरह के ऑपरेशनल मिसाइल्स हैं जिसमें अग्नि-3 (3000-5000 किमी रेंज वाली) भी शामिल है.

CSIS के मुताबिक, चीनी मदद की बदौलत पाकिस्तान के मिसाइल प्रोग्राम में छोटी और मध्यम दूरी के हथियार हैं जो भारत के किसी भी हिस्से तक पहुंचने में सक्षम हैं. शाहीन-2 पाकिस्तान की सबसे ज्यादा रेंज (2000 किमी) वाली मिसाइल है.

SIPRI के मुताबिक, पाकिस्तान के पास 140 से 150 परमाणु बम हैं जबकि भारत के पास 130-140 परमाणु बम हैं.

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सेनाओं में कौन कहां?

IISS के मुताबिक, भारत के पास 14 लाख सैनिक हैं. इसके अलावा भारत के पास 3563 युद्ध टैंक, 3100 इन्फैंट्री लड़ाकू वाहन, 336 सशस्त्र पर्सनल कैरियर्स और 9719 तोप हैं.


पाकिस्तान की आर्मी में केवल 5.6 लाख सैनिक हैं जिनके पास 2496 टैंक, 1605 सशस्त्र पर्सनल कैरियर्स, 4,472 तोप हैं.

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वायु सेना-
भारत के पास 814 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हैं. भारत की वायु सेना का संख्या बल (127,200) काफी मजबूत है लेकिन फाइटर जेट को लेकर चिंता हो सकती है.

चीन और पाकिस्तान के खिलाफ दोतरफे हमले से बचाव के लिए भारत को 42 स्क्वैड्रन्स जेट, 750 एयरक्राफ्ट की जरूरत है. अधिकारियों के मुताबिक 2032 तक भारत के पास 22 स्क्वैड्रन्स होंगे.

IISS के मुताबिक, पाकिस्तान के पास 425 कॉम्बैट एयरक्राफ्ट हैं यानी भारत के मुकाबले आधे एयरक्राफ्ट ही हैं. जिसमें चीनी F-7PG और अमेरिकी F-16 फाइटिंग फैल्कन जेट्स भी शामिल हैं. पाकिस्तान के पास ऐसे एयरक्राफ्ट भी हैं जो हवाई खतरों के प्रति आगाह कर सकते हैं.

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नेवी की ताकत-

भारतीय नेवी के पास एक एयरक्राफ्ट कैरियर, 16 सबमरीन्स, 13 फ्रिगेट्स, 106 पैट्रोल और कोस्टल कॉम्बैट जहाज हैं. नेवी के पास 67,700 जवानों का दस्ता है जिसमें मरीन्स और नेवल एविएशन स्टाफ भी शामिल है.

पाकिस्तान की समुद्री सीमा छोटी है और इसके पास 9 फ्रिगेट्स, 8 सबमरीन्स, 17 पेट्रोल और कोस्टल जहाज हैं.

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अगर दोनों देशों के बीच जंग की स्थिति बनती है तो सेनाओं के बीच बड़ा संघर्ष होना तय है. भले ही पाकिस्तानी सेना का संख्याबल ठीक-ठाक हो लेकिन पाकिस्तान हथियारों के मामले में भारत के आगे कहीं नहीं टिकता.

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फिर भी पाकिस्तान को लगता है कि जब तक भारतीय सेना किसी अनुकूल मोर्चे तक पहुंचेगी, वह छोटे-छोटे हमले लॉन्च कर सकता है. इसके बावजूद पाकिस्तान और भारत की सेना के बीच बड़े फर्क की वजह से पाकिस्तान युद्ध जीतने लायक बड़ा हमला नहीं कर सकता है. नतीजतन पाकिस्तान अपनी आर्मी को मजबूत सहारा देने के लिए परमाणु हथियारों का ही सहारा लेगा.

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'कोल्ड स्टार्ट' के तहत अगर युद्ध की स्थिति पैदा होती है तो भारतीय सेना पश्चिमी सीमा पर कुछ दिनों के भीतर ही कूच कर जाएगी. यह नीति पाकिस्तान की तरफ से होने वाले किसी परमाणु हमले को रोकने के लिए बनाई गई थी. ऑपरेशन भारतीय सेना के तमाम समूहों की टुकड़ी मिलकर करेगी.

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दरअसल, 2002 में ऑपरेशन पराक्रम के बाद भारतीय सेना में कोल्ड स्टार्ट सिद्धांत को जगह मिलने लगी. 2002 में संसद पर हुए आतंकी हमले के बाद हुए भारत-पाकिस्तान संघर्ष के दौरान भारतीय सेना को इकठ्ठे होने और पाकिस्तानी सीमा पर तैनात करने में दो महीने लग गए थे. उसी के बाद से रक्षा विश्लेषकों ने एक नई नीति की जरूरत पर जोर दिया जिससे भारतीय सेना अपने पूरे सैन्यबल की तैनाती कुछ दिनों के भीतर ही कर सके.

कोल्ड स्टार्ट की नीति से भारतीय सेना आदेश जारी होने के 48 घंटों के भीतर हमलों को अंजाम देने की स्थिति में आकर पाकिस्तानियों को हैरान कर सकती है.

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