पत्नी है तो क्या हुआ..., गड़बड़ी पर BLO पति ने बीवी को नींद से उठाकर थमाया चुनाव आयोग का नोटिस

पूर्वी बर्दवान में SIR प्रक्रिया के दौरान एक अनोखा मामला सामने आया है. कटवा के बीएलओ देबाशंकर चट्टोपाध्याय ने मतदाता सूची में विसंगति मिलने पर अपनी पत्नी को भी सुनवाई का नोटिस थमा दिया. खास बात यह रही कि उन्होंने खुद को भी नोटिस जारी किया. नियमों के पालन में रिश्तों को दरकिनार करने का यह मामला चर्चा में है.

Advertisement
 गड़बड़ी पर BLO पति ने बीवी को थमाया नोटिस (Photo: itg) गड़बड़ी पर BLO पति ने बीवी को थमाया नोटिस (Photo: itg)

सुजाता मेहरा

  • बर्दवान,
  • 15 जनवरी 2026,
  • अपडेटेड 12:06 PM IST

देशभर में मतदाता सूची की शुद्धता सुनिश्चित करने के लिए चुनाव आयोग द्वारा SIR यानी स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन (Special Intensive Revision) की प्रक्रिया जारी है. इस काम के लिए जगह- जगह बीएलओ को काम नियुक्त किए गए हैं. पश्चिम बंगाल के पूर्वी बर्दवान जिले से SIR प्रक्रिया के दौरान सामने आया एक अनोखा मामला इन दिनों चर्चा में है, जहां एक बीएलओ ने नियमों के पालन में पत्नी को भी कोई छूट नहीं दी.

Advertisement

SIR के दौरान डॉक्युमेंट में गड़बड़ी

यह घटना कटवा शहर की है. केतुग्राम के भोमरकोल प्राइमरी स्कूल में कार्यरत शिक्षक और बूथ लेवल ऑफिसर (BLO) देबाशंकर चट्टोपाध्याय कटवा के बूथ संख्या 165 के लिए नियुक्त हैं. SIR के दौरान जब मतदाता सूची का सत्यापन किया गया, तो देबाशंकर और उनकी पत्नी अनिंदिता चौधरी के दस्तावेजों में कुछ 'तार्किक विसंगतियां' पाई गईं. चुनाव आयोग के ऐप पर जैसे ही नोटिस जारी हुआ, देबाशंकर ने बिना किसी संकोच के अपने दायित्व का पालन किया.

नींद से उठाकर थमाया नोटिस

दोपहर के समय जब अनिंदिता चौधरी घर में आराम कर रही थीं, तभी पति देबाशंकर उनके पास पहुंचे और उन्हें SIR सुनवाई का नोटिस थमा दिया. हैरानी की बात यह रही कि उन्होंने खुद को भी उसी नोटिस का पात्र बनाया. पत्नी यह देखकर कुछ पल के लिए अवाक रह गईं कि पति ने नियमों के आगे रिश्ते को आड़े नहीं आने दिया.

Advertisement

'कानून की नजर में सभी समान'

चुनाव आयोग ने देबाशंकर के पिता के नाम की वर्तनी में त्रुटि और उपनाम से जुड़ी विसंगति का संज्ञान लिया. हालांकि 2002 की मतदाता सूची में नाम की वर्तनी सही दर्ज थी, फिर भी प्रक्रिया के तहत नोटिस जारी किया गया. वहीं अनिंदिता चौधरी के मामले में उनके और उनके पिता की उम्र के बीच लगभग 50 वर्ष का अंतर दर्ज होने पर आपत्ति उठाई गई. अनिंदिता का मायका नदीया जिले के नकाशीपारा में है और उनके पिता का नाम अनिल चटर्जी है.

देबाशंकर चट्टोपाध्याय ने कहा, 'मैं बीएलओ हूं, लेकिन चुनाव आयोग के नियमों से ऊपर नहीं. कानून की नजर में सभी समान हैं, चाहे वह मेरा अपना परिवार ही क्यों न हो.' अब यह दंपति भी अन्य नागरिकों की तरह लाइन में खड़े होकर सुनवाई में शामिल होगा.

कटवा के उप-जिला गवर्नर अनिर्बान बोस ने भी स्पष्ट किया कि बीएलओ होने के बावजूद आयोग के नियम उनके और उनके परिवार पर समान रूप से लागू होते हैं. वहीं अनिंदिता ने भी पति के इस सख्त अनुशासन को सही ठहराते हुए कहा कि उन्होंने केवल अपने कर्तव्य का पालन किया है.

 

---- समाप्त ----

Read more!
Advertisement

RECOMMENDED

Advertisement