पश्चिम बंगाल उपचुनाव में जुदा हुई कांग्रेस-लेफ्ट की राह, वाम दलों ने पांच सीटों पर उतारे उम्मीदवार

पश्चिम बंगाल की छह विधानसभा सीटों के लिए उपचुनाव में कांग्रेस और वामदलों की राहें अलग हो गई हैं. लेफ्ट पार्टियों ने छह में से पांच सीटों पर उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. 2016 के विधानसभा चुनाव में पहली बार दोनों साथ आए थे और राज्य के चुनाव में तब से ही यह गठबंधन जारी था.

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सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी सोनिया गांधी, मल्लिकार्जुन खड़गे और राहुल गांधी

अनुपम मिश्रा

  • कोलकाता,
  • 22 अक्टूबर 2024,
  • अपडेटेड 11:18 AM IST

पश्चिम बंगाल की छह विधानसभा सीटों के लिए हो रहे उपचुनावों में दो पुराने सहयोगियों कांग्रेस और लेफ्ट फ्रंट की राहें अलग हो गई हैं. इन सीटों के लिए 13 नवंबर को मतदान होना है जिसके लिए नामांकन की प्रक्रिया शुरू हो गई है. नॉमिनेशन प्रक्रिया के बीच लेफ्ट ने छह में से पांच सीटों के लिए अपने उम्मीदवारों के नाम का ऐलान कर दिया है. लेफ्ट की ओर से उम्मीदवारों का ऐलान किए जाने के साथ ही अब यह साफ हो गया है कि सूबे में 2016 से ही चला आ रहा यह गठबंधन कम से कम उपचुनाव में नहीं नजर आएगा.

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कांग्रेस और लेफ्ट के गठबंधन की बात करें तो इसकी शुरुआत साल 2016 में हुई जब दोनों दलों के बीच मिलकर विधानसभा चुनाव लड़ने पर सहमति बनी थी. 2019 के लोकसभा चुनाव में दोनों दलों ने अलग-अलग उम्मीदवार उतारे लेकिन 2021 के विधानसभा चुनाव के लिए लेफ्ट और कांग्रेस ने गठबंधन का ऐलान 2020 में ही कर दिया था. 2021 का विधानसभा चुनाव कांग्रेस, वाममोर्चा और आईएसएफ ने साथ मिलकर लड़ा था. यह अलग बात है कि तब कांग्रेस और लेफ्ट, दोनों ही दल खाली हाथ रह गए थे जबकि गठबंधन को मिली इकलौती सीट आईएसएफ ने जीती थी.

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पश्चिम बंगाल चुनाव 2021 के खराब प्रदर्शन के बावजूद कांग्रेस-लेफ्ट के साथ पर विपरीत असर नहीं पड़ा. 2024 के लोकसभा चुनाव में भी तमाम अगर-मगर के बीच गठबंधन जारी रहा. तब कांग्रेस को एक सीट मिली थी और लेफ्ट इस बार भी खाली हाथ ही रहा. ऐसे नतीजों के बाद लेफ्ट पार्टियों के बीच आपस में ही यह बहस तेज हो गई कि कांग्रेस के साथ रहना चाहिए या नहीं. कुछ पार्टियां ऐसी भी थीं जिन्होंने शून्य पर सिमटने के लिए कांग्रेस से गठबंधन को जिम्मेदार ठहराया. अब लोकसभा चुनाव के बाद हो रहे उपचुनाव में दोनों ही पार्टियां अकेले ताल ठोकती नजर आएंगी.

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कांग्रेस ने अभी उम्मीदवारों का ऐलान नहीं किया है लेकिन पार्टी सूत्रों की मानें तो संभावित उम्मीदवारों के नाम की लिस्ट दिल्ली भेजी गई है. शीर्ष नेतृत्व से हरी झंडी मिलने के बाद एक-दो दिन में उम्मीदवारों का ऐलान कर दिया जाएगा. गौरतलब है कि लोकसभा चुनाव में जीत के बाद विधायकों के इस्तीफे की वजह से छह सीटें रिक्त हुई हैं. ये छह सीटें हैं- सीताई, मदारीहाट, नैहाटी, मेदिनीपुर, तालडांगरा और हरोआ विधानसभा क्षेत्र. लेफ्ट उम्मीदवारों की सूची में हरोआ को छोड़कर बाकी पांच सीटों से प्रत्याशियों के नाम हैं.

किस सीट से कौन उम्मीदवार

लेफ्ट फ्रंट की ओर से जो सूची जारी की गई है, उसके मुताबिक सीताई सीट से फॉरवर्ड ब्लॉक के अरुण कुमार बर्मा, मदारीहाट से आरएसपी के पदम ओराम, नैहाटी से सीपीआई (एमएल) के देबज्योति मजूमदार, मेदिनीपुर से सीपीआई के मणि कुंतल खमरुई और तालडांगरा से सीपीआई (एम) के देबकांति महंती चुनाव मैदान में होंगे. फ्रंट की ओर से यह भी कहा गया है कि हरोआ सीट से उम्मीदवार का ऐलान भी जल्द ही कर दिया जाएगा. विधानसभा उपचुनाव में इस बार तृणमूल कांग्रेस, बीजेपी, कांग्रेस और लेफ्ट उम्मीदवारों के बीच चौतरफा मुकाबले के लिए मंच सेट हो गया है.

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