उत्तर प्रदेश क्रिकेट एसोसिएशन यानी की यूपीसीए में खिलाड़ियों के सिलेक्शन को लेकर कई बार सवाल उठते रहे हैं. इस बार यूपी की रणजी टीम में अपने बड़े भाई को चयनित कराने के लिए कानपुर में छोटे भाई ने प्रदेश का चीफ सेक्रेटरी बनकर क्रिकेट एसोसिएशन के अधिकारियों को फोन लगा दिया.
प्रदेश के चीफ सेक्रेटरी दुर्गा प्रसाद मिश्रा के नाम से उसने यूपीसीए के सेक्रेटरी प्रवीण गुप्ता को फोन करके अपने भाई के सिलेक्शन करने का दबाव बनाया. इसके लिए उसने चीफ सेक्रेटरी के नाम से एक मैसेज भी भेज दिया. इस मामले में पुलिस ने जांच की और उसके बाद दोनों भाइयों समेत उसके पिता को भी सोमवार को गिरफ्तार कर लिया.
दरअसल कानपुर के बर्रा के रहने वाले अटल मिश्रा अकाउंटेंट हैं. उनका बड़ा बेटा इशांत मिश्रा कई सालों से यूपी की टीम में सिलेक्शन के लिए प्रैक्टिस करता है लेकिन उसका कहीं सिलेक्शन नहीं हो पाया.
इसी दौरान उसे कहीं से पता चला कि अगर यूपी का कोई अधिकारी यूपीसीए के पदाधिकारी को फोन कर दे तो सुनवाई जल्द होती है. इसकी चर्चा उसने छोटे भाई अंश मिश्रा से की. अंश ने इसके लिए प्लान बनाया और उसने कहीं से यूपीसीए के सेक्रेटरी प्रवीण गुप्ता का नंबर हासिल कर लिया. अंश ने इसके बाद प्रवीण गुप्ता के फोन नंबर पर यूपी के चीफ सेक्रेटरी दुर्गा प्रसाद मिश्रा के नाम से एक मैसेज भेजा कि इशांत मिश्रा को टीम में सेलेक्ट कर लिया जाए.
राज्य के प्रमुख सचिव के नाम से भेजे गए इस मैसेज की सूचना कानपुर पुलिस को दी गई. कानपुर पुलिस ने दो दिन तक इस मामले की जांच के बाद दोनों भाइयों समेत उनके पिता को चीफ सेक्रेटरी के नाम से फर्जी मैसेज का सहारा लेकर इशांत मिश्रा को टीम में चुनने का दबाव बनाने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया.
चीफ सेक्रेटरी बनकर फर्जी मैसेज करने के आरोप में गिरफ्तार
बर्रा थाने के एसीपी अभिषेक पांडे ने कहा, पिता और दोनों बेटों को चीफ सेक्रेटरी के नाम पर फर्जी मैसेज का सहारा लेकर यूपीसीए की टीम में सिलेक्शन करने का दबाव बनाने के आरोप में पकड़ा गया है. एसीपी का कहना है इस मामले में पुलिस ने अपनी तरफ से एफआईआर दर्ज की है क्योंकि यह लोग चीफ सेक्रेटरी के नाम पर फर्जी मैसेज भेज रहे थे.
यूपीसीए पर पहले भी लगे हैं आरोप
चीफ सेक्रेटरी के नाम से फर्जी मैसेज भेजना बिल्कुल गलत है लेकिन इस मामले में यूपीसीए पर भी सवाल उठ रहे हैं. यूपीसीए में सिलेक्शन पर अक्सर सवाल उठते रहते हैं. अभी अक्टूबर महीने में यूपीसीए के पदाधिकारी के नाम पर सोशल मीडिया पर कुछ ऑडियो वायरल हुए थे जिसमें दावा किया गया था कि यूपीसीए में टीम में सिलेक्शन के लिए आप 30 लाख रुपये दीजिए. सलेक्टर कुछ नहीं करेंगे टीम कहीं और से फाइनल होती है. इस वायरल ऑडियो को लेकर यूपीसीए की तरफ से दावा किया गया था की वो फर्जी ऑडियो है.
बता दें कि 15 साल पहले यूपीसीए की टीम के एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी ने बाद में टीम में जगह न मिलने पर ग्रीन पार्क स्टेडियम के पास एक टावर के ऊपर से छलांग लगाकर खुदकुशी कर ली थी. यूपीसीए के अंडर 17 टीम में सिलेक्शन के नाम पर एक खिलाड़ी ने पैसा मांगने का आरोप भी लगाया था.
रंजय सिंह